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क्या आईआईटी सरकारी नियंत्रण से मुक्त हों?

केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल ने प्रस्ताव किया है कि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों में प्रवेश परीक्षा का ढांचा बदला दिया जाये. सिब्बल का कहना है कि आईआईटी की वर्तमान परीक्षा पद्धती के चलते छात्र अपनी स्कूली पढ़ाई को नज़रंदाज़ करते हैं.
सिब्बल के नए प्रस्तावित ढांचे में कहा गया है कि आईआईटी में प्रवेश के वक़्त 12 वीं के अंकों को भी महत्त्व दिया जाएगा.
सिब्बल के इस प्रस्ताव पर भारतीय शिक्षा जगत दो फाड़ हो गया है. आईआईटी के संचालक इसके पक्ष में दिखे पर संस्थानों के शिक्षक और छात्र इसके खिलाफ़ उतर आए.

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प्रकाशित: 6/11/12 11:26 AM GMT

टिप्पणियाँ

टिप्पणियों की संख्या:14

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Added: 6/12/12 1:17 PM GMT

कभी तो सरकार जमीन पर उतरकर सोचे. जब पूरे देश मे ना तो एक सिलेबस है ना एक ही परीक्षा सिस्टम तो आप ये कैसे कह सकते हैं कि दोनों लड़के एक ही तरह की मेहनत करके लंबर लाए होंगे.

ramkinker allhabad

Added: 6/12/12 10:06 AM GMT

शिक्षा राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है लेकिन पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा का पतन ही हुआ है और ये सब सरकारों की गलत शिक्षा नीति के कारण हुआ है. और अब तो विशिष्ट संस्थानों पर निजीकरण का दबाव बढ़ रहा है औऱ ये सिर्फ़ पैसा कमाने का जरिया बनता जा रहा है.

Anurag Pare Indore

Added: 6/12/12 8:57 AM GMT

आईआईटी को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कर दिया जाना चाहिए.

ANAND MISHRA KATNI

Added: 6/12/12 8:48 AM GMT

सिबल जी एक दिन उत्तराखंड या अरूणाचल के किसी गाँव में बिताएँ जहाँ जाने के लिए 12 घंटे पैदल चलना पड़ता है. उस गाँव के छात्रों से बात करें. दिल्ली के पब्लिक स्कूल को देखकर नीति ना बनाएँ. आपको मौका मिला है तो भारत रत्न अबुल कलाम की राह को आगे बढ़ाएँ. कभी तो गरीबों के बारे में सोचें, उसे केवल मनरेगा का झुनझुना ही ना दें.वैसे भी मिड डे मील में खाना मिलता है,शिक्षा नहीं.

SHANKAR MONDAL New Delhi

Added: 6/12/12 2:53 AM GMT

सिब्बल साहब को ना तो आईआईटी से मतलब है और ना ही उन्हें शिक्षा सुधार की कोई चिन्ता है. उन्हें तो बस खबरों में रहना है.

Saptarshi Jamshedpur

Added: 6/12/12 2:14 AM GMT

शिक्षा का उद्देश्य ही भटक गया है,कितने छात्र हैं जो वास्तव में केवल ज्ञानार्जन के लिये आईआईटी जाना चाहते हैं,जैसे 3 इडियट का नायक था.आईआईटी से शिक्षित युवा बड़े पे पैकेज या अमरीका जाने के पासपोर्ट के रूप में ही वहां की पढ़ाई को समझते हैं.बिलकुल सही है कि शिक्षा पर सरकारी नियंत्रण नही होना चाहिए. विद्यार्थियो को ढेरों प्रवेश परीक्षाओ से मुक्ति मिलनी ही चाहिए,कोचिंग को बढ़ावा देना गलत ही है, वास्तविक ज्ञान को महत्व दिया जाना जरूरी है.

vivek ranjan shrivastava jabalpur भारत

Added: 6/11/12 5:36 PM GMT

आईआईटी जैसे शिक्षण संस्थान को नियंत्रण से मुक्त होना चाहिए.

chandan kumar mumbai

Added: 6/11/12 2:55 PM GMT

मैं कपिल सिब्बल से सहमत नहीं हूं. ये गरीब परिवार को बच्चों को प्रभावित करेगा. गरीबों के बच्चों को अच्छी स्कूली शिक्षा नहीं मिल पाती इसलिए उनकी बारहवीं का अंक भी अच्छा नहीं रहता. मेरा मानना है कि देश में होनेवाली सभी परीक्षाओं को प्रतिशत अंकों के दायरे से बाहर कर देना चाहिए.

Vimlesh Chandra

Added: 6/11/12 2:49 PM GMT

शिक्षा के पूरे ढांचे को बदलना जरूरी है. स्कूली शिक्षा केवल उपस्थिति दर्ज करने तक ही सीमित होकर रह गई है. परिवर्तन प्रारंभ से ही होना चाहिए. परीक्षा का ढांचा बदला जाना चाहिए. तभी देश में शिक्षा की स्थिति सुधरेगी.

sanjeev thakur Raipur

Added: 6/11/12 1:51 PM GMT

आईआईटी संस्थानों को सरकारी नियंत्रण से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए. मैं इस प्रस्ताव के पक्ष में हूं.

subodh kumar dhanbad

Added: 6/11/12 1:32 PM GMT

भारत में किसी भी प्रवेश परीक्षा का ढांचा ऐसा नहीं है जिस पर भरोसा किया जा सके कि उसे पास करने वाले श्रेष्ठतम होंगे. ऐसे में अगर तथाकथित मार्क्सवाद लागू किया गया तो इस कमजोर व्यवस्था की रीढ़ ही टूट जायेगी. जिस बच्चे को 2/3 दशमलव में लिखना नहीं आता वो आज यूपी बोर्ड में भी 85 प्रतिशत नंबर पा रहा है. उत्तर प्रदेश तकनीकी परीक्षा में 80 प्रतिशत आवेदक उत्तीर्ण हो रहे हैं. पता नहीं देश कहाँ जा रहा है.

Ram Lal Awasthi Allahabad

Added: 6/11/12 1:18 PM GMT

कपिल सिब्बल द्वारा लिया गया फैसला पूरी तरह गरीबों के खिलाफ है. इस फैसले से बेसिक शिक्षा का व्यवसायीकरण हो जाएगा. यहां तक कि राज्यों की बोर्ड परीक्षा को पास करने के लिए छात्रों को कोचिंग का सहारा लेना होगा और अच्छे अंक पाने के लिए मोटी रकम चुकानी होगी. ये पूरी तरह गलत है और इसे भ्रष्टाचार की श्रेणी में ही रखा जाना चाहिए.

Harish Duesseldorf, Germany

Added: 6/11/12 1:14 PM GMT

आईआईटी की परीक्षा पद्धति में सुधार करने की बजाए कृपया स्कूली शिक्षा में आवश्यकतानुसार सुधार करें. केवल सीबीएसई और आईसीएसई को ध्यान में रख कर आईआईटी की प्रवेश परीक्षा के स्वरुप में बदलाव की गलती न करें.

Piyush Pallava Navi Mumbai

Added: 6/11/12 1:12 PM GMT

12वीं के अंकों को महत्त्व देने से पहले देश के सभी परीक्षा बोर्डों की मूल्यांकन पद्धति में एकरूपता लाना आवश्यक है अन्यथा बिहार और यूपी बोर्ड से परीक्षा पास करने वाले छात्रों के लिए आई आई टी एक सपना बन कर रह जाएगा .

Piyush Pallava Navi Mumbai

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