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क़ैदियों के मानवाधिकार
जेल में बंद, सज़ा काट रहे एक पति-पत्नी ने अपने दाम्पत्य संबंध बहाल किए जाने की गुहार की है.
पति को मौत की सज़ा सुनाई गई है और आजीवन कारावास काट रही उसकी पत्नी का कहना है कि वह पति के फांसी पर लटकने से पहले गर्भवती होना चाहती है.
कुछ मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि क़ैदियों को उनके अधिकारों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए.
उनकी दलील है कि दाम्पत्य संबंधों का अधिकार जीवन के अधिकार का एक हिस्सा है.
तो दूसरी ओर ये आवाज़ें भी उठ रही हैं कि जघन्य अपराध के दोषी सामान्य जीवन गुज़ारने की बात सोच भी कैसे सकते हैं. कहा जा रहा है कि उन्हें दंड मिले तो पूरा मिले और वे इस तरह की फ़रमाइश के हक़दार नहीं हैं.
आप इस बारे में क्या सोचते हैं? क्या क़ैदियों के अधिकार होने चाहिए? क्या उन्हें शारीरिक संबंध बनाने की आज़ादी होनी चाहिए? क्या एक बच्चे की चाह उनकी अनाधिकार चेष्टा है?
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प्रकाशित:
4/2/10 11:43 AM GMT
टिप्पणियाँ
टिप्पणियों की संख्या:93
सभी टिप्पणियाँ जैसे जैसे वो आती रहती हैं
Added:
4/16/10 7:04 AM GMT
इंसानियत को ज़िंदा रखने के लिए इंसान का इंसान को समझना बेहद ज़रूरी है, जो खुद को इंसान मानते हैं, सुधार की कोशिश करते रहेंगे.
SANDESH KUMAR KALTA SHIMLA
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Added:
4/16/10 4:42 AM GMT
अगर कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति के मानवाधिकारों का पालन नहीं करता है तो उसपर मानवाधिकार का कानून लागू नहीं होता. अगर कानून उनपर कोई तरस खाता है तो इसका ये मतलब हुआ कि कत्ल करने की छूट हो जाएगी.
shailendra Bhardwaj delhi
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4/15/10 1:46 PM GMT
अगर देखा जाए तो क़ैद में आदमी को सज़ा क्या मिलती है? क़ैदी को अच्छा खाना, रहने का अच्छा हवादार स्थान जैसी चीज़ें हैं. क़ैदियों को बहुत हद तक प्राकृतिक सुविधाएं मिल रही है. अगर क़ैदियों को मानवाधिकार के नाम पर ऐसे अधिकार मिलते हैं तो कल ऐसा होगा कि सारा देश क़ैदखाने में रहना चाहेगा.
jkpatel London
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4/15/10 1:38 PM GMT
सर्वप्रथम तो हमें ये सोचना चाहिए कि सजा का मतलब होता है पूर्ण रुप से बंदिश और अनुशासित बनाना. यदि कोई किसी अपराध में सज़ा काट रहा है तो हमें यह ध्यान देना चाहिए कि उसके अपराध उसे आज़ादी के साथ जीने नहीं दे रहे हैं. ग़लती करने वाले को ग़लती का एहसास होना चाहिए. इसलिए सज़ा काट रहे कैदियों को दांपत्य जीवन का अधिकार नहीं मिलना चाहिए.
Hiren Desai London
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4/15/10 1:35 PM GMT
मानवाधिकार आयोग मानवों के लिए है न कि दानवों के लिए, लेकिन मैं देख रहा हूँ कि मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को मानवों से ज़्यादा दानवों के अधिकारों की चिंता है. जो जघन्य अपराधों में लिप्त पाए गए हैं वे सजा के पात्र हैं न कि मज़ा के. मेरी समझ से उनके अधिकारों की बात करने वाले लोग भी अपराधी हैं.
Kiran Shah Croydon
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Added:
4/15/10 1:33 PM GMT
मेरी राय में ऐसे पति-पत्नी को शारीरिक संबंध नहीं बनाने देना चाहिए क्योंकि इससे जो संतान पैदा होगी उसे समाज में बहुत से ताने सहने होंगे.हो सकता है कि वह अपने पिता का बदला लेना चाहे. इससे ख़ून-ख़राबा बढ़ सकता है.
Saj Khan London
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Added:
4/15/10 1:31 PM GMT
अरे भाई सभी सुख-सुविधा मिलने लगेगी तो जेल किस बात का? जो कर्म किया उसके हिसाब से जो मिलना था वह तो मिल चुका है.अपराधी को अगर कुछ मिलना चाहिए तो वह है 'दंड' और कुछ नहीं.
Karan Patel Mumbai
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Added:
4/15/10 6:01 AM GMT
मैंने सभी टिप्पणियों को पढ़ा है लेकिन मैं यह नहीं जानता हूँ कि उनका अपराध क्या है. भारत में 20 साल बाद उम्र कैद की सज़ा ख़त्म हो जाती है. उसके बाद उसकी पत्नी रिहा हो जाएगी और उसे जीने के लिए किसी नैतिक समर्थन की ज़रूरत होगी. इस लिए मेरी राय है कि उन्हें शारीरिक संबंध बनाने देना चाहिए जिससे वे अपनी बाकी की जिंदगी के लिए एक सहारा पा सके.
palwinder ventura
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Added:
4/15/10 5:24 AM GMT
यह माँग सही नही है. कम से कम बच्चे के बारे में सोचना चाहिए.
शयाम रांची
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Added:
4/15/10 2:24 AM GMT
यह सच है कि भारत में शुरू से ही मानवाधिकारी कार्यकर्ताओं पर सवाल उठते रहे हैं. क्योंकि उन्हें मासूमों से ज्यादा अपराधियों, आतंकवादियों के अधिकारों की ज्यादा चिंता रहती है. किस हिसाब से वे कैदियों के अधिकारों की बात कर रहे हैं? अगर आपको जेल में सारे अधिकार मिल रहे हैं तो फिर जेलें बनी ही किसलिए हैं. बेहतर है कि हमारे मानवाधिकारी कार्यकर्ता थोडा बहुत जेल के बाहर के लोगों के अधिकारों कि भी चिंता करें.
सुधीर सैनी पृथ्वीपुर
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Added:
4/15/10 1:31 AM GMT
पति को फांसी और पत्नी को उम्रक़ैद. दोनों बच्चा पैदा कर किसके सिर पर थोपेंगे या उसे भी अपनी तरह अपराधी बनाएँगे.
Usha Butta Oregon, USA
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Added:
4/14/10 11:42 PM GMT
अरे भाई सभी सुख-सुविधा मिलने लगेगी तो जेल किस बात का? जो कर्म किया उसके हिसाब से जो मिलना था वह तो मिल चुका है.अपराधी को अगर कुछ मिलना चाहिए तो वह है 'दंड' और कुछ नहीं.
उमेश यादव Houston Texas अमरीका
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Added:
4/14/10 4:42 PM GMT
जेल एक ऐसी जगह है जहाँ किसी को उसके किए की सज़ा मिलती है. जेल हमारी इच्छाओं को पूरा करने की जगह नहीं है. जेल हनीमून मनाने के लिए भी नहीं है. अगर जेल इन सबके लिए बन जाए तो हर कोई इसके लिए अपराध करने लगेगा. हो सकता है कि कल अपराधी यह कहने लगे कि उन्हें जेल का खाना पसंद नहीं आ रहा है इसलिए उन्हें किसी पांच सितारा होटल से खाना मंगाकर दिया जाए.
ajay TARRAGONA (SPAIN)
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4/14/10 3:57 PM GMT
दोनों कैदियों को मिलने देना चाहिए.यही इंसानियत का तकाजा है. चाहे उन्होंने ने जो भी अपराध किए हो लेकिन मेरी राय यह है कि हो सकता है कि उन दोनों से जो बच्चा हो वह एक अच्छा इंसान बने और वह भारत का नाम रोशन करे.
mazhar paighamberpur siwan
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Added:
4/14/10 2:22 PM GMT
दंपतियों को चाहिए कि वे खुद ही ऐसा न करें. क्योंकि उनकी संतान का तो समाज जीना हराम कर देगा.
गणपत विश्नोई रणोदर, साँचौर, (राज॰)
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