इस बहस को सहेज कर रख लिया गया है – जवाब देने की अनुमति नहीं है

भाषा के नाम पर सियासत कितनी उचित?

भारत की विधानसभाओं में मारपीट कोई नई बात नहीं है.

लेकिन राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना महाराष्ट्र की सड़कों पर जो अब तक करती आई थी,वो उसने विधानसभा में कर दिया.

हिंदी में शपथ लेने से नाराज़ महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के विधायकों ने समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आज़मी के साथ मारपीट की और उनका माइक उखाड़ कर फेंक दिया था.

इसके पहले एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे ने राज्य के सभी नवनिर्वाचित विधायकों को पत्र लिखकर उन्हें मराठी में शपथ लेने या नतीजे भुगतने की धमकी दी थी.

इसके पहले भी राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र में हिंदीभाषियों को निशाना बनाती रही है.

माना जा रहा है कि राज ठाकरे की पार्टी मराठीभाषी मतदाताओं को शिव सेना से हथियाने के लिए ये सब कर रही है.

आपका क्या मानना है कि भाषा के नाम पर सियासत कितनी उचित है?

साथ ही आप क्या सोचते हैं कि विधानसभाओं की गरिमा बनाए रखने के लिए क्या किया जाना चाहिए?

प्रकाशित: 11/10/09 2:10 AM GMT

टिप्पणियाँ

टिप्पणियों की संख्या:182

सभी टिप्पणियाँ जैसे जैसे वो आती रहती हैं

Added: 11/16/09 9:53 PM GMT

हिंदी सिर्फ़ उत्तर भारत की भाषा नहीं है. वो अब अंग्रेजी की तरह सब की भाषा बनती जा रही है. लोग इसे इसलिए इस्तेमाल कर रहे हैं क्योंकि इसे सीखना बहुत आसान हैं. दुनिया में वो सब से ज्यादा बोली जानेवाली ज़ुबानों में से तीसरे स्थान पर है. क्या अगर अबू आज़मी हिंदी में शपथ लिया होता तो महाराष्ट्र की ग़रीबी गायब होती. जो लोगों के पास सही मुद्दों के लिए जवाब नहीं होता है वो इस तरह की फ़िज़ूल मुद्दों को उठा कर लोगों को बढ़काते हैं. मुंबई दुनिया में हिंदी फिल्मों की बदौलत मशहूर है. यही सच्चाई है.

Kirthi Wijesinghe Sydney ऑस्ट्रेलिया

Added: 11/16/09 11:42 AM GMT

लोगों को समझना चाहिए कि आख़िर क्यों ऐसे राजनेता ऐसे मुद्दों को उठा रहे हैं.

jatin Chandigarh

Added: 11/16/09 11:36 AM GMT

मुंबई ठाकरे की नहीं बल्कि सब की है.

vineet dubai

Added: 11/16/09 10:27 AM GMT

यह सबसे शर्मनाक घटनाओं में से एक है.

maneesh kumar sinha greater noida

Added: 11/16/09 9:41 AM GMT

महाराष्ट्र राज ठाकरे की निजी संपत्ति नहीं है. इसलिए हम उन्हें इतना अधिक क्यों प्राथमिकता दे रहे हैं. महाराष्ट्र की सरकार उनके खिलाफ़ सख़्त कार्रवाई नहीं कर रही हैं इसलिए हमारे प्रधानमंत्री को उनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए.

Vishal Choudhary Jaipur

Added: 11/16/09 9:18 AM GMT

अपनी भाषा पर सब को गर्व होना चाहिए, लेकिन दूसरों की भाषा का भी सम्नान करना चाहिए. लेकिन बाल ठाकरे वाला रास्ता पंजाबी, गुजराती, बंगाली और बाक़ी लोग अपनाएंगे तो भारत 1857 से पहली वाली स्थिति में पहुँच जाएगाय.

NRI chatting

Added: 11/15/09 9:44 AM GMT

राज ठाकरे जैसे लोगों को भारत मे रहने का अधिकार नहीं है. मैं प्रधानमंत्री से गुज़ारिश करता हूँ कि उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाए. अगर कार्रवाई नहीं हुई तो देश को महँगा पड़ेगा.

indian hindustaan

Added: 11/14/09 10:09 PM GMT

हिंदी भाषी लोग ग़ैर हिंदी भाषी को ये बताकर की हिंदी राष्ट्र भाषा है बेवकूफ़ बना रहे हैं. हिंदी कोई राष्ट्र भाषा नहीं है बल्कि उत्तर प्रदेश और बिहार की राज्य भाषा है.

Yogesh

Added: 11/14/09 9:24 PM GMT

राज ठाकरे जैसे लोग देश को बाँटने का काम कर रहे हैं. मैं समझता हूँ कि केंद्र सरकार को उनपर जल्द कार्रवाई करनी चाहिए.

Ashutosh Kumar Delhi

Added: 11/14/09 8:29 PM GMT

हम हिंदी पर राजनीति करने से पूरी तरह से असहमत हैं.

srishty delhi

Added: 11/14/09 8:19 PM GMT

बहुत ही ग़लत हैं....

चित्रसेन गौतम डेल्ही

Added: 11/14/09 5:41 PM GMT

बक़ौल नज़ीर बनारसी

लड़ के आपस में मरें,और वतन पर न मरें,
इस क़दर ख़ून और ख़ून-ए-शहीदाँ की कमी.

डा0 उत्सव कुमार चतुर्वेदी रोचेस्टर, अमेरिका

Added: 11/14/09 5:35 PM GMT

मैं बस राज ठाकरे जी से सिर्फ यही पूछना चाहता हूँ कि अगर उन्हें हिन्दी भाषा और भाषियों से इनती ही नफरत है तो उन्होंने वोट पाने के लालच मैं अपनी चुनाव सामग्री को मराठी के साथ-साथ हिन्दी भाषा में क्यों छापा था? "कोस-कोस पर पानी बदले कोस कोस पर बानी" इससे स्पष्ट होता है कि हमारे यहाँ भाषाओं की कोई सीमा नहीं है, यहाँ मुद्दा सिर्फ हिन्दी या मराठी का नहीं है असल मुद्दा है देश की एकता और अखंडता का है.

पायलट नेगी नई टिहरी, उत्तराखंड भारत

Added: 11/14/09 4:45 PM GMT

भाषा के नाम पर राजनीति बिल्कुल ग़लत है. भाषाएं तो लोगों को जोड़ती हैं. देश की सारी भाषाएं आपस में बहनें हैं जो देश की एकता की सूत्रधार हैं.

Parvez Ahmad Raipur

Added: 11/14/09 2:40 PM GMT

इतिहास गवाह है, लोग गद्दी हासिल करने के लिए आम लोगों की जिंदगी को सीढी की तरह इस्तेमाल करते आए हैं. अपना राज ठाकरे भाई कोई समाज सेवा करने घर से निकले नहीं हैं, उन्हें भी जल्दी में अपने चाचा जैसा बनना है. तो अपनी ख़ानदानी हैसियत खानदानी तरीके से पाना चाह रहे हैं तो क्य़ा गलत कर रहे हैं? पूरे देश ने जब चाचा को इतना आदर दिया तो भतीजे के पीछे आप लोग इतना हाथ धोकर क्यों पड़ गए हैं? यह सरासर ग़लत है ना?

गदीपक कुमार महतो रांची

बीबीसी को जानिए

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