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क्या टीम अन्ना बिखर रही है?

टीम अन्ना की अहम सदस्य किरण बेदी के उपर हवाई बिल के हेराफेरी के आरोप लग रहे हैं. इससे पहले हिसार उपचुनाव में दूसरे सदस्य अरविंद केजरीवाल ने जम कर कांग्रेस विरोधी प्रचार किया जिसने अन्ना हज़ारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन को समर्थन देने वाले कई लोगों को असंतुष्ट किया.

इसके बाद दो सदस्यों ने अन्ना हज़ारे को तानाशाह बताकर आंदोलन से ख़ुद को अलग कर लिया. स्वामी अग्निवेश के पहले ही अन्ना और उनके साथियों के साथ मतभेद जगजाहिर हो चुके हैं. अन्ना की कोर कमेटी के सभी सदस्य एक-एक कर के किसी ना किसी विवाद में फंसते चले जा रहे हैं.

क्या टीम अन्ना बिखर रही है? क्या उनके आंदोलन का लक्ष्य केवल भ्रष्ट्राचार के ख़िलाफ़ आंदोलन तक ही सीमित होना चाहिए था? आप क्या सोचते हैं? अपनी राय हमें लिखकर भेजें.

प्रकाशित: 10/25/11 11:21 AM GMT

टिप्पणियाँ

टिप्पणियों की संख्या:38

सभी टिप्पणियाँ जैसे जैसे वो आती रहती हैं

Added: 10/28/11 1:03 PM GMT

टीम अन्ना के सदस्य भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ जो मुहिम चला रहे हैं वो उचित है. लेकिन किसी राजनीतिक पार्टी को चुनाव में वोट नहीं देने के लिए कहना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है क्योंकि वह पार्टी भी भ्रष्टाचार से लड़ रही है. जो दोष हर आदमी और हर तंत्र में है, उसे जादू की छड़ी से एक क्षण में नहीं किया जा सकता.

RAMANAND DAS ayodhya

Added: 10/28/11 11:56 AM GMT

पूर्वाग्रह से भरे इस देश का भगवान ही मालिक है. टिप्पणी पढ़ कर ये पूर्वाग्रह देखा जा सकता है. कोई कांग्रेस को लेकर पूर्वाग्रह में है, तो कोई अन्ना को लेकर. क्या पता, लोग कल ये तर्क लेकर आ जाएं कि भ्रष्टाचार भी सही है.

harsh kumar kolkata

Added: 10/28/11 11:51 AM GMT

सरकार ने साबित कर दिया है कि भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाना अपराध है. जो भी ऐसा कर रहा है, सरकार उसे दबाने की कोशिश कर रही है. मुझे लगता है कि अन्ना का ये कहना सही है कि अगर लोकपाल बिल लागू हो गया तो 75 फ़ीसदी नेता जेल में होंगे.

Rajesh Sharma Copenhagen, Denmark

Added: 10/28/11 11:29 AM GMT

एक बार जब भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ अन्ना की टीम ने आवाज़ उठाई तो पूरा देश अन्ना के साथ था. और आज जब अन्ना की टीम मुश्किल में है तो पूरे देश को उसका साथ देना चाहिए. अन्ना की लड़ाई किसी राजनीतिक पार्टी के साथ नहीं है. अन्ना की लड़ाई झूठ और भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ है.

rekha kumari bihiya

Added: 10/28/11 10:37 AM GMT

अन्ना टीम को राजनीति में प्रवेश नहीं करना चाहिए और अपने अभियान को अलग ही रखना चाहिए.यही टीम अन्ना और देश की जनता के हित में होगा.अगर वे राजनीति में जाते है तो ये जनता के लिए ठीक नहीं होगा.जनता को भ्रष्टाचार से राहत चाहिए ना कि राजनेताओं से.

AMAR IQBAL SINGH VIRK MISSISSAUGA (ON) CANADA

Added: 10/28/11 8:08 AM GMT

टीम अन्ना बिखर नहीं रही है बल्कि केंद्र सरकार घबरा गई है और वो फूट डालो और राज करो की नीति अपनाकर टीम अन्ना में फूट डालने की कोशिश कर रही है. इसमें वो काफ़ी हद तक सफल भी हो रही है. ज़रूरत है टीम अन्ना के सदस्यों को आत्मसंयम रखने की. जिससे कि टीम नेताओं के दबाव में न आए. आख़िर देश की 120 करोड़ लोगों की नजरें टीम अन्ना पर लगी हैं.

ashish yadav hyderabad

Added: 10/28/11 6:06 AM GMT

पूर्ण सच्चाई की बात करना बेईमानी है, कुछ अच्छा करने और जनमानस का भला करने के लिए एक-दो ग़लत क़दम भी लेने पड़े तो उसमें कोई बुराई नहीं है.

naveen maurya allahabad

Added: 10/28/11 2:23 AM GMT

अन्ना दल को भ्रष्टाचार से ज्यादा कांग्रेस के ही पीछे पड़ना चाहिए. कौन नहीं जानता की कांग्रेस ही भ्रष्टाचार की गंगोत्री है. आधे दर्ज़न से ज्यादा केन्द्रीय मंत्रियों  की घोषित आय पिछले सालों में गगनचुम्बी हो गयी है. सांसदों की निधि में भयंकर घोटाले हो रहे हैं और उनकी घोषित सम्पति भी गुणात्मक अनुपात में बढ़ रही है. अन्ना हजारे भ्रष्टाचार मिटाना चाहते हैं तो उन्हें अगले सभी चुनावों में कांग्रेस को हिसार जैसा सबक सिखाना होगा.

डा ० उत्सव कुमार चतुर्वेदी क्लीवलैंड, अमेरिका

Added: 10/28/11 1:12 AM GMT

अन्ना को भ्रष्टाचार, चुनाव सुधार, न्यायिक सुधार के एजेंडा को 'कांग्रेस विरोधी-भाजपा विरोधी' अभियान से लेकर तीसरे मोर्चे की वैकल्पिक सरकार तक चलाते रहना चाहिए, इस रास्ते में ज़ाहिर है अन्ना को कॉरपोरेट जगत का साथ देने वाले मीडिया और सत्तारूढ़ माफ़िया के विरोध का सामना करना होगा.

AKHILESH CHANDRA PRABHAKAR Bhagalpur

Added: 10/27/11 10:27 PM GMT

भ्रष्टाचार जलनिकासी के तंत्र में फँसे हुए मलबे की तरह है जब ये होता है तो पूरा मोहल्ला इसकी शिकायत करता है, फिर पीडब्ल्यूडी की टीम आती है और गटर में जाकर उसकी सफ़ाई करती है. इसके बाद हर कोई इस काम की सराहना करता है. कोई ये नहीं पूछता कि उस दल के लोग समलैंगिक थे, जुआरी थे या कोई अपराधी. अन्ना की टीम भी वही सफ़ाई कर रही है तो फिर ये मीन मेख क्यों. उन्हें उनका काम करने दीजिए और पूरे समाज को ये याद रखते हुए उनका साथ देना चाहिए कि फिर शायद अगली ऐसी टीम कई दशकों तक न आए. टीम अन्ना का साथ तहे दिल से दीजिए.

RAJESH BHARGAVA markham

Added: 10/27/11 10:10 PM GMT

टीम अन्ना दिशाहीन रास्ते पर चल रही है । केजरीवाल के कांग्रेस विरोधी प्रचार से भारतीय मतदाता असंतुष्ट हुआ है । जिस मतदाता ने 1947 से अब तक ज्यादा बार कांग्रेस को ही चुन कर सत्ता में भेजा है । अन्ना कांग्रेसीयों व भ्रष्टाचारीयों की बुराई करते हैं और हजारों मुसलमानों के हत्यारे मोदी की तारीफ करते हैं । टीम अन्ना को भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन तक ही सीमित रहना था लेकिन ये लौग तो राजनिति कर रहे हैं, इसलिए टीम अन्ना बिखर रही है । यूं लगता है इनके पीछे संघ और भाजपा का हाथ है ।

यूसुफ अली अजीमुदीन खाँ, भीँचरी रियाद, सऊदी अरब

Added: 10/27/11 7:54 PM GMT

कांग्रेस एक ऐसी पार्टी है जो नहीं चाहती कि भ्रष्टाचार ख़त्म हो मगर अन्ना की टीम ये सब करना चाहती है. अगर लोकपाल बिल आ जाएगा तो भविष्य में पैसे कहाँ से मिलेंगे, इसी डर से टीम अन्ना को टारगेट किया जा रहा है. एकतरफ़ दिग्विजय सिंह अन्ना से आंदोलन का हिसाब माँगते हैं और लोगों के स्विस बैंक में कितने पैसे हैं इसका हिसाब कोई नहीं देता है. मेरी मीडिया से यही गुज़ारिश है कि सच का और देश का साथ दें.

Ravi Bhalerao

Added: 10/27/11 3:31 PM GMT

टीम अन्ना में अन्ना को छोड़कर किसी ने कष्ट नहीं झेला. बिखराव की असली वजह यही है..इसलिए रामलीला मैदान की उपलब्धि को सहेज कर रख नहीं पा रहे हैं.किरण बेदी पूरी नौकरी सुख में रहीं.प्रशात जी ने कष्ट नहीं देखा...आजाद भारत में जे.पी.आन्दोलन के सेनानियों ने आपातकाल में १९ महीने तक चाँद नहीं देखा था कष्ट इसे कहते हैं .आपको किसी चीज की कमी नहीं है पर आप किसी से भाडा लेकर उसके समारोह में जाएँ यह अच्छा नहीं है

Pramod kumar muzaffarpur

Added: 10/27/11 3:22 PM GMT

मेरे विचार से टीम अन्ना को सिर्फ़ कोर मुद्दे पर ध्यान देना चाहिए जो कि भ्रष्टाचार का है. किसी और चीज़ पर ध्यान नहीं देना चाहिए, मगर यहाँ तो हम सब भ्रष्ट हैं इसलिए बदलाव निजी तौर पर सबमें होना चाहिए.

Ashwani London

Added: 10/27/11 12:19 PM GMT

अन्ना दो नावों पर सवार होकर सवारी कर रहे हैं. यूपीए में मनमोहन सिंह साफ़ सुथरे इंसान हैं पर उनको लोग भ्रष्ट कर रहे हैं, उसी तरह अन्ना ईमानदार हैं मगर उनकी टीम के कुछ लोग सही नहीं हैं. मेरा मानना है कि सिर्फ़ कांग्रेस को ही ज़िम्मेदार ठहराना ग़लत है. कई और पार्टियाँ हैं जो पर्दे के पीछे विरोध करती हैं और सामने कुछ और नाटक करती हैं. यूपीए में भी बिल को लेकर मतभेद हैं. कांग्रेस सरकार के साथ है और कई और पार्टियाँ मिलकर सत्ता चला रही हैं. कांग्रेस का विरोध कर अन्ना की राजनीति उजागर हो गई है.

raza husain lucknow

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