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खाप पंचायत का ऐलान है छलावा ?
क्या खाप पंचायत का ये बदला रूप किसी सामाजिक बदलाव का संकेत है या छलावा? हरियाणा के अलग-अलग कोनों से 150 से भी ज्यादा खाप पंचायतों की शनिवार को हुई महापचांयत में कन्या भ्रूण हत्या को हत्या जैसे अपराध का दर्जा देने का ऐलान किया है. इस महापंचायत ने साथ ही दहेज प्रथा को भी जड़ से खत्म करने का आह्वान किया है. आप जानते ही है कि देश में सबसे खराब लिंग अनुपात हरियाणा का है. उत्तर भारत में खाप पंचायतो का दबदबा काफी है. खाप पंचायतों पर अभी तक महिला विरोधी और रूढिवादी होने के आरोप लगते रहे हैं लेकिन इन नए ऐलानों से क्या किसी सामाजिक बदलाव के संकेत मिलते हैं? क्या कन्या भ्रूण हत्या और दहेज जैसे मसलों पर खाप पंचायतों के ऐलान से कुछ फर्क पड़ेगा ? आप क्या सोचते हैं? लिख भेजिए अपनी राय.
प्रकाशित:
7/14/12 4:07 PM GMT
टिप्पणियाँ
टिप्पणियों की संख्या:18
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7/19/12 8:23 AM GMT
उत्तर भारतीय राज्यों में पंचायतों या खाप पंचायतों का अस्तित्व और दबदबे के पीछे एक प्रमुख कारण है 'आज भी' यहाँ की नयी पीढ़ी का बड़े बूढों के प्रति आदर सम्मान. और दूसरा कारण है राजनीतिज्ञों का 'वोटों के लिए' इन खापों की जी-हजूरी करना. खापों का कन्या भ्रूण हत्या पर यह आह्वान प्रशंसनीय है पर इन पंचायतों के बुज़ुर्ग, दम्भी, रुढ़िवादी, संपन्न "पंचों" को ये समझना होगा की इज्ज़त कमाई जाये न की छीनी जाये.
Vikas Thakur Noida
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7/18/12 5:24 PM GMT
खाप पंचायत का जो तुगलकी फरमान आए दिन समाचार में आता है. उससे पता चलता है कि हमारे समाज में अभी भी बालिका को बालकों के समान स्थान नहीं दिया जाता है. ये हमारे समाज के लिए कलंक है. यहां राधा, सीता, लक्ष्मी, पार्वती की पूजा जरूर की जाती है लेकिन बेटी के साथ न्याय नहीं किया जाता.
Tripurari Kumar Jhansi
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7/17/12 7:23 PM GMT
खाप की बैठक में महिलाओं का एलान अच्छा है, पर व्यावहारिक दुनिया में बात कुछ और होती है. हरियाणा में लड़कियों की संख्या तेज़ी से घट रही है. अब शादी के लिए लड़कियां केरल, नेपाल और बंगाल से लाई जा रही हैं. ज़रूरत है कि लोग कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगाएं लेकिन दुर्भाग्य है कि डॉक्टर पैसे कमाने के लिए पंचायत के फैसले को ठेंगा दिखाते रहेंगे.
prasun latant new delhi
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7/17/12 5:39 AM GMT
सरसरी तौर पर फ़ैसले का समर्थन किया जाना ठीक रहेगा. यद्यपि भारत की सरकार कोरी भाषणबाज़ी से राष्ट्र का ध्यान दाएँ-बाएँ कर सकते हैं. हाँ यदि भारत की निरीह बेटियों को मुफ्त शिक्षा, भोजन, वस्त्र आदि देकर प्रोत्साहन दिया जाए तो जन जागरण संभव है.
Bheemal Dildar Nagar Mumbai
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7/17/12 3:24 AM GMT
हमारे देश में सामाजिक कुरीतियाँ इस क़दर फैली हैं कि इसे एक झटके में समाप्त नहीं किया जा सकता है. कोई भी सामाजिक बदलाव धीरे-धीरे ही आता है और इसमें भी वक़्त लगेगा. इसका सबसे बड़ा कारण अशिक्षा और बेरोज़गारी है. जबतक महिलाएँ और हर कोई अपने पैरों पर खड़ा नहीं होता, तब तक ऐसे फ़ैसले लिए जाते रहेंगे.
navin kumar niraj patna bihar
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7/17/12 1:33 AM GMT
खाप पंचायत की बदलती सोच अच्छा संकेत है क्योंकि समाज में फैली भ्रांतियों को समाप्त करने की ज़िम्मेदारी भी समाज की ही है. देश में भ्रूण हत्या, दहेज जैसी सामाजिक बुराईयों के विरूद्ध सख्त क़ानून है परंतु लोगों की जागरूकता की कमी के कारण इस पर नियंत्रण नहीं है.लेकिन जब खाप ने विरोध में झंडा उठाने का एलान कर दिया है तो आशा यही है कि अब समाज इन बुराईयों से पूरी तरह से खत्म ना सही, पर बहुत हद तक लगाम लगाने में ज़रूर सफलता मिलेगी.
Wajeeh Ahmed Tasawwur Saharsa
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7/16/12 7:17 PM GMT
कन्या भ्रूण हत्या के दो मुख्य कारण हैं 1-दहेज, 2-प्रेम विवाह. 1 के लिए माता-पिता तथा 2 के लिए लड़कियाँ भी जिम्मेदार हैं| अतः दहेजलोभियों को उम्रकैद की सजा और प्रेमविवाह को माता-पिता की अनुमति के बिना अवैध संबंध घोषित किया जाय और कड़ी सजा का प्रावधान हो तो कन्या भ्रूण हत्या को रोका जा सकता है| पंचायतों के कुछ फैसलों का जो अच्छे हों, उनका सम्मान करना चाहिए|
कुलदीप अबू धाबी
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7/16/12 11:46 AM GMT
खाप पंचायत का फ़ैसला किसी बदलाव का संकेत नहीं बल्कि पंचायतों द्वारा अपनी हर तरफ हो रही किरकिरी से ध्यान हटाने और गिरती हुई साख को बचाने की एक कोशिश है.
Amit Garhwal Jhunjhunu
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7/16/12 7:10 AM GMT
सुबह का भूला शाम को वापस आए तो उसको भूला नहीं कहते. सकारात्मक सोच रखनी चाहिए.
saurabh barhal ganj
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7/16/12 6:55 AM GMT
ये हृदय परिवर्तन की घटना नहीं बल्कि मजबूरी में उठाया गया क़दम लगता है जो कि हरियाणा में औरतों और मर्दों की संख्या में बढ़ते अंतर के कारण हुआ है जिससे कि एक बड़ी सामाजिक समस्या पैदा हो रही है. ये दरअसल समाज को सांस्कृतिक हमले से बचाने का एक क़दम है. कुल मिलाकर ये एक अच्छा कदम है.
Opee sharma Ghaziabad
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7/15/12 4:02 PM GMT
छलावा तो सरकारें करती हैं क़ानून बना कर सिर्फ़ उसका मज़ाक उसका मज़ाक उड़ाया जाता है, अमल नहीं किया जाता. अगर अमल ही किया जाता तो खाप पंचायत को कण्या भ्रूण हत्या के लिए कोई कानून बनाने की ज़रूरत ही नहीं थी. खाप पंचायतें या जो इस तरह की पंचायतें होती हैं वो समाज को सही ढंग से चलने की सलाह देने की कोशिश करती है, ये अच्छा क़दम है.
Mohammed Murshid Riyadh Saudi Arab
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7/15/12 1:26 PM GMT
अच्छी शुरुआत का हमेशा स्वागत होना चाहिए,खाप पंचायतों ने पूर्व में भले ही कुछ तालिबानी फैसले दिए थे जिनका मैं विरोध करता हूं, लेकिन कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ़ खाप की पहल का मैं स्वागत करता हूँ.
सुनील बिश्नोई श्रीगंगानगर, राजस्थान
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7/15/12 10:00 AM GMT
कोई भी समाज स्त्री और पुरूष के तालमेल पर टिका है और किसी एक को कम कर दिया जाए तो उस समाज में विसंगतियाँ पैदा होती हैं और जिस तरह से खाप पंचायत ने एलान किया है वो शुरूआत है और इससे उम्मीद की जानी चाहिए कि ये देश और दुनिया के लिए मिसाल बने.
Vivek Kumar Bhopal
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7/15/12 6:30 AM GMT
ये खाप पंचायत का कोई बदला हुआ रूप नहीं है, ये उनकी मजबूरी में उठाया हुआ कदम है क्योंकि यहाँ लड़कियों की कमी है, लड़के कुँआरे बैठे हैं. इसलिए ये समाज के दबाव में उठाया गया कदम ह जिसपर वो खरा कैसे उतरेगा ये तो समय ही बताएगा.
himmat singh bhati jodhpur
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7/15/12 5:45 AM GMT
फ़ैसला कोई भी ले लेकिन सबसे अहम है उसका क्रियान्यवयन जो कि सबसे कठिन है. सदियों से औरतों को निम्नतम समझने वाले पुरूष प्रधान समाज में उन्हें बराबरी का दर्जा देना किसी को गवारा नहीं होगा. मगर उम्मीद की जा सकती है, वक्त ही बताएगा कि फेसला अंतर्मन से लिया गया या दिखावे के लिए.
Anurag Pare Indore
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