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इस बहस को सहेज कर रख लिया गया है – जवाब देने की अनुमति नहीं है

भारत में मीडिया की भूमिका

हमने आप से आग्रह किया था कि आप मंगलवार को होने वाले हमारे विशेष कार्यक्रम बीबीसी इंडिया बोल का विषय सुझाएँ.

एक से बढ़ कर एक विषय सुझाने के लिए धन्यवाद. हमने इस बार चुना है भारत में मीडिया की भूमिका का विषय. अन्य विषयों पर आगे ज़रूर बात करेगें.

क्या भारत में समाचार माध्यम मसलन अख़बार, टीवी, रेडियो, इंटरनेट, लोकतंत्र के सजग प्रहरी की भूमिका निभा रहे हैं या फिर बाड़ ही खेत खा रही है.

कभी पैसा लेकर ख़बर दिखने के आरोप, तो कभी केवल बड़े चिकने चुपडों की चर्चा के आक्षेप. क्या मीडिया सच के लिए नेताओं से, न्यायपालिका से और व्यवस्था से उनके लिए लड़ रही है, जिन्हें न्याय नहीं मिला?

बीबीसी इंडिया बोल में इसबार बहस का विषय भारत में मीडिया की भूमिका. ऑनलाइन पर यह बहस अब आपके बीच है.

इस फ़ोरम के ज़रिए बहस में हिस्सा लें. अगली कड़ी में 16 फरवरी, मंगलवार, भारतीय समयानुसार रात आठ बजे हम आपके बीच फिर होंगे रेडियो की इस विशेष प्रस्तुति के साथ.

रेडियो कार्यक्रम में शामिल होने के लिए टोल फ्री नंबर 1800-11-7000 पर फोन करके कार्यक्रम में लाइव शामिल हों.

आप टोल फ्री पर पहले से भी अपना संदेश रिकॉर्ड करा सकते हैं. ऑनलाइन की प्रतिक्रियाएं भी होंगी रेडियो कार्यक्रम का हिस्सा. तो इंतज़ार किस बात का. बोल, बीबीसी इंडिया बोल.

प्रकाशित: 2/14/10 3:37 PM GMT

टिप्पणियाँ

टिप्पणियों की संख्या:48

सभी टिप्पणियाँ जैसे जैसे वो आती रहती हैं

Added: 2/16/10 5:14 PM GMT

भारतीय मिडिया को क्या कहूं शर्म को भी शर्म आ जाए. जैसी झूठी खबरें दिन-दिन भर दिखाते रहते हैं खासतैर से अगर आतंकवाद से जुडी खबर है तो पूछीए मत. पुलिस बोलती है कुछ सुराग मिला है तो चार हाथ आगे मिडिया बोलती है कि इंडियन मुजाहीदीन का हाथ है.फिर क्या पूछना पुलिस भी मिडिया के कंधे से कंधा मिलाकर पहले से तैयार सक्रिप्ट पर एक दिशा में जाँच में लग जाती है. दूसरी तरफ मिडिया उन लोगों की तरफ कभी ध्यान नहीं दिलाती जो नांनदेड,परभनी, कानपुर, गोवा आदि जगहों पर रंगे हाथ उस सय पकडे गए जब बम बनाते हुए उनके हाथ जले.

FAIZAN AHMAD AZAMGARH

Added: 2/16/10 12:57 PM GMT

अभी कुछ दिन पहले ही बीबीसी की साइट पर लेख पढ़ा था कि किस तरह से मीडिया बिकाउ हो गया है जब बीबीसी जैसी पत्रकारिता की संस्‍था इस बात को स्‍वीकार करती है तो बात के सच होने में कोई संदेह नहीं है और बिकी हुई किसी भी संस्‍था या व्‍यक्ति से निरपेक्ष होने की आशा रखना बेमानी है. आज वाकई में जो पत्रकार जिस स्‍तर पर है उसी हिसाब से बिका हुआ है. तो मीडिया सजग प्रहरी की भूमिका तो नहीं निभा रहा है. रही बाड़ के खेत खाने की बात तो खेत तो कब का खा लिया गया है अब बाड़ किसान को खा रही है.

समीर गोस्‍वामी छतरपुर, मध्‍यप्रदेश

Added: 2/16/10 12:54 PM GMT

किसी भी सिक्के के दो पहलू होते है. स्याह और सफेद की तरह से मीडिया की भूमिका को भी लिया जा सकता है. जहाँ तक सरकार की ओर से संचालित समाचार माध्यमों की भूमिका का सवाल है तो इन्हें निष्पक्ष नहीं कहा जा सकता है. इस कड़ी में कुछ हद तक टीवी चैनलों को भी रखा जा सकता है. लेकिन जहाँ तक बात ख़बरों की है तो इसे हम फ़िफ्टी-फ़िफ्टी की श्रेणी में रख सकते हैं. क्योंकि अख़बार भी अब पार्टी या किसी उद्योग समूह को ध्यान में रखकर समाचार छापते हैं.

SHIVA VIDYARTHI MANGARI VARANASI

Added: 2/16/10 12:20 PM GMT

नहीं, भारत के टीवी चैनल पूरे देश का प्रतिनिधित्व नही करते हैं. कोई भी विषय हो या क्षेत्र उससे संबंधित इनके बुद्धिजीवी या विशेषज्ञ दिल्ली या मुंबई में बैठे होते हैं. कोई भी चर्चा या बहस केवल इन्हीं लोगों से की जाती है. देश के बाकी हिस्सों में बैठे बुद्धिजीवी और विशेषज्ञ इनके लिए अछूत हैं. कुल मिलाकर बड़े शहरों में बैठे बुद्धिजीवी और विशेषज्ञ भारतीय मीडिया और देश पर हावी हैं. जहाँ तक निष्पक्षता की बात है तो हमें पक्षपातपूर्ण रवैया रोजाना देखने को मिलता है.

Krishna tarway Mumbai

Added: 2/16/10 10:14 AM GMT

राजनीतिक शास्त्र को संगठित किए बिना और राजनीतिक प्रेशर ग्रुप को अन्य सामाजिक संगठन से जोड़े बिना आप भारत की शासन प्रणाली में सुधार या किसी क्रांति की आशा कैसे कर सकते हैं.

udit narayan dwivedi banda

Added: 2/16/10 9:20 AM GMT

भारतीय टीवी न्यूज़ बिल्कुल भी निष्पक्ष नहीं है. इसका ताज़ा उदाहरण हाल ही में देखने को मिला है. माई नेम इज़ ख़ान के विवाद पर तो मीडिया ने शिव सेना को कटघरे में खड़ा कर बहुत बवेला मचाया, लेकिन पूणे की आतंकवादी घटना के लिए उसने महाराष्ट्र की कांग्रेस सरकार के साथ ऐसा कुछ नहीं किया.

Krishna tarway Mumbai

Added: 2/16/10 8:43 AM GMT

लोकतंत्र को मज़बूत करने में मीडिया ने भारत में अहम भूमिका निभाई है. इसने लोगों को ख़बर और टिप्पणी पर जानकारी दी है. लेकिन इन दिनों इसका स्तर गिरता जा रहा है. वह बाज़ार से प्रभावित होता जा रहा है.

surya prakash dwivediम allahabad

Added: 2/16/10 8:40 AM GMT

आज की भारतीय टीवी मीडिया कूड़ा परोस रही है. उसे इस बात का ख़्याल रखना चाहिए कि अब वह घरों के अंदर पहुंच चुकी है, उसे क्या दिखाना चाहिए और क्या नहीं इसकी उसे ज़रा भी परवाह नहीं है. एक समय था जब सभी घर वाले एक साथ बैठकर समाचार देखा करते थे. वैसा अब लोग कर नहीं पाते. इनकी ख़बरें राजनीति, फ़िल्म, हिंसा, अपराध तक ही सीमित है. और वह भी जो सबसे ज़्यादा सनसनी फैला सके, कला, साहित्य, शास्त्रीय संगीत, लोक संगीत आदि पूरी तरह से ग़ायब हैं.

Krishna tarway Mumbai

Added: 2/16/10 7:38 AM GMT

मीडिया लोकतंत्र के परहरी की भूमिका निभा तो रही है लेकिन इसकी प्रेरणा बाज़ारवाद और टीआरपी हैं. लोग क्या देखना चाहते हैं इससे सब तय होता है न कि क्या देखना चाहिए.

kamal joshi almora (uttarakhand)

Added: 2/16/10 7:21 AM GMT

भारत में पत्रकारिता अब देश-हित और जनता-हित में काम करने का नाम नहीं है. जनहित भावना ही यहां से ग़ायब है. यहां तो बस टी.आर.पी का खेल नज़र आता है और जिसके पीछे पैसा है. भारत में अब यही मीडिया है.

poonma ram barmer

Added: 2/16/10 7:14 AM GMT

भारत में मीडिया की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है. सामाजिक क्षेत्र में भी और शिक्षा के क्षेत्र में भी. लेकिन पैसे से ख़रीदी हुई ख़बर पूरे देश और समाज के लिए हानिकारक है.

dinesh sharma jaipur

Added: 2/16/10 7:10 AM GMT

मीडिया का सबसे बड़ा इनाम TRP बन गया है पत्रकारों की सब बड़ी सफलता आतंकवाद को इस्लाम से जोड़ कर पेश करने में है. पहले रुढ़ीवादी फिर फ़ंडामेंटलिस्ट उसके बाद इस्लामिक आतंकवादी अब जेहादी यानी घूम फिर कर इस्लाम की तरफ़ इशारा हो जाए. मीडिया का काम ये हो गया हे कि झूठ को इतना बोलो कि सच हो जाए. शायद लोगों को भी यही पसंद है तब ना टीआरपी का मामला आता है.

MUMTAZ HASAN SAHARSA

Added: 2/16/10 6:29 AM GMT

आज कल मीडिया के लोग अधिकतर बिके हुए होते हैं और पैसे लेकर ख़बरें दिखाते हैं. अगर उन्हें पैसे न दो तो वह ख़बर प्रकाशित ही नहीं करते हैं. किसी ख़बर को थोड़े दिन तक दिखाते हैं और फिर पैसे लेकर दिखाना बंद कर देते हैं. कुछ हद तक मीडिया लोगों को जागरुक बनाती है लेकिन पूरी ईमानदारी से नहीं. मीडिया कर्मियों से अनुरोध है कि वे देश की रक्षा के लिए लोगों को जागरुक करने की कोशिश करे.

ishwar tiwari bilaspur, chhattisgarh

Added: 2/16/10 4:26 AM GMT

भारत में रेडियो, टीवी और प्रिंट मीडिया द्वारा दिखाई गई ख़बरें सामान्य जन जीवन पर बहुत दूरगामी प्रभाव डालती हैं. सामान्यतः आम आदमी पत्रकार ,न्यूज़ चैनल और रेडियो तथा प्रिंट मीडिया को अपने समाज का आइना मानता हैं, किंतु हाल के कुछ सालों मैं 24 घंटे ख़बरों के जाल में फंसे अपने चैनल बहुत क्षेत्रों में छोटे साबित हो रहें हैं. न्यूज़ मीडिया एक मनोरंजन का साधन नहीं है बल्कि उनके लिए तो समाज के विकास की बात करना सबसे ज़रूरी हैं.

manoj kamat Pune Maharashtra भारत

Added: 2/16/10 4:06 AM GMT

निसंदेह भारत में मीडिया की भूमिका क़ाबिले तारीफ़ है, लेकिन कभी-कभी वह बहक जाती है. मुझे हिंदी मीडिया में बीबीसी ज़्यादा पसंद है. भारत में ख़ास तौर से हिंदी मीडिया को अपनी हदों में रहना ज़रूरी है. मीडिया को देश की सामाजिक समस्या को ज़्यादा महत्व देना चाहिए न कि राखी सावंत और शाहरुख़ ख़ान को.

Shakil Surve Mumbai - Maharashtra

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