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फॉर्मूला वन समृद्धि का प्रतीक?

ग्रेटर नोएडा में 28 अक्तूबर को बुद्ध फॉर्मूला वन अंतरराष्ट्रीय सर्किट में दूसरा ग्रां-प्री होने वाला है. भारत में अंतरराष्ट्रीय स्तर का यह पहला और एकमात्र ट्रैक है जो पिछले साल ही शुरु हुआ है.

क्या यह ट्रैक देश में विकास और तरक्की का प्रतीक है? क्या यह संकेत है कि भारत उन गिने-चुने देशों में शामिल हो गया है जिन्होंने सबसे अधिक तरक्की की है?

या फिर यह केवल तरक्की का एक टापू मात्र है जिससे बाहर निकलें तो पता चलता है कि हकीकत कुछ और है, और तरक्की केवल एक भ्रम है?

एक राय यह है कि कार रेस का यह खेल केवल अमीरों का शौक है जिससे आम आदमी जुड़ ही नहीं पाता. फिर यह रेस देखने के लिए आपको हज़ारों रुपए खर्च करने पड़ते हैं.

इस ट्रैक को बनाने के लिए जिनकी ज़मीनें अधिग्रहीत की गईं उनकी ज़मीने तो गईं ही, साथ ही रोज़ी रोटी का साधन भी जाता रहा.

लेकिन यह भी कहा जाता है कि इस रेस ट्रैक की वजह से न केवल नोएडा बल्कि सारे भारत को एक पहचान मिली है. इस क्षेत्र में तेज़ी से विकास हुआ है.

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प्रकाशित: 10/25/12 9:16 AM GMT

टिप्पणियाँ

टिप्पणियों की संख्या:12

सभी टिप्पणियाँ जैसे जैसे वो आती रहती हैं

Added: 10/27/12 12:14 PM GMT

इस रेस की वजह से ना केवल नोएडा बल्कि भारत को एक पहचान मिली है.

SATISH NEW DELHI

Added: 10/27/12 9:11 AM GMT

खोखली बातें करने से कुछ नहीं होता. फॉर्मूला रेस से कुछ ज्यादा होने वाला नहीं है. भारतीय सरकार को जहाँ विकास करवाना चाहिए, वहाँ विकास नहीं करती. वो हो जाए तो पूरे देश में पानी की कमी नहीं रहेगी या देश तरक्की करेगा. हमें विकास की जरूरत है ना कि दिखावे की...

abhishek rajpurohit mumbai

Added: 10/27/12 7:45 AM GMT

ग्रेटर नोएडा स्थित बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट ट्रैक को बनाने में चार करोड़ डॉलर का ख़र्च आया है. इतनी बड़ी रक़म को यदि ग़रीबी उन्मूलन में लगाई जाती तो बात ही कुछ और होती.

निशा राय बरसौनी,पूर्णिया(बिहार)

Added: 10/27/12 5:04 AM GMT

भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. आज भारत की गिनती दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में होती है. विश्व की अर्थव्यवस्था को चलाने में भारत की भूमिका बढ़ती जा रही है. ऐसे में फ़ॉर्मूला वन भारत के लिए शान और गौरव की बात है. इससे भारत को एक ख़ास पहचान मिली है. यह अलग बात है कि सरकार को ग़रीबी उन्मूलन, भुखमरी निवारण एवं किसानों की दयनीय स्थितियों के समाधानार्थ विशेष ध्यान देना चाहिए था.

अमल कुमार विश्वास बरसौनी,पूर्णिया(बिहार)

Added: 10/27/12 4:34 AM GMT

भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. आज भारत की गिनती दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में होती है. विश्व की अर्थव्यवस्था को चलाने में भारत की भूमिका बढ़ती जा रही है. ऐसे में फ़ॉर्मूला वन भारत के लिए शान और गौरव की बात है जिससे भारत को एक ख़ास पहचान मिली है. यह अलग बात है कि सरकार को ग़रीबी उन्मूलन, भुखमरी निवारण एवं किसानों की दयनीय स्थितियों को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए थी.

अमल कुमार विश्वास बरसौनी,पूर्णिया(बिहार)

Added: 10/26/12 11:25 PM GMT

ऊँची अपार्टमेंटल इमारतें, चमचमाते मॉल, गोल्फ कोर्स और फार्मूला वन जैसे खेल किसी एक खास क्षेत्र की सम्रद्धि का तो परिचायक हो सकता है लेकिन पूरे देश के लिये नहीं. गोल्फ, F-1 जैसे खेल बहुत ज्यादा पैसे बालों के लिये है. खेल ऐसे हों जिसमेँ हर कोई भाग ले सके. मुझे तो रेसिंग जैसे खेलों में हुनर कतई नजर नही आता. यहाँ खिलाड़ी से ज्यादा मशीनो का कार्य है. उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में, जहाँ शिक्षा-स्वास्थ्य जैसी मूलभूत जरुरतों के लाले पड़े हों, वहाँ आप ऐसे आयोजन करके अपने को विकसित कहना चाहें तो क्या कहा जा सकता है.

अमित भारतीय जालौन (उo प्रo) भारत

Added: 10/26/12 7:40 PM GMT

ये कृतिम सफलता की ओर इशारा है. सिर्फ नागरिकों के समृद्ध होने से देश समृद्ध होता है. इस रेस के भारत में आने से कौन सी समृद्धता आ जाएगी? लोगों की जमीन चली गई है. कंपनी ने इस रेस ट्रैक को बनाने में 1,500 करोड़ रुपए खर्च किए हैं. फॉर्मूला वन रेस के आयोजन से कंपनी औऱ सरकार को कितना फायदा होगा? फॉर्मूला वन इंसान और मशीन के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं है. इस रेस में कितने भारतीय ड्राइवर और कंपनियाँ शामिल हैं?

satnam singh coochbehar, west bengal

Added: 10/26/12 10:23 AM GMT

इस रेस की वजह से ना केवल नोएडा बल्कि भारत को एक पहचान मिली है. इस क्षेत्र में तेज़ी से विकास हुआ है.

vivek ranjan shrivastava jabalpur भारत

Added: 10/26/12 6:08 AM GMT

भारतीय समाज विचित्र है. इतिहास साक्षी है कि इस देश में सदा ही सामाजिक और आर्थिक असमानता रही है जिसका औचित्य संपन्न एवं प्रतिष्ठित वर्ग भांति-भांति के (कु)तर्कों के बखूबी सिद्ध करता आया है. समाज में सदा से ही एक वर्ग ऐसा रहा है जो अपनी संपन्नता और दूसरों की विपन्नता देख खुश होता है. यदि उसे दूसरे का हक भी मिल रहा हो तो उसे बिना ग्लानि के स्वीकार लेगा. यह सोच हमारे जनप्रतिनिधियों, प्रशासकों मे स्पष्ट दिखती है. फ़ॉर्मुला-1 रेस इसी मानसिकता का परिणाम है. इंडिया-भारत के अंतर से उन्हें कष्ट नहीं है.

योगेन्द्र जोशी वाराणसी भारत

Added: 10/25/12 9:35 PM GMT

इस मामले में जरूर भ्रष्टाचार होगा, इसलिए ऐसी बड़ी परियोजनाओं की जरूरत है.

jayant pune

Added: 10/25/12 4:37 PM GMT

एक सिक्के के दो पहलू: एक तरफ जहाँ ग्रेटर नोएडा के इस फॉर्मूला वन रेस ट्रैक की वजह से भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति मिली है. पिछले साल के बाद बहुत से खिलाड़ियों ने माना कि ये उनके सबसे पसंदीदा ट्रैक में से एक है. पर दूसरी तरफ ये आम आदमी के क्या काम आया? वो ना तो ये रेस वहाँ जाकर देख सकता है! बहुत से लोगों की जमीन चली गई जो उनके उम्र भर काम आने वाली थी.

vikram jhorar VPO-bani SIRSA (HARIYANA)

Added: 10/25/12 1:58 PM GMT

बुद्ध फॉर्मूला वन अंतरराष्ट्रीय सर्किट किट कह लो या पहला एकमात्र ट्रैक, भारत की आम जनता को इससे कोई लाभ मिलने वाला नहीं है. आम लोगों की जमीन चली गई, आम लोग बेरोजगार हो कर भूखमरी का शिकार हो गए. ये पैसे वालों के चोंचले हैं. देश की तरक्की से इसका कोई लेना देना नहीं है. यह वो हसीन सपने की तरह है जो आम लोगों के कभी पूरे नहीं होते. ये आसमान से सीधे धरातल पर गिराने के समान है, कहें दिन में तारे देखने के समान है. इसे देखने वाले वही हैं जो पैसे वाले हैं.

himmat singh bhati jodhpur

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