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दिल्ली पर आपकी राय

दिल्ली के इतिहास और वर्तमान को समेटती ये श्रृंखला कैसी लगी आपको?
क्या दिल्ली का इतिहास उससे दूर होता जा रहा है? क्या वाकई ये शहर 'नकली अमरीका' बनता जा रहा है?
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प्रकाशित: 12/10/11 11:14 AM GMT

टिप्पणियाँ

टिप्पणियों की संख्या:6

सभी टिप्पणियाँ जैसे जैसे वो आती रहती हैं

Added: 12/26/11 5:42 PM GMT

दिल्ली इतिहास से दूर हो रही है. आज दिल्ली में आम इनसानों के लिए कोई सुविधाएं नहीं हैं. केवल दिल्ली को पेरिस बनाने की होड़ में अमीर और अमीर होते जा रहे हैं और ग़रीब और ग़रीब. इतिहास बताता है कि अमीरी तब ही ज़िंदा रहती है जब ग़रीब ज़िदा हों. इसीलिए सरकार भी ग़रीबों के लिए कुछ नहीं कर रही है. दिल्ली से ग़रीबों को दूर बवाना भेजा जा रहा है जहां दो वक़्त की रोटी भी उन्हें नसीब नहीं होती.

mukesh chourase chhindwara

Added: 12/16/11 6:50 PM GMT

मेरी दिल्ली देखने की तमन्ना बचपन से रही है,हालाँकि कभी जा नहीं पाया . दिल्ली के बारे में मैंने तरह तरह की कल्पनाएँ जरुर की थीं लेकिन बीबीसी की इस शृंखला ने दिल्ली के वर्तमान को नहीं बल्कि इतिहास को भी सजीव चित्रित किया है.

Vijay hanumangarh

Added: 12/16/11 8:58 AM GMT

बचपन में दिल्ली को किताबों की नज़र से देखा था.दिलवालों के शहर दिल्ली में कदम रखते ही मशहूर जगहों को देखने से खुद को रोक नहीं पाई.

वक़्त के थपेड़ों ने दिल्ली की तस्वीर बदल दी है.ज़माने की उथल पुथल ने दिल्ली को जितना दिया है उस से कहीं ज्यादा उस से छीन लिया है.ऐसे में भावनाए और संवेदनशीलता पीछे छूट गई है और उस की जगह आधुनिक तकनीक ने लेली है.

Bushra Fatma Supaul,Bihar

Added: 12/13/11 1:06 PM GMT

दिल्ली का इतिहास बहुत अच्छा लगा. एक और बात ज़हन में आई कि भारतीय उलेमा भारतीय इतिहास के बारे में कुछ नहीं जानते हैं जो बारहा लंबी लंबी तक़रीरें करते हैं.

Amanullah Khan Maharajganj भारत

Added: 12/13/11 6:29 AM GMT

सबसे पहले बीबीसी को बधाई. अपनी राजधानी के बारे में जानकर अच्छा लगा.लेकिन अब दिल्ली पूरी तरह बदल गई है, हर जगह भीड़,भयानक शोर, प्रदूषण आदि. ऐतिहासिक धरोहर लाल किला,जामा मस्जिद,कुतुब मीनार , हुमाँयू का मकबरा बुरी हालत में हैं, हमें इनकी देखरेख करनी चाहिए.

usman Dubai

Added: 12/12/11 8:24 AM GMT

सौ साल की जवान दिल्ली पर आपकी टीम ने बेहतर काम किया है. नई पीढ़ी के लिए ये काफ़ी ज्ञानप्रद दस्तावेज़ हैं. लेकिन किसी कवि ने ठीक ही लिखा है -
एक ओर समृद्धि थिरकती, पास सिसकती है कंगाली
एक के तन पर एक न चिथड़ा, एक स्वर्ण के गहनेवाली
पास खड़े जो भव्य महल हैं, आसमान को छूनेवाले
और बगल में खड़ी झोंपड़ी, जिसकी छप्पर चूनेवाली.
बुंदेलखंड के हरिया के लिए दिल्ली एक अबुझ पहेली है और रहेगी. बेगानापन दिल्ली को नक़ली अमरीका बना रहा है.

Pramod kumar muzaffarpur

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