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पाकिस्तान से बातचीत की पेशकश पर राय

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भारत प्रशासित कश्मीर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए पाकिस्तान की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाया है.

उन्होंने कहा है कि वे मानते हैं कि अधिकतर पाकिस्तानी भारत के साथ दोस्ती चाहते हैं.

उन्होंने ये भी कहा कि अनेक मसलों को सुलझाने के लिए भारत को पाकिस्तान का सहयोग चाहिए और भारत पाकिस्तान के साथ बातचीत के लिए तैयार है.

लेकिन मनमोहन सिंह ने ज़ोर देकर कहा, "..लाभदायक बातचीत के लिए ज़रूरी है कि आतंकवाद पर काबू पाया जाए. पाकिस्तान में जो लोग भारत में आतंकवाद फैलाना चाहते हैं, फिर वे चाहे ग़ैर-सरकारी ही हों, उनके तंत्र को नष्ट किया जाए और उन्हें सज़ा दिलाई जाए."

पाकिस्तान के सामने भारतीय प्रधानमंत्री की पेशकश पर आपके क्या विचार हैं. क्या ये उपयुक्त समय है कि दोनों देश आपस में बैठकर अपने मसले सुलझाएँ? क्या आप भारतीय प्रधानमंत्री के कथन से सहमत हैं कि चरमपंथी भारत और पाकिस्तान के बीच दूरियाँ कायम रखना चाहते हैं?

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प्रकाशित: 10/29/09 5:35 AM GMT

टिप्पणियाँ

टिप्पणियों की संख्या:47

सभी टिप्पणियाँ जैसे जैसे वो आती रहती हैं

Added: 11/9/09 4:09 PM GMT

हमें तो नहीं लगता है कि पाकिस्तान के साथ दोस्ती का हाथ बढ़ाना चाहिए. इससे पहले हम कितनी बार दोस्ता का हाथ बढ़ा चुके हैं और नुक़ासन हुआ है. हमारा मानना है कि हम शांति के साथ जीने वाले हैं और हमपर गाँधी हावी है. लेकिन हमें पाकिस्तान की हरकतों को नहीं भूलना चाहिए.

shivbhshan singh ranchi

Added: 11/8/09 7:46 AM GMT

बार बार पाकिस्तान हमारे देश में आंतकी गतिविधियों के जरिए जन धन का नुकसान करता है. उस पर कोई कार्रवाई करने के बजाय बातचीत की पेशकश हमारे सरकार की कमजोरी दर्शाती है. आज छोटे-छोटे देश भी हमें आँख दिखाते हैं और हम मूक बने रहते हैं.

manju delhi

Added: 11/7/09 5:15 PM GMT

प्रधानमंत्री जी आप बात करेंगे तो क्या करेंगे. मेरे ख़्याल से पाकिस्तान के बारे में सोचने से अच्छा है कि आप महंगाई के बारे में सोचे. इससे शायद हम ग़रीबों का भला होगा. आप बात भी करें तो भी उनमें बदलाव की गुंजाइश नहीं है. जब तक आंतकवाद को लेकर पाक गंभीर नहीं होता, बातचीत गंभीर नहीं हो सकती.

Mohammad Tajuddin Al Ain, UAE

Added: 11/7/09 6:03 AM GMT

हमारे देश की अनुशासित और बहादुर सेना इस देश की रक्षा करने में पूर्णतः समर्थ है किन्तु यह भी एक सच्चाई है कि हम अमेरिका और चीन के कूटनैतिक दबाब को नकार नही सकते. फलस्वरूप बातचीत के अतिरिक्त हमारे पास और कोई रास्ता नही बचता है. नही तो जिन कारणों से अमेरिका आज ड्रोन हमले कर रहा है उन कारणों से हम दशकों पहले से पीड़ित होते आ रहे हैं.हम वैसा क्यों नहीं कर सकते थे? यदि हम कमज़ोर हैं तो बातचीत ही एक रास्ता है.सच्चाई ये भी है है कि कमज़ोर और ताक़तवर में किसी भी प्रकार की निर्णायक बातचीत नहीं हो सकती.

देवव्रत चौहान New Delhi

Added: 11/6/09 4:54 PM GMT

मेरा मानना है कि मनमोहन सिंह ने पाकिस्तान के साथ वातावरण बेहतर करने के लिए काफ़ी कुछ किया है. मैं समझता हूँ कि बातचीत ही पड़ोसी के साथ रिश्ते बेहतर करने का एक रास्ता है. पाकिस्तान की समस्या है अस्थिर सरकार और सैन्य शासन. मनमोहन सिंह को अपना ध्यान चीन पर भी केंद्रित करना चाहिए.

abhisheka anand gurgaon,India

Added: 11/6/09 3:07 PM GMT

आदरणीय प्रधानमंत्री जी आपका बयान आज़ादी के 62 साल बाद भी वैसा ही है. आज हमारे देश मे अशिक्षित वर्ग कई गुना अधिक है.हमारा मानना है पाकिस्तान के राज नेता भारत के साथ जितना बुरा करेंगे उन्हें उतना ही देशभक्त माना जाएगा.

krishan kant varanasi भारत

Added: 11/5/09 6:51 AM GMT

न माहौल न कोई अवसर फिर भी बातचीत की पेशकश. ये बिन बादल बरसात लगती है. कहीं अमेरिका की कृपा से तो ये पेशकश की जा रही है.

Ajay kumar Darbhanga

Added: 11/4/09 5:48 AM GMT

मेरे भाई पाकिस्तान ऐसा देश है जिसने शांति की चाहे जैसी भी बात करें, वो शांति की राह नहीं अपना सकता. ये भारत और हमारे प्रधानमंत्री का की सर्वच्च नीति है कि वो बातचीत के लिए आगे हाथ बढ़ाया है. हालाँकि पाकिस्तान वही देश है जिसने हमेशा शांती की राह में रुकावट डाला है.

HARENDRA SINGH SONGAGH, SURAT

Added: 11/3/09 6:29 PM GMT

भारत को कड़े शब्दों के साथ पाकिस्तान के साथ बातचीत से इनकार करना चाहिए. भारत काफ़ी कुछ इसके क़ुर्बानी दे चुका है. हम देख रहे हैं कि पाकिस्तान ने जो बोया वो आज बो रहा है.

Prakash veer Jaipur

Added: 11/3/09 8:05 AM GMT

हम सभी भारतीय प्रधानमंत्री की राय से सहमत हैं और हमें पूरा विश्वास है कि पाकिस्तान का आवाम भी दोनों मुल्कों के बीच शांति चाहता है. लेकिन पाकिस्तान की सरकार की मंशा अब भी साफ नहीं दिखती. हमारी सरकार को शांति बहाली के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए, लेकिन हमें अपने पक्ष को मज़बूती से रखना चाहिए, ताकि कोई ये ना समझे की हम कमज़ोर हैं. शांति की चाहत हमारी कमज़ोरी नहीं है.

Sanjeev Ranjan Lautan, Dholi, Muzaffarpur

Added: 11/2/09 9:37 AM GMT

समय और जनता की गाढ़ी कमाई की बर्बादी है. कुत्ते की दुम तो सीधी भी हो जाती है लेकिन पाकिस्तान कभी भी भारत की भलाई नहीं चाहेगा. हर बैठक के बाद एक नया हमला होता है.

faheem ali Mumbai

Added: 11/2/09 9:33 AM GMT

भले ही यह एक आदर्श आह्वान हो, वैश्विक स्तर पर इसकी प्रशंसा भी हो. पर आम भारतीय अभी मुंबई कांड भुला नही है. मजबूरी का नाम महात्मा गांधी. मनमोहन जी की यह पेशकश हजम नहीं हो रही. क्या अगले शांति के नोबल पुरस्कार के नामिनेशन को पक्का करने के लिये यह कहा है उन्होंने?

dinbandhu jai Baroda

Added: 11/1/09 6:33 PM GMT

मनमोहन सिंह जी पेशकश उनका बड़प्पन है.

anwarul waheed jabalpur

Added: 11/1/09 11:31 AM GMT

जिसकी कथनी और करनी में अंतर हो, मुँह में कुछ और मन में कुछ और हो ऐसे से बात करके क्या फायदा? हां कारगिल जैसा धोखा जरूर मिल सकता है. पाक जब तक ईमानदार नहीं हो जाता तब तक उससे बात करना बेवकूफी है, और वह कभी ईमानदार हो नहीं सकता.

Ramnath Mutkule Indore

Added: 11/1/09 5:54 AM GMT

पाकिस्तान के साथ बातचीत की पेशकश में कोई बुराई नहीं है. लेकिन पाकिस्तान को ये बताने की जरूरत है कि दरअसल उसे कई मसलों को सुलझाने में हमारे ताक़त की ज़रूरत है, न कि हमें उसकी. हमारे इस पड़ोसी देश की सत्ता कभी जनता के हाथ में रही नहीं और अब तो शासक भी अल क़ायदा और लश्कर की रहमदिली पर ही कुर्सी पर बैठे दिखाई देते हैं. तो फिर क्या करेंगे जरदारी और क्या होगा गिलानी से, उनके लिए अहम सवाल कश्मीर नहीं बल्कि खुद पाकिस्तान है. प्रधानमंत्री महोदय पाकिस्तान को मदद की पेशकश कर डालिए, मांगिए मत.

ABHAY UPADHYAY NOIDA

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