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मुंबई को सुरक्षित रखना क्यों मुश्किल?
भारत की व्यावसायिक राजधानी मुंबई पर एक बार फिर चरमपंथी हमला हुआ है. 31 महीने पहले 26/11 के चरमपंथी हमलों की याद लोगों के ज़हन में अब भी ताज़ा है और ये भी कि सरकार ने उन हमलों के बाद सुरक्षा व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त करने का आश्वासन दिया था.
सरकारें हर चरमपंथी हमलों के बाद इसी तरह के आश्वासन देती हैं और फिर हमले होते हैं. हमने देखा कि न्यूयॉर्क में वर्ष 2001 में 9/11 का हमला हुआ उसके बाद वहाँ सुरक्षा इतनी चुस्त दुरुस्त कर दी गई कि हर बार चरमपंथी हमले को नाकाम कर दिया गया.
लंदन में 2005 में हुए चरमपंथी हमलों के बाद से वहाँ भी चरमपंथी सुरक्षा व्यवस्था को भेद नहीं पाए हैं. आंकड़े बताते हैं कि पिछले 20 बरसों में मुंबई में 13 हमले हो चुके हैं. क्यों हम अपनी व्यावसायिक राजधानी को सुरक्षित नहीं रख पाते?
मुंबई कभी अंडरवर्ल्ड के साए में रहती है तो कभी चरमपंथी हमलों के डर से कांपती रहती है. क्या मुंबई में सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करना सचमुच कठिन है या फिर ये राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी है?
आख़िर कब तक हम 'अब मारा तो मारा अब मार के देख' करते रहेंगे?
चरमपंथ से निपटने के लिए क्या करे सरकार? इस पर भेजिए अपनी राय.
प्रकाशित:
7/14/11 8:47 AM GMT
टिप्पणियाँ
टिप्पणियों की संख्या:140
सभी टिप्पणियाँ जैसे जैसे वो आती रहती हैं
Added:
7/22/11 9:05 PM GMT
सरकार को कड़ी कार्रवाई करनी होगी. दोषियों को सज़ा मिलनी चाहिए.
brijesh kotaha mirzapur
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Added:
7/20/11 9:58 AM GMT
मुंबई पर फिर से आतंकी हमला होना हमारी सुरक्षा व्यवस्था की न केवल नाका़मयाबी को दर्शाता है बल्कि इसमें दृढ राजनीतिक इच्छा शक्ति की कमी भी नजर आती है .यहीं कारण है कि मुंबई आज आतंकियों के लिए पसंदीदा चारागाह बना हुआ है. इस तरह की वारदात दुबारा न हो इसके लिए हमारे नुमएंदों को अमेरिका व ब्रिटेन से सीख लेनी चाहिए तभी हमारा वतन सुरक्षित रह सकता है.
BINDESHWAR PANDEY BHU
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Added:
7/20/11 6:46 AM GMT
पाठक गणों की टिपण्णी पढ़ के साफ़ हो जाता है कि भारतीय सरकार मूल रूप से कुसूरवार है. भ्रष्टाचार के खिलाफ़ जो भी बोलेगा उसको रातों रात कूट दिया जाएगा.
PUSHPAK MUMBAI
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Added:
7/19/11 2:30 PM GMT
एक राजनीतिक इच्छा शक्ति की कमी है बस.
prakash singh soun pithoragarh
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Added:
7/19/11 1:50 PM GMT
मुझे लगता है कि अगर ये सब ख़त्म हो गया तो हमारे नेता राजनीति किस मुद्दे पर करेंगे.
KISHAN YADAV indore
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Added:
7/19/11 1:45 PM GMT
शक्ति कमज़ोर हो पर अगर इच्छा हो तो लगातार प्रयास करने से मुश्किल मुकाम पर फतह किया जा सकता है.
himmat singh bhati jodhpur
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Added:
7/19/11 6:57 AM GMT
एक राजनीतिक इच्छा शक्ति की कमी है बस.
chhotelal shamra gorakhpur
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Added:
7/19/11 1:11 AM GMT
सबसे पहले हमारे देश की अर्थव्यवस्था ही कमज़ोर कड़ी है. हमारे यहाँ राजनीती काफी ज़्यादा है जिसके चलते देश को हर समय काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.
jay shakya Indore
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Added:
7/18/11 11:53 AM GMT
बी.बी.सी पर इस विषय पर इंडिया बोल सुना,एक बात समझ नंही आई कि मीडिया आम नागरिक को ये बताने से कयों गुरेज करता है कि आम नागरिक भी उतना ही जिम्मेदार है जितना सरकार या सरकारी तंत्र, अगर आम नागरिक को मीडिया जागरूक नंही बनायेगा तो उसे जागरूक कौन बनायेगा,मीडिया आम नागरिक को सरकार से अलग करके देखता है,जिस कारण आम जन अपनी जिममेदारी को टाल देता है,आम जन जब द्रडसंकलप करता है तभी पंजाब से आतंकवाद समापत होता है.
kranti joshi Almora भारत
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Added:
7/18/11 8:48 AM GMT
हमारे देश में आतंकवाद रोकने का एक ही आसान तरिका है- पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल सभी की सीमाओं को सील किया जाए और अवैधतौर पर रह रहे लोगों की शक्ति से तलाश की जानी चाहिए.एक साल में सब ठीक हो जाएगा.
sahina kota.rajasthan
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Added:
7/17/11 5:58 PM GMT
क़ानून का कमज़ोर होना और घूसखोरी, नेताओं की वोटबैंक की राजनीति बढ़ाने का कारण है.
KULDEEP BHARDWAJ AZAMGRAH,UP भारत
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Added:
7/17/11 3:41 PM GMT
हमें अपने देश के आर्थिक केंद्रबिंदु को हर तरफ से संभाल कर रखना चाहिए.ये हमारी मर्यादा का सवाल है.हमें होशियार रहना चाहिए.
diwan singh east delhi
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Added:
7/17/11 12:12 PM GMT
जब तक भारत आतंकवादियों को पकड़कर कबाब खिलाते रहेंगे,भारत के राष्ट्रपति के पास फांसी की सज़ा को कम करने का अधिकार रहेगा और देश में कांग्रेस या भाजपा पार्टी का शासन रहेगा तब तक देश में आतंकवादी हमले होते रहेंगे.
shiv Ranchi
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Added:
7/17/11 11:04 AM GMT
अब समय आ गया है कि राजनेताओं को आमनागरिकों को भी उनके जितनी ही सुरक्षा देनी चाहिए.
Raj Toronto
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Added:
7/17/11 7:28 AM GMT
पाकिस्तान की सरकार से बार-बार बात करने का क्या मतलब है जबकि सरकार जानती है कि वहां की फौज उनकी सुनती नहीं.
burhanuddin. kota.rajasthan
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