505 10 10 74 बीबीसी हिन्दी, सुनिए मोबाइल पर
इस बहस को सहेज कर रख लिया गया है – जवाब देने की अनुमति नहीं है

कैसा देखना चाहते हैं आप बीबीसी को?

बीबीसी हिंदी सेवा 11 मई को अपने 70 साल पूरे कर रही है. पहले हिंदु्स्तानी सेवा और फिर हिंदी सेवा के रूप में हम आप से जुड़े रहे हैं.

आज ज़रूरत है अपनी इस लंबी यात्रा पर मुड़ कर एक नज़र डालने की.

इन सात दशकों में दुनिया भर में भारी बदलाव हुए और बीबीसी हिंदी ने पूरी कोशिश की वक़्त के साथ क़दम से क़दम मिला कर चलने की.

हमारी इस यात्रा के हर पड़ाव पर हमारे श्रोताओं और वेबसाइट के पाठकों ने हमारा साथ दिया. हमारा हौसला बढ़ाया और अपने सुझाव और टिप्पणियों से हमारा मार्गदर्शन किया. हमने हमेशा कोशिश की आपको निष्पक्ष और खालिस ख़बरें देने की. कितना भाता है आपको हमारा ख़बरों का चयन?  कहाँ ज़रुरत है और बदलने की?
 
अब आपकी क्या हमसे क्या अपेक्षाएँ हैं? बदलते समय के साथ आप बीबीसी हिंदी को किस रूप में देखना चाहते हैं?

आपके सुझाव बीबीसी हिंदी का स्वरूप निखारने में हमेशा मददगार रहे हैं. आज इस सत्तरवीं वर्षगांठ पर हम आपसे जानना चाहते हैं कि क्या इस सफ़र में हम आपकी आकांक्षाओं पर खरे उतरे?

इस बार बीबीसी इंडिया बोल में चर्चा इसी विषय पर होगी.

अपने विचार हमें लिखिए बीबीसी हिंदी डॉट कॉम पर.

और अगर रेडियो पर होने वाली बहस में आप हिस्सा लेना चाहते हों तो मंगलवार, 11 मई को रात आठ बजे हमें मुफ़्त फ़ोन कीजिए 1800 11 7000 या 1800 102 7001 पर.

प्रकाशित: 5/8/10 4:54 AM GMT

टिप्पणियाँ

टिप्पणियों की संख्या:62

सभी टिप्पणियाँ जैसे जैसे वो आती रहती हैं

Added: 5/11/10 2:57 PM GMT

पीढ़ी दर पीढ़ी सुने जाने वाली बीबीसी हिंदी मैं १९७१ के युद्ध के समय से सुनना शुरू किया था .उस समय मेरे पिताजी और उनके मित्र सभी बीबीसी पर रोज़ाना ख़बरें सुना करते थे .तब हमें यह पता चला की बीबीसी सच्ची ख़बरें और ताज़ा ख़बरें प्रसारित करने के लिए मशहूर है . बीबीसी हिंदी पहले मैं रेडियो पर सुना करता था पर अब इन्टरनेट पर इसे पढता और सुनता हूँ .बीबीसी हिंदी की वेब साईट बहुत ही सुव्यवस्थित है जिससे किसी भी विषय को ढूँढने और पढने में आसानी होती है .bcc के सभी कार्यक्रम अच्छे है.

Krishna tarway Mumbai

Added: 5/11/10 2:27 PM GMT

सभी कार्यक्रमों को कम से कम एक हफ़्ते तक साइट पर सुनने की सुविधा हो. नियमित कार्यक्रमों के अतिरिक्त अन्य ऑडियो और वीडियो भी ज़्यादा लगें. विश्व की विभिन्न संस्कृतियों से संबंधित जानकार का एक पन्ना अलग से हो. वेबसाइट पर तस्वीरें ज़्यादा दिखाएँ.

Multan Singh Chandigarh

Added: 5/11/10 1:30 PM GMT

बीबीसी में बदलाव की मांग करना ऐसा ही है जैसे सूरज को दिया दिखाना. लेकिन मैं हर शहर और हर नगर में बीबीसी चाहता हूँ. मैं बहुत छोटा सा था जब मैंने अपने पिताजी के साथ बीबीसी सुनना शुरू किया. मेरे पिता बीबीसी को बहुत पसंद करते हैं.

alimullah salfi aligarh

Added: 5/11/10 1:14 PM GMT

मैं 1991 से बीबीसी हिंदी का श्रोता हूं.बीबीसी मेरे सामान्य ज्ञान का प्रमुख स्रोत रहा है.मैं बीबीसी के पुराने कार्यक्रम जैसे हमसे पूछिए,परिक्रमा,आपकी बात बीबीसी के साथ बगैरहा को काफ़ी 'मिस' करता हूं. मैं बीबीसी को सत्तर वर्ष पूरे करने के लिए शुभकामनाएं देता हू.

gopal prasad gupta Ambikapur (C.G.)

Added: 5/11/10 12:09 PM GMT

रेहमत - सुझाव-3

गरीब किसानों को सब्सिडी देने में अर्थव्यवस्था की दुहाई दी जाती है लेकिन यह कभी नहीं बताया जाता कि उद्योपतियों को कितनी सब्सिडी/छूट दी जाती है।

इसे बीबीसी इण्डिया बोल के साथ भी जोड़ा जा सकता है। इस कार्यक्रम में श्रोताओं की राय के अलावा तथ्यों पर भी प्रकाश डाला जाना चाहिए। कार्यक्रम के अंत में 5-7 मिनिट में बहस के विषय से संबंधित तथ्यों पर प्रकाश डाला जा सकता है।

Rehmat Badwani (MP)

Added: 5/11/10 12:05 PM GMT

रेहमत - सुझाव-2
विकास परियोजनाओं के संदर्भ में देखें तो पुनर्वास और पर्यावरणीय शर्तों के पालन के बारे में प्रभावित समुदायों और सरकार के मत हमेशा अलग-अलग होते हैं। बिजली कटौती का सबसे बड़ा कारण गरीबों द्वारा की जाने वाली बिजली चोरी का दिया जाता है लेकिन उद्योगों/रईसों की चोरी का कोई जिक्र नहीं होता। बैंकों की बदहाली के लिए गरीब किसानों द्वारा कर्ज न चुकाने की प्रवृत्ति को दोष दिया जाता है लेकिन उद्योगपतियों द्वारा डुबाए गए धन (एनपीए) का कोई हिसाब नहीं लगाया जाता।

Rehmat Badwani (MP)

Added: 5/11/10 12:01 PM GMT

रेहमत - सुझाव-1
बीबीसी के उम्दा समाचार विश्लेलषणों से श्रोताओं/पाठकों को कई मामलों में स्पष्‍टता हो जाती है। लेकिन बीबीसी को ऐसा कोई कार्यक्रम शुरु करने के बारे में विचार करना चाहिए जिसमें आरोप-प्रत्याकरोप के परे ताजा विवादित/चर्चित मुद्दों का सही पक्ष स्पष्ट‍ता से सामने आ सके। उदाहरण के लिए पिछले दिनों भारत-अमेरिकी आण्विक संधि के समय हाईड एक्‍ट को लेकर आम जनता में असमंजस था। सरकार और विपक्षी पार्टियों के दावे अलग अलग थे।

Rehmat Badwani (MP)

Added: 5/11/10 10:59 AM GMT

बचपन से अब तक बीबीसी सुनता रहा हूँ. इसका जो असर हुआ उसके चलते मैंने पत्रकार बनने की ठान ली. पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद रिपोर्टर बना. अब मैं बीबीसी को कैसा देखना चाहता हूँ यह बाद की बात है पहले मैं ख़ुद को बीबीसी में देखना चाहता हूँ.

rahul mishra etah (uttar pradesh)

Added: 5/11/10 8:07 AM GMT

बीबीसी को नियमत सुनने वाले अधिकतर गांव के ग़रीब परिवार के लोग हैं, इसलिए कम से कम पांच मिनट ही सही यूपीएससी और दूसरी तैयारियों करने प्रतियोगी छात्रों का ध्यान रखकर कार्यक्रम पेश करने का कष्ट करें.

नीता कुमारी, बेहट, झंनझारपुर, मधुबनी, बिहार, भारत

Added: 5/11/10 7:09 AM GMT

बीबीसी ने 70 साल में कई छात्रों का करियर संवारा है. मैं बीस साल से बीबीसी को सुन रहा हूँ. जल्द से जल्द करियर क्या करूँ कार्यक्रम को दोबारा चालू करें. ये भी बताएँ की आजकल अचला शर्मा कहाँ है.

RAJ KUMAR BARAHAT BANKA

Added: 5/11/10 6:43 AM GMT

बीबीसी में राष्ट्रीय, अंतराष्ट्रीय खबरों के अलावा प्रदेश की कुछ ख़बरें भी होनी चाहिए. जिस क्षेत्र के श्रोताओं की संख्या ज्यादा हो वहां की ख़बरें तो रहनी चाहिए ही. साथ ही अन्य राज्यों की ख़बरें भी हो तो बेहतर होगा. खबरों के अलावा नवाचार की बातें भी कार्यक्रमों में शामिल होनी चाहिए. इसके अलावा साल में एक बार विभिन्न क्षेत्रों में श्रोता सभाओं का आयोजन होने से श्रोताओं का दोस्ती और तारतम्यता बनी रहती है.
- तेजपाल सिंह हंसपाल, रायपुर (छत्तीसगढ़)

तेजपाल सिंह हंसपाल रायपुर (छत्तीसगढ़)

Added: 5/11/10 3:02 AM GMT

बीबीसी को कैसा होना चाहिए यह कहना कठिन है. लेकिन यहाँ लोगों की प्यास बनी हुई है.

naval joshi uttrakhand

Added: 5/11/10 2:28 AM GMT

मैं अरसे से कहता आ रहा हूँ कि एक दो मिनट का झरोखा आना चाहिए जिसमें कम महत्वपूर्ण देश-विदेश की खबरें होनी चाहिए. मसलन ऐसा नहीं है कि दक्षिण और पूर्वी भारत में कुछ नहीं हो रहा है. या मध्य-एशिया, पूर्वी योरोप, ईरान, अफ़्रीका या दक्षिण अमेरिका में कुछ नहीं हो रहा है पर हम अगर सिर्फ बीबीसी को सुनें तो हमें इसके बार में पता नहीं चल पाता है. निस्संदेह इसमें किसी विस्तृत रिपोर्ट की आवश्यकता नहीं पर अगर जिक्र-मात्र हो जाए तो संपूर्ण लगेगी बीबीसी. बधाई हो आपकी सत्तरवीं सालगिरह पर.

अमित प्रभाकर बंगलूर

Added: 5/11/10 12:56 AM GMT

बीबीसी को 70 साल पूरे करने पर शुभकामनाएँ. मुझे आपके पहले पन्ने पर भारत-पाकिस्तान की कूटनीतिक संबंधों की चर्चा बहुत अच्छी लगती है. और फ़ोरम पर हम को अपनी बात रखने का मौक़ा मिलता है. एक बिज़नेस का सेंसेक्स है जो देर से अपडेट होता है उसको थोड़ा फ़ास्ट करने की आवश्यकता है. वैसे न्यूज़ वेबसाइट में बीबीसी बेस्ट है और ग्रेटेस्ट है.

mehul joshi bilimora भारत

Added: 5/10/10 8:07 PM GMT

सत्तर साल की यात्रा पूरी करने पर बीबीसी टीम को शुभकामनाएँ. मेरा यही आग्रह है कि शॉर्टवेव और मीडियमवेव की क्वालिटी सुधारें.

Mahendra Kumar Meena, IIT Madras, Chennai

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