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क्या प्रकृति के सामने असहाय है अमरीका ?
मूसलाधार बारिश, तेज हवाओं और ऊंची लहरों से साथ चक्रवाती तूफान सैंडी अमरीका के पूर्वी तट पर तबाही मचा रहा है. न्यूजर्सी और न्यूयॉर्क जैसे महासंपन्न शहरों में जगह जगह पानी भर गया है. इस तूफान के खौफ के चलते 1985 के बाद से पहली बार न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज को भी बंद करना पड़ा है. आशंका है इस तूफान से 12 राज्यों के छह करोड़ से भी ज्यादा अमरीकी प्रभावित हों सकते हैं. कई महानगरों में बिजली गुल है, लाखों घरों में अंधेरा है, यातायात व्यवस्था चरमरा गई है और 14000 विमानों की उड़ानें रद्द करनी पड़ी है. अमरीकी सरकार का दावा है कि उसने इस तूफान से निपटने की पूरी तैयारी कर रखी है, बावजूद इसके लोगों में दहशत है.
कभी कैटरीना का कहर तो कभी किसी और प्राकृतिक आपदा का कहर.
सवाल है कि तमाम तरह की तकनीकी संपन्नता, आर्थिक संपन्नता और मौसम पूर्वानुमान की वैज्ञानिक संपन्नता के बावजूद अमरीका जैसा विकसित देश भी प्राकृतिक आपदाओं के सामने कैसे बौना साबित हो जाता है ? क्या वो इसका सामना करने में असहाय है ?
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प्रकाशित:
10/30/12 6:03 AM GMT
टिप्पणियाँ
टिप्पणियों की संख्या:21
सभी टिप्पणियाँ जैसे जैसे वो आती रहती हैं
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11/1/12 7:01 AM GMT
ये उनका दूसरों के प्रति विचारधारा और कर्म का फल है.
SomRaj Godara Bhakhri Osian, Jodhpur(raj.)
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10/31/12 6:57 PM GMT
पिछले दस ग्यारह सालों में अमरीका ने अफगानिस्तान, इराक, पाकिस्तान व कई जगहों पर लाखों बेगुनाह लोगों को मौत के घाट उतारा है और मुस्लिम जगत में अराजकता फैला रखी है. सैंडी तूफान के जरिए जरा उसको भी तो पता चले कि इंसानों की मौत और बर्बादी क्या होती है.
यूसुफ अली अजीमुदीन खाँ, भीँचरी रियाद, सऊदी अरब
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10/31/12 4:45 PM GMT
ये अमरीका की दादागिरी का नतीजा है जो उस पर ये प्राकृतिक आती है क्योंकि वो अपने को दुनिया की सबसे से सुप्रीम शक्ति समझता है लेकिन वो ये भूल जाता है कि सबसे बड़ी एक ही शक्ति है जिसे भगवान बोलते है जो हर बेगुनाह पर जुल्म करने की सज़ा देता है. अमरीका ने ईरान पर प्रतिबंध लगाए तो उसको ये खामियाजा भुगतना होगा.
urfi rizvi lucknow भारत
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Added:
10/31/12 4:39 PM GMT
अमरीका जैसा विकसित देश भी प्राकृतिक आपदाओं के आगे बौना साबित हो रहा हैं.यह सच है कि प्रत्येक मनुष्य को उसके कर्मों के अनुसार फल मिलता है तो अमरीकावासियों पर जो कुदरत का कहर बरपा है वो बिल्कुल सही हैं.भगवान ने जो किया सही किया, जो करेगा सही करेगा तथा जो कर रहा है सही कर रहा है. हम तो भगवान से यही प्रार्थना करते है कि सबका भला हो,विश्व का कल्याण हो.
SomRaj GodaRa BhakhRi Osian, Jodhpur (raj.)
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Added:
10/31/12 4:02 PM GMT
अमरीका में आया तूफान ये दर्शाता है कि प्रकृति के सामने हम कितने मजबूर हैं चाहे मानव कितना भी तरक्की कर ले किंतु कुदरती शक्ति के सामने बौना ही साबित होता है.साथ ही कुदरत ये भी नहीं देखती कि कौन क्या है.उसके लिए सब बराबर है,इसलिए ऐसे समय में सबको मिलजुल काम करना चाहिए.
neeraj kumar ranchi
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10/31/12 12:32 PM GMT
ये अल्लाह की मार है अगर अभी भी अमरीका नहीं सुधरा तो तबाह और बर्बाद हो जाएगा.
Mohammad saad Ahmad Lucknow
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10/31/12 9:31 AM GMT
कुदरत की ताकत के सामने कोई ताकत नहीं ठहर सकती है. अमरीका क्या, कोई भी कुदरत के प्रकोप के सामने असहाय ही रहेगा. अब अमरीका की मदद में हमें आगे आना चाहिए, समय का यही तकाजा है. मानवता यही है. दुःख की इस घड़ी में हम अमरीकी भाइयों के साथ हैं.
pramodkumar muzaffrpur
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10/31/12 9:24 AM GMT
कोई देश कितना भी शक्तिशाली क्योँ न हो जाए, प्रक्रति के सामने बौना ही रहेगा. हम हर किसी को अपने बस में करना चाहते हैं, लेकिन हमें ये बात गांठ बांध लेनी चाहिए कि विज्ञान की भी अपनी सीमाएँ है, हर प्रश्न का उत्तर नहीं है. प्रक्रति को कम मानकर जिसने उस पर अधिपत्य जमाना चाहा है, समय-समय पर उसकी सीमाएं याद दिलाई गई है. अभी तो अमरीका या कुछेक देशों पर संकट है. अगर हम नहीं चेते तो न सिर्फ मानव बल्कि सम्पूर्ण जीव जगत पर संकट निश्चित है. ऐसा ही रहा तो मनुष्य अपने साथ अन्य निर्दोष प्रणियोँ को भी ले डूबेगा.
अमित भारतीय जालौन (उo प्रo) भारत
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10/31/12 6:46 AM GMT
इस दर्द भरी घटना ने यह साबित कर दिया कि दुनिया का बना थानेदार, दादागिरी,सब उस ऊपर वाले भगवान, अल्ला, मालिक के सामने कुछ नहीं है. किसी भी मुल्क को जायज व नाजायज बमों से, फौजों से तो अमरीका बर्बाद व तबाह कर सकता है. लेकिन ऊपर वाले के कहर के आगे घुटने क्यों टेक दिए. यह कुदरत का खेल है जो समय समय पर बताता है कि दुनिया की महाशक्ति कौन है.
SHABBIR KHANNA RIYADH ( SAUDIA ARABIA )
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10/30/12 10:07 PM GMT
कुदरत के हर करिश्मे को अमरीका तो क्या पुरी दुनिया भी एक हो जाये तो भी असहाय ही होगी.क्या फर्क पङेगा अमरीका पर जिसने न जाने कितने निर्दोष करोङो लोगो को मौत के आगोश मे सुलाया है. कही सैंडी मे भी अलकायदा का हाथ तो नही है?इतिहास गवाह रहा है कुदरती आफत से बचने के लिए मन्दिरों,मस्जिद,गिरजाघरो ने प्रार्थना सभाए होती है,लेकिन गुनाह के बादशाह अमरीका को यह एहसास नही है इसलिए मालिक से माफी माग कर.
SHABBIR KHANNA RIYADH ( SAUDIA ARABIA )
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10/30/12 9:08 PM GMT
उस महाशक्ति के सामने एक सुपर शक्ति होती है. कुदरत के सामने सब बराबर.
krishna shastri elmhurat
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10/30/12 5:10 PM GMT
कई छोटे देशों में कत्लेआम और निर्दोष लोगों का खून बहाना सुपर पॉवर अमरीका का अधिकार है. इराक, अफगानिस्तान, फलस्तीन, ईरान, सीरिया जैसे कोई देशों को बर्बाद करने वाला अमरीका आज खुदा की ताकत के आगे बौना हो गया है. याद रखिए प्राकृतिक आपदा के सामने बड़ी-बड़ी सुपर पॉवर कुछ नहीं कर पाती.
raza husain lucknow
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10/30/12 5:03 PM GMT
किसी देश को महाशक्ति कहने का यह अर्थ कदापि नहीं कि उसने प्रकृति को मात दे दी है. अमरीका केवल इस अर्थ में महाशक्ति है कि उसने प्रकृति के नियमों और उसके संसाधनों के दोहन की कला विकसित की है और उसी के बल पर सामरिक एवं आर्थिक दृष्टि से अन्य देशों पर हावी हो सका है. परंतु वह प्राकृतिक आपदाओं को भी टाल सकता है यह उम्मीद करना मूर्खतापूर्ण है. हां आपदाओं का सामना वह बेहतर कर सकता है इसमें दो राय नहीं. किंतु उनका घटित होना रोक नहीं सकता है - कोई नहीं रोक सकता.
योगेन्द्र जोशी वाराणसी भारत
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10/30/12 3:44 PM GMT
सेर को सवा सेर, या यूँ कहें कि उपर वाले की लाठी में आवाज नही होती.
harjinder pilibanga
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10/30/12 3:20 PM GMT
विज्ञान और तकनीकी पर प्रकृति भारी है और चाहे जितने भी प्रयोगशालाएं स्थापित हों फिर भी प्रकृति समय के साथ परीक्षा लेती रहती है. और जब इससे खिलवाड़ होगा तो इसके दुष्परिणाम मानव को ही भोगना होगा
Anurag Pare Indore
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