इस बहस को सहेज कर रख लिया गया है – जवाब देने की अनुमति नहीं है

कहाँ थमेगी हिंसा-प्रतिहिंसा?

भारत सरकार कह रही है कि नक्सलियों का प्रभाव देश के 20 राज्यों के 223 ज़िलों में फैल गया है और अब वह नक्सलियों के ख़िलाफ़ निर्णायक लड़ाई की तैयारी कर रही है.

दूसरी ओर नक्सली मानते हैं कि ग़रीब और पिछड़े लोगों के लिए सरकार कुछ नहीं करती और वह सिर्फ़ शोषण करती है. इसलिए वह लोगों की अपनी जनवादी सरकार की स्थापना करना चाहते हैं.

नक्सली हिंसा और उनके ख़िलाफ़ सरकार की कार्रवाई दोनों चरम पर है. इस लड़ाई में कुल मिलाकर ग़रीब आदिवासी ही मारे जा रहे हैं.

नक्सली समस्या क्या सिर्फ़ क़ानून-व्यवस्था की समस्या है या इसके पीछे सामाजिक आर्थिक कारण भी हैं?

क्या सरकारें सचमुच विकास को अनदेखा कर रही हैं?

सवाल यह भी है कि विकास और ग़रीबों की भलाई के लिए क्या हथियार उठाना और हिंसा ही अंतिम विकल्प है? आख़िर हिंसा-प्रतिहिंसा का यह दौर आख़िर कहाँ थमेगा?

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प्रकाशित: 10/9/09 6:30 AM GMT

टिप्पणियाँ

टिप्पणियों की संख्या:26

सभी टिप्पणियाँ जैसे जैसे वो आती रहती हैं

Added: 10/11/09 10:15 AM GMT

नक्सली समस्या का कारण राजनीति, सामाजिक और आर्थिक है. हमारे देश में सरकारें केवल अपनी कुर्सी बचाने में लगी रहती हैं. जब अपने सिर के ऊपर गुज़रने लगता है तब चेतती हैं. लेकिन फिर भी अपने ही देशवासियों के विरुद्ध सेना का उपयोग नहीं करना चाहिए. बल्कि इनकी समस्याओं को सुलझा कर इन्हें रोज़गार देकर देश के साथ जोड़ना चाहिए.

manju delhi

Added: 10/11/09 8:15 AM GMT

सरकार और स्थानीय नेता विकास के नाम पर भेदभाव करते हैं. सभी सरकारें और सभी नेता भी यही चाहते हैं कि जितने लोग पीछे रहेंगे, उतने ही वोट हासिल उनके किए जाते रहेंगे. क्योंकि पिछड़े को आसानी से बरगलाया जा सकता है. रही बात नक्सलवादियों की तो हथियार उठा कर कोई बात नहीं मनवाई जा सकती और उससे बेगुनाह ही मारे जाते हैं. उन्हें बात मनवाने के लिए सभी लोगों को साथ लेकर चलना चाहिए.

himmat singh bhati jodhpur

Added: 10/11/09 7:59 AM GMT

ना रुकने वाला प्लेग का भंयकर रोग है.

काकी

Added: 10/11/09 7:44 AM GMT

भारत के कई इलाक़े ख़ासकर झारखंड, पश्चिम बंगाल, पूर्व महाराष्ट्र और बिहार बहुत पिछडे हैं और वहाँ मूलभूत सुविधाओं की कमी है. आज़ादी के 60 साल बाद भी कोई प्रगति नहीं हुई है. शायद इसलिए लोगों ने हथियार उठाए हैं और अपनी एक सामानांतर सरकार बना रखी है. पर नक्सली हिंसा को कोई सही नहीं ठहरा सकता. भारत सरकार को चाहिए कि सिर्फ़ दोषी मओवादियों पर ही कारवाई करे और कोई बेक़सूर लोगों की जाने नहीं जानी चाहिए. इस समस्या का अंतिम विकल्प यही ही है कि सरकार इन नक्सली प्रभावित जगहों पर बुनियादी सुविधाएँ मुहैया कराए.

Ranjeet Chakraborty Pune

Added: 10/11/09 7:19 AM GMT

भारत में नक्सलवाद के जन्म के लिए भारतीय राजनेता ज़िम्मेदार हैं. राजनेता नक्सलवादियों के प्रभाव का इस्तेमाल चुनाव में करते हैं क्योंकि नक्सलियों के समर्थन के बिना चुनाव जीतना असंभव होता है. राजनेताओं के मन में उनके प्रति नरम भावना है. भारतीय व्यवस्था की एक ख़ामी ये है कि नक्सल इलाक़े के विकास के लिए जो नीतियाँ बनाई जाती हैं, उसका सारा पैसा नेताओं की जेब में जाता है.

Satya Amsterdam

Added: 10/10/09 3:05 PM GMT

इसके पीछे जो भी राजनीतिक विचारधारा हो, ये एक बीमारी की तरह है. लेकिन माओवादियों को अन्याय, रोज़गार के कम मौक़े, खाना, आवास और पुलिस के अन्याय के कारण समर्थन मिलता है.

ujjwal baroda

Added: 10/10/09 1:56 PM GMT

भारत में नक्सली दिन-दूना रात चौगुना बढ़ रहे हैं. इसमें सरकार भी दोषी है. वो आंतरिक सुरक्षा पर ज़्यादा ज़ोर न देकर पड़ोसी मुल्क के आंतरिक मामले में ज़्यादा ज़ोर दे रहा है. भारत में दिन प्रतिदिन ग़रीबी और बेरोज़गारी बढ़ रही है. इसलिए को माओवाद वहाँ पनप रहा है. महाराष्ट्र तक माओवादी प्रभाव क़ायम होना बड़ी दुख की बात है.

DINESH YADAV kathmandu, Nepal

Added: 10/10/09 12:57 PM GMT

नक्सलियों को सरकार के साथ बैठकर बात करनी चाहिए. हिंसा करके तो नक्सली अपना भी नुक़सान कर रहे हैं. उनके अपने भी आदमी मारे जाते हैं. तो ऐसा करके उन्हें क्या मिल रहा है. हिंसा से आज तक कोई जीत नहीं हो पाई है. ये सिलसिला बंद हो जाना चाहिए. इसका देश की सुरक्षा के लिए नक्सलवाद का हल होना बेहद ज़रूरी है.

Monika tomer Noida Sector 22

Added: 10/10/09 12:26 PM GMT

नक्सली आज अपने रास्ते से भटक कर नेताओं के हाथ का खिलौना बन चुके हैं. हालाँकि जब उनका आंदोलन शुरू हुआ था तब उनका एक मकसद था. एक ऐसी विचारधारा थी जो इस देश की सड़ी-गली व्यवस्था को बदलने की कूव्वत रखती थी. लेकिन अफ़सोस व्यवस्था को बदलने की बजाए वो ख़ुद इस व्यवस्था में शामिल होकर अपने रास्ते से भटक गए. ज़ाहिर है इस देश के नेताओं और नौकरशाहों ने उन्हें जो सब्ज़बाग़ दिखा कर अपनी चाल चली, वो उसमें कामयाब हो गए.

SHAMS TAMANNA New Delhi

Added: 10/10/09 11:13 AM GMT

भारतीय राजनीति का छुपा चेहरा है नक्सलवाद. इसे रोकने के लिए सामाजिक-राजनीतिक स्तर पर पहल करना होगा. नक्सली भारत के तालेबानी हैं इसलिए ज़रूरी कार्रवाई होनी चाहिए. जो देश के हित में है. नक्सली से रिश्ता रखने वाले नेताओं के ख़िलाफ़ भी कार्रवाई की ज़रूरत है.

kishor k singh delhi

Added: 10/10/09 11:05 AM GMT

थोड़े से नक्सलवादी स्थानीय लोगों के समर्थन बिना कुछ नही कर सकते. आज़ादी के बाद नक्सल प्रभावित क्षेत्रो में स्थानीय लोगों को सच्चा नेतृत्व नहीं मिला. ज़मीन से जुड़े मुद्दे भी उपेक्षित ही रहे. सरकारी सुविधाओं की घोषणाएँ तो हुई लेकिन वे गाँवों तक पहुँची नहीं, इस सबके चलते नक्सलवाद बढ़ता जा रहा है. इसका अंत तभी हो सकता है जब स्थानीय समस्याएँ सुलझाईं जाएँ. नक्सलवादियों को एक बार माफ़ किया जाए और समाज की मूलधारा में शामिल किया जाए.

vivek ranjan shrivastava jabalpur भारत

Added: 10/10/09 10:56 AM GMT

माओवाद भारत में सत्ता प्राप्ति की सीढ़ी है.

Ravi Shankar Gunsej Rohtash Bihar

Added: 10/10/09 10:46 AM GMT

नक्सली हिंसा किसी भी तरीक़े से सही नहीं है. मैं इसका समर्थन नहीं करता हूँ. उन्हें अपने हथियार छोड़ कर अपने अधिकारों के लिए सरकार से लड़ना चाहिए.

chandra bhushan mishra rewa

Added: 10/10/09 8:52 AM GMT

भारत सरकार को कभी भी नक्सलवादियों के ख़िलाफ़ सेना की कार्रवाई नहीं करनी चाहिए. उस इलाक़े में सेना को नहीं लगाना चाहिए. उस इलाक़े के लोगों को रोज़गार और काम देकर ही नक्सल समस्या को ख़त्म किया जा सकता है. इस तरह की कार्रवाई करने पर उस इलाक़े के आम आदमी ही पिसे जाएँगे. ये अपने देश की जनता पर बंदूक चलाना होगा.

ashwin gujarat

Added: 10/10/09 6:08 AM GMT

पहले हमने अंग्रेज़ों से आज़ादी के लिए जंग लड़ी क्योंकि हमें लगता था कि वो लोग हमें अपने ग़ुलाम समझते हैं और हमें अंग्रेज़ हुकूमत से अपने जीवन सुधार के नाम पर वायदे या तिरस्कार के सिवा कुछ नहीं मिलता. आज फिर नक्सली और 2-3 संगठनों ने देश में आतंक मचाया हुआ हैं तो क्या ये सिर्फ़ उन्हीं का दोष हैं या फिर इसमे हमारी सरकारों की भी नाकामिया हैं जिन्होंने इन लोगो के सुधार के लिए कुछ भी नहीं किया. ये लोग 60 साल पहले भी जंगलों में थे और आज भी.

Shahid Salam Buland Shahr Buland Shahr

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