इस बहस को सहेज कर रख लिया गया है – जवाब देने की अनुमति नहीं है

सर्विसेज़ टीम को लेकर उठे विवाद पर आपकी राय

मंगलवार को जिस वक़्त भारत प्रशासित राज्य जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में लोग रणजी ट्राफ़ी क्रिकेट मैच देखने के लिए इकट्ठा हो रहे थे, उस वक़्त वहाँ ख़बर पहुँची कि सर्विसेज़ टीम सुरक्षा कारणों से मैच खेलने नहीं आ रही है.

इसके बाद रक्षा मंत्रालय के नियंत्रण वाली सर्विसेज़ टीम पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई ने प्रतिबंध की घोषणा कर दी. मामला यहीं शांत नहीं हुआ, राज्य में यह राजनीतिक मुद्दा बन गया. जम्मू कश्मीर क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष फ़ारुक़ अब्दुल्ला सहित कई नेताओं ने घाटी में सुरक्षा की कमी के सर्विसेज़ के तर्क की भर्त्सना की. सर्विसेज़ के ख़िलाफ़ प्रदर्शन तक हुए.

बुधवार को जम्मू पहुँचे गृहमंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि सर्विसेज़ ने माफ़ी मांग ली है तो बीसीसीआई को प्रतिबंध वापस ले लेना चाहिए और मैचों की नई तारीख घोषित की जानी चाहिए.

इन बयानों, विरोधों, प्रतिबंधों और सेना की टीम की सुरक्षा चिंताओं के उतार-चढ़ाव के बारे में आपका मन क्या कहता है. आप क्या देख पा रहे हैं इन तमाम पहलुओं के बाहर और भीतर, पूरे घटनाक्रम पर क्या है आपकी राय... हमें ज़रूर अवगत कराएं.

प्रकाशित: 11/4/09 1:31 PM GMT

टिप्पणियाँ

टिप्पणियों की संख्या:18

सभी टिप्पणियाँ जैसे जैसे वो आती रहती हैं

Added: 11/7/09 3:50 AM GMT

पूरी दुनिया में अपने अदम्य साहस और वीरता का लोहा मनवानेवाली भारतीय सेना जम्मू-कश्मीर में एक मैच खेलने के मामले में पीठ दिखा जायेगी ऐसा सोचना भी मूर्खता होगी. इसके पीछे जरूर कोई-न-कोई रहस्य है जो शायद समय आने पर उजागर भी हो जायेगा. भारतीय सेना के जवान आज भी किसी भी संकट से मुकाबले को तैयार हैं और निबटने में सक्षम भी. इस घटना का राजनीतिकरण न किया जाये यही देशहित में होगा. क्योंकि इससे सेना के मनोबल को कभी भरपाई न की जा सकनेवाली क्षति होगी. वैसे भी जम्मू-कश्मीर को वाकओवर मिल गया है और पूरा अंक भी.

braj kishore singh hajipur, bihar (india)

Added: 11/6/09 12:23 PM GMT

सर्विसिज़ की टीम के न खेलने का फ़ैसला भारत के लिए सोचने वाली बात है. जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा का काफ़ी काम सेना संभालती है लेकिन फिर भी टीम ने खेलने से इनकार क्यों किया?

Masung Chaudhary Ahmedabad, Gujarat

Added: 11/6/09 9:51 AM GMT

पूरे देश को जो बता रहे कि अब कश्मीर की स्थिति अच्छी हो रही है, जब उनके खिलाड़ियों को उन पर भरोसा नही है तो देश की जनता को क्या होगा?

हेम बधानी दुबई

Added: 11/6/09 5:30 AM GMT

अभी पाँच दिन पहले गुजरात से कश्मीर का दौरा किया. कहीं भी कुछ भी ख़ौफ़ नज़र नहीं आया. ऐसे में ये बयान गुमराह करने वाला है.

mukesh h thakur ahmedabad

Added: 11/6/09 4:57 AM GMT

भारतीय सेना का बयान इस बात का प्रमाण है कि कश्मीर में आम जनता सुरक्षित नहीं है.

Mani Bhopal

Added: 11/5/09 2:29 PM GMT

ये आश्चर्य की बात है कि भारतीय सेना कह रही है कि कश्मीर महफ़ूज़ नहीं है. सरकार को उन अधिकारियों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई करनी चाहिए जो ऐसा कह रहे हैं.

Anil Bordeaux

Added: 11/5/09 1:02 PM GMT

मुश्किल यह है कि आज जो कुछ जैसा दिखता है वह यथार्थ में कुछ भिन्न ही होता है. आतंक, नक्सलवाद और सुरक्षा व्यवस्था आदि के बहाने गढ़ लिए जाते हैं. इस प्रकरण में भी भीतरी राजनीति कुछ अलग ही लगती है.

vivek ranjan shrivastava jabalpur भारत

Added: 11/5/09 9:45 AM GMT

जिस देश की संसद, अक्षरधाम मंदिर और मुंबई के प्रतिष्ठित होटलों में सरेआम हमले हुए हैं, वहाँ कश्मीर जैसे विस्फोटक जगह के महफ़ूज़ होने पर सर्विसेज़ की चिंता जायज़ ही लगती है.

dr. sunil delhi

Added: 11/5/09 7:12 AM GMT

इस ग़ैर ज़िम्मेदाराना फ़ैसले से जो नुक़सान होना था वो हो चुका है. एक तरफ़ हम कश्मीर सुरक्षित है कह-कह कर सैलानियों को बुलाने की कोशिश करते हैं और दूसरी तरफ़ हमारी सेना वहां सुरक्षित महसूस नही करती. थोड़ा इंतेज़ार कीजिए आने वाले कुछ दिनों में कोई न कोई पाकिस्तानी राजनयिक इस घटना का ज़िक्र अंतरराष्ट्रीय मंच पर ज़रूर करेगा और इस बात कि दुहाई देगा कि जहां भारत की सेना कुछ घंटो के मैच के लिये ख़ुद अपनी टीम की सुरक्षा की गारंटी नही दे सकती वहां पूरे राज्य की जनता के सुरक्षित होने का दावा कैसे किया जा सकता है.

Idrees A. Khan Riyadh, Saudi Arabia.

Added: 11/5/09 6:11 AM GMT

हम सब भारतीय सेना के साहस और बलिदान को देख चुके हैं फिर भी आलोचना करना, राजनीति करना और कुछ भी बोल देना उचित नहीं है.बस परिस्थितियाँ कुछ ऐसी है और बात समझने की जऱूरत है. सेना की कार्यप्रणाली संवेदनशील होने के साथ-साथ गोपनीय भी होती है.

शम्भु नाथ झा खडग पुर

Added: 11/5/09 5:49 AM GMT

अगर हमारी सेना ये कहे कि वो कश्मीर में महफूज़ नहीं तो क्या हमारी सरकार झूठ बोल रही है कि कश्मीर में हालात सामान्य है. क्या सेना की इस शर्मनाक करतूत से पाकिस्तान अब सारी दुनिया में ये नहीं कहेगा कि जहाँ भारत की सेना तक महफूज़ नहीं वहाँ जनता कैसे महफूज़ होगी? सेना को अपने किए पर शर्मिंदगी के साथ राष्ट्र से मांफी माँगनी चाहिए.आज हम सब जानते है कि सच्चाई ये है कि कश्मीर अब सामान्य होने की तरफ़ है और कश्मीरी अब अपने को भारतीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों में खुले दिल से हिस्सा ले रहे है.

M.Shahid Salam Bulandshahr [U.P.]

Added: 11/5/09 1:27 AM GMT

बक़ौल साहिर लुधियानवी-
ज़माना बर-सरे पैकार है, पुर-ख़ौफ़ शोलों से,
तेरे होंठों पे अब भी नग़म-ए-ख़ैयाम है साक़ी.

डा0 उत्सव कुमार चतुर्वेदी रोचेस्टर, अमेरिका

Added: 11/4/09 7:30 PM GMT

ये बड़ा ही विचारणीय विषय है कि क्यों सेना की टीम ने सुरक्षा का हवाला देते हुए मैच खेलने से इनकार कर दिया.क्या ये एक राजनीतिक स्टंट था या वाकई में श्रीनगर में सुरक्षा की स्थिति इतनी ख़राब है? अगर कुछ समय के लिए ये सही मान भी लिया जाए तो ये बात हजम नहीं होती कि जिन पर पूरे देश की सुरक्षा टिकी हुई है, उनकी टीम असुरक्षित है.मेरा मानना है कि बीसीसीआई का टीम पर प्रतिबंध लगाने का फ़ैसला जल्दबाजी में लिया गया है.

kumar Vivek Ranjan BHU,Varanasi

Added: 11/4/09 7:00 PM GMT

सर्विसेज़ एक सरकारी टीम है जिसे न केवल खेल भावना बल्कि राष्ट्रीयता व देशहित की भावना दिखानी चाहिए थी. अगर अपने घर में ही आपको सुरक्षा का भय है तो ऐसे में हम जम्मू-कश्मीर की जनता के दिलों को कैसे जीत पाएंगे.

suwa lal jangu Varanasi

Added: 11/4/09 6:35 PM GMT

कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत एक है.ऐसे में किसी राज्य से हम अलग व्यवहार नहीं कर सकते हैं. ये घटना घोर निंदनीय है, मेरे विचार से बीसीसीआई ने सही निर्णय किया है.

Gopal Bangalore

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