इस बहस को सहेज कर रख लिया गया है – जवाब देने की अनुमति नहीं है
सेना विशेषाधिकार क़ानून क्यों हटे?
जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पिछले दिनों राज्य के कुछ हिस्सों से सेना विशेषाधिकार क़ानून को ख़त्म करने की बात कही थी. पर ख़बरें हैं कि भारतीय सेना इसके लिए तैयार नहीं है. इस बीच इस क़ानून को हटाने की माँग को लेकर कश्मीर से मणिपुर तक की विरोध यात्रा की जा रही है. मणिपुर की ईरोम शर्मिला इसी क़ानून के ख़िलाफ़ एक दशक से अनशन कर रही हैं.
आख़िर सेना और सुरक्षा बलों को असीमित अधिकार देने वाले इस क़ानून की ज़रूरत क्या है?
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तो इंतज़ार किस बात का?
प्रकाशित:
10/28/11 11:26 AM GMT
टिप्पणियाँ
टिप्पणियों की संख्या:39
सभी टिप्पणियाँ जैसे जैसे वो आती रहती हैं
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11/5/11 5:05 PM GMT
विशेषाधिकार कानून हटाये जाने का मुद्दा एक जटिल विषय है और इसका समाधान भी बहुत साधारण नहीं है.मणिपुर की ईरोम शर्मिला इसी क़ानून के ख़िलाफ़ एक दशक से अनशन कर रही हैं. इसमें सुधार करना चाहिए. जो क़ानून आप लागू कर रहें है उसके चलते अगर सरकार और लोगों में दूरी बन जाती है तो ये किसी मुद्दे के राजनीतिक समाधान ढूंढने में बाधक होती है पर.कश्मीर में राज्य सरकार शांति की स्थापना की कोशिश में लगी है और सेना उसी उद्देश्य में सरकार की मदद कर रही है
राजू साहू राजनांदगांव छ ग
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11/5/11 12:57 PM GMT
यदि सब कुछ सामान्य हो तो निश्चित ही सेना को कोई विशेष अधिकार नही दिये जाने चाहिये.पर जम्मू कश्मीर में हालात लगातार असामान्य बने हुये हैं और इससे सेना को ही निपटना है. अतः सेना के पास विशेषाधिकार होने सही है.मणिपुर की ईरोम शर्मिला का अनशन उसी कड़ी का एक हिस्सा है जिसमें हमारे देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दुरुपयोग होता रहता है फिर वह चाहे शांतिभूषण का बयान हो या अरुंधति राय का बयान.
vivek ranjan shrivastava jabalpur भारत
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11/2/11 10:22 AM GMT
जितनी ज़्यादा गंभीर बीमारी होती है, उतनी ही कड़वी उसकी दवा होती है. कश्मीर में हालात बहुत गंभीर हैं जिनसे देश की संप्रभुता खतरे में है. इसलिए उन हालातों को सुधारने के लिए कड़े कदमों की ज़रूरत है. जब कश्मीर में विशेष परिस्थितियों के मद्देनज़र उसे विशेष दर्जा दिया गया है, तो फिर वहां सेना को विशेषाधिकार देने का विरोध क्यों हो रहा है?
Navinchandra Dave Surat-Gujarat
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11/1/11 8:20 AM GMT
It is not important to remove army from j&k but necessary is that govt. must remove the hurdles and problems which cause of army.We cant neglect the importance of army in j&k because its a political hot spot, we have to look on its physical location (buffer state). We are resting here because our boarder is secure. First of all we have to remove social problems in these areas and constraint on development. AFTER that we have a solid reason to remove special arms act,But something should be done
manoj chirdiya jaipur
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11/1/11 12:18 AM GMT
सीमन्त प्रान्तों में सेना के मानव-विकास के संदर्भ में तर्कपूर्ण विशेषाधिकार जरूरी हैं. इन प्रान्तों में मानव विकास के विविध विषय़ों पर आबंटित विशेष बजट एवं गतिविधियों का वहाँ के वाशिन्दों को अपने निरन्तर बीतने वाले जीवन को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाने में ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करने पर ध्यान देना चाहिये. हमेशा हंगामों के हालात पैदा करने और नाटक दिखाने वाले प्रोड्यूसर,फायनेन्सर,डायरेक्टर,एक्टर और इनकी टीम का रिएक्टर ही नहीं बने रहना चाहिये.
जतीश कोटा
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10/31/11 6:56 PM GMT
mere khayal se to sena ko or bada dena chahaiye. kam karne or bapas bulaane ka to sabaal hi paida nahin hot. sena ha to roj bamb phat te han. sena nahin hogi to kiya haal hoga.aam janta ke bare main socho uski raksha to sena hi kar rahi ha. police ka hona ya na hona ek barabar ha. aam janta ke liye sena ki sankhya or bada di jay. dhanybaad. jai hind.
ashok kumar manhas lisboa
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10/31/11 5:42 PM GMT
kasmir na hi bharat ka he na hi pakistan ka. kasmir khud ka 1 desh he jo bharat our pakistan ni luta huwaha he . kasmiri ko kasmir dena chahiyae yeske liye kasmiri log jo kuch vi karenge 100% sahi he
suresh bhattarai qatar
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10/31/11 2:16 PM GMT
आखिर कब तक सेना को जम्मू और कश्मीर में रहना होगा. सेना भेजने का एक प्रयोजन होता है और यह समयबद्ध होता है. एक समयसीमा के अन्दर सेना का अपने काम पूरा कर अपने बैरक में लौट जाना ही उचित है. कश्मीर की समस्या राजनैतिक ज्यादा है और भारतीय शासकों की अल्पबुधि के कारण सेना को बदनाम होना पड़ रहा है. एक सभ्य समाज को नियंत्रित करने के लिए सेना को दिया गया समय(1989-2011) - एक बहुत ही लम्बा कालक्रम है. यह ना केवल जम्मू और कश्मीर में बल्कि उत्तरपूर्वी राज्यों पर भी सही है.
Samir delhi
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10/31/11 12:00 PM GMT
हालात को देखते हुए कश्मीर से सेना को हटाना ग़लत होगा. कश्मीर मुद्दे को सयुंक्त राष्ट्र में ले जाने की ग़लती जवाहर लाल नेहरू ने की थी. आज अगर सेना या सेना विशेषाधिकार क़ानून हटा लिया गया तो कश्मीर फिर से 1999 के दशक वाले दौर में चला जाएगा और फिर हालात संभाले नहीं संभलेंगे.
kundan sinha hazaribag
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10/31/11 7:58 AM GMT
भारतीय सेना को कश्मीर में प्राप्त विशेषाधिकार क़ानून इसलिए हटा लिया जाना चाहिए क्योंकि कश्मीर के राजनीतिज्ञ एवं अलगाववादी अपने तुच्छ स्वार्थों के लिए ये मांग कर रहे हैं, यदि ऐसा किया गया तो बड़ी भूल होगी. बीबीसी जैसे समूह को भारत प्रशासित कश्मीर एवं पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की तुलनात्मक दृष्टि से राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक दृष्टि से तुलना कर दुनिया को पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की बुरी हालत के बारे में बताना चाहिए ना कि विशेषाधिकार कानून को लेकर इसको अंतर्राष्टीय मंच पर हमेशा विवादित मुद्दा बताया जाए.
jaiprakash jangir new delhi
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10/31/11 4:34 AM GMT
कोई भी उन सैनिकों के बारे में नहीं सोचता जिन्होंने कश्मीर में अपनी जान गंवा दी.कितने ही कश्मीरी पंडितों और सिखों को कश्मीर से बेघर किया गया.
parveen brisbane
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10/30/11 4:58 PM GMT
जम्मू-कश्मीर में जारी अशांति और बिगड़ी हुई क़ानून व्यवस्था को देखते हुए वहां से सेना या सेना विशेषाधिकार क़ानून हटाना समझदारी की बात नहीं होगी.
R.C. PURI Surrey, BC. Canada
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10/30/11 4:14 PM GMT
मेरा मानना है कि किसी भी राज्य में स्थिति सुधारने के लिए ऐसे किसी क़ानून को लागू करना ठीक नहीं है जिसके ख़िलाफ़ वहां की जनता हो. और ख़ासकर अगर वो क़ानून बहुत लंबे समय से लागू हो, तो ये ग़लत है. मणिपुर और कुछ और पूर्वी राज्य सेना विशेषाधिकार क़ानून को हटाने की लंबे समय से मांग कर रहे हैं, इसलिए मुझे ये क़ानून नहीं हटाने की कोई वजह नहीं दिखती.
md aftab ahmad trivandrum
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10/30/11 12:46 PM GMT
अगर कश्मीर सभी कश्मिरियों का है तो वहां से कश्मीरी पंडितों को भागना पड़ा है? वहां के लोग विशेष दर्जे के रूप में मिल रही सहायता को बंद करने लिए क्यों नहीं कहते? यहां और उद्योग लगाने की बात क्यों नहीं होती? क्या वहां से चुने हुए लोग भारत की संसद में नहीं हैं?
himmat singh bhati jodhpur
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10/30/11 10:07 AM GMT
कश्मीर के नाम पर राजनीति आम बात है. आज तक किसी भी सत्ताधारी दल ने ना तो भारत के बारे में सोचा और ना ही कश्मीरियों के बारे में. वहां की जनता तो सिर्फ़ कमाई का साधन है और केंद्र सरकार अपने हित के लिए देश का नुक्सान कर रही है. जहां तक सेना का सवाल है, उसका उद्देश्य देश की अखंडता और संप्रभुता को चुनौती देने वालों को करारा जवाब देना है. और वो ये कार्य बेहतर ढंग से निभाते हैं पर सेना से इस तरह का व्यवहार अनुचित है.
Anurag Pare Indore
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