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समाज के लिए सबक की घड़ी

दिल्ली में सामूहिक दुष्कर्म की घटना ने ना सिर्फ आम जनता को आंदोलित किया है बल्कि राजनीतिज्ञों के सामने भी एक सवाल रखा है कि इस तरह के घिनौने अपराध की सजा क्या हो और भारत का समाज और राजनीतिज्ञ इस घटना से क्या सबक लें.

आम आदमी लाचार है और इसके चलते वो बार-बार सड़कों पर प्रदर्शन का रुख कर रहा है. वहीं सरकार के पास खोखले वायदे हैं.

भारत में दुष्कर्म की ऐसी वारदातें लगातार होती रही हैं और वर्षों से इसके लिए कड़े दंड की भी मांग होती रही है.

क्या अब भारतीय समाज और राजनीतिक व्यवस्था इससे सबक लेगी? राजनीतिज्ञों का उदासीन रवैया अब बदलेगा? क्या आम लड़कियों और जनता की लाचारी खत्म होगी? आज इसी विषय पर आप अपनी बात रखें बीबीसी इंडिया बोल पर. मुफ्त फोन करें. 1800-11-7000 और 1800-102-7001 पर.
शाम साढ़े सात बजे

प्रकाशित: 12/29/12 11:44 AM GMT

टिप्पणियाँ

टिप्पणियों की संख्या:26

सभी टिप्पणियाँ जैसे जैसे वो आती रहती हैं

Added: 1/4/13 9:09 AM GMT

समाज सबक लेगा या नहीं, यह तो बहुत अनिश्चित है क्योंकि आज भी तथाकथित सभ्य समाज का एक बड़ा वर्ग एड्स जैसी घातक बीमारियों की आड़ में जरूरी नैतिक मूल्यों परक नैतिक-शिक्षा का खात्मा करते हुए सवर्था समाज-घातक सैक्स-शिक्षा पर बल दे रहा है.क्या आज जैसे तेज मीडिया के युग में भी घातक बीमारियों से बचाव के प्रचार का अनैतिक भार बच्चों के कमजोर मानस पटल पर डालकर,पश्चमी अ-सभ्यता का अन्धानुकरण कर उन्हें समय से पहले प्रायोगिक तौर पर जवानी का सुख भोगने और ऐसे अपराध करने को नही उकसाया जा रहा है?

siddhartha arya Greater Noida भारत

Added: 1/3/13 12:50 PM GMT

पहले 10 साल तक 100 प्रतिशत विशेषाधिकार किसी भी यौन उतपीङ़न की शिकायत पर दिया जाए. शिकायत कक्ष स्थापित किया जाय जो महिला के निरीक्षण मे हो,देश के मुख्य विकास मे महिला बहुसंख्यक पर जोर दिया जाए.

shiv kant` हसनपुर

Added: 1/3/13 11:46 AM GMT

हजारों बलात्कार के केस अदालतों में पेंन्डिग पड़े है! हाई प्रोफाइल मामलों पर ही यह समाज और मीडिया शोर मचाता है बाकी मामले या तो दैनिक खबर मात्र बन पाते हैं अथवा खबर बन ही नहीं पाते और बहुत मामले तो महीनों बाद अदालतों के दखल पर ही थानों में दर्ज हो पाते हैं.अपराधियों व उनके पैरोकारों के पैरों में भी जब विवाईयां पड़ेगी कुछ सुधार की गुंजाइश है.

सिद्धार्थ कौसलायन आर्य भारत

Added: 1/3/13 6:32 AM GMT

विगत बलात्कार की घटना अकेली नहीं जो दिल दहला दे. ताकतवर आदमी द्वारा अपने नौकर को गर्म सलाख से दागना, नंगा करके अपने विरोधी को सरेराह तड़पाकर मारना, चेहरे पर तेजाब डालकर बदला लेना, निरीह बच्चों का अपहरण करके हत्या करना, लापरवाही से हुई दुर्घटना में लोगों का तड़पना, ये सब होता आया है. संवेदनशून्य लोगों पर इनका कोई असर नहीं होता. पुलिस बल के लोग, प्रशासनिक अधिकारी, एवं राजनेता इस मामले में अव्वल ठहरते हैं. जब आज तक उनकी संवेदना नहीं जगी तो भला अब क्या जगेगी? बस, दो दिन का हल्ला है!!

योगेन्द्र वाराणसी

Added: 1/2/13 2:19 PM GMT

समाज को बदलने की व्यर्थ कोशिश लोगों का घटना से ध्यान भटकाने के बराबर है, 5000 साल पहले रावण ने सीता का अपहरण किया था, इतने समय के अंतराल में भी समाज नहीं बदला, समाज कोई बदलने वाली चीज नहीं है, बदलना होगा व्यक्ति को, समाज अपने आप बदलेगा.

अनिल बर्वे भोपाल

Added: 1/1/13 3:14 PM GMT

बलात्कार को लेकर इतना हल्ला क्यों मचाया जा रहा है अपराध तो अपराध है हम दिल्ली के एक केस को इतना क्यों तूल दे रहे , देश के कई पिछड़े और आदिवासी क्षेत्र की महिलाओं की इज्जत के साथ खिलवाड़ किया जाता है उनको मीडिया कवरेज और सिंगापुर के अस्पताल में इलाज नहीं मिलता जरुरत तो पूरी व्यवस्था को बदलने की है हम अंग्रेजो के वक़्त का कानून इस्तेमाल कर रहे है जो गुलामो के लिए है खाली दंड से ये समस्या हल नहीं होगी महिलाओं और पुरुषों दोनों को सोचना होगा क्या सही है और क्या गलत.

Y S India

Added: 1/1/13 2:55 PM GMT

इतने बड़ी घटना के बाद भी अगर समाज और हम संवेदनशील नहीं हो रहे है तो इससे लगता है की हमारा ज़मीर मर गया है.देश में लगातार इस तरह की घटनाएं बढ़ती जा रहीं है.इन्हें नियंत्रित नहीं किया गया तो हम भी जानवर ही कहलाएंगे .

Ashendra Singh Gwalior भारत

Added: 1/1/13 2:41 PM GMT

समाज के नैतिक मूल्यों की पुनस्थापना, संवेदनाओं की पुनस्थापना और शिक्षा प्रणाली के माध्यम से संभव हो सकता है.

Kapidwaj INDORE

Added: 1/1/13 6:40 AM GMT

एक लोकतान्त्रिक देश के बाशिंदों के लिए इस से शर्मनाक और क्या होगा कि आम जनता अपनी हर तकलीफ, हर दर्द के लिए आन्दोलन का रुख करने लगी है. इसमें भी बदतर हालत यह है कि आम जनता की हर तकलीफ पर नेता बस अपनी रोटी सेंकने में लगे होते हैं. समस्या चाहे कितनी भी गंभीर हो उनका उदासीन रवैया हमे आहत तो करता ही है कि हम ऐसे लोकतंत्र का हिस्सा हैं. अब अपनी इज्ज़त, अपने हक की लड़ाई हमें अपने बूते लड़नी होगी.

bushra fatima Supaul,Bihar भारत

Added: 1/1/13 6:08 AM GMT

कोई नेता को दोष देता है तो कोई सरकार को. हम दोष किसे दें और कैसे रोकें इस अत्याचार को, इस बारे में कोई नहीं सोचता.

javed sheikh jhansvi dubai

Added: 1/1/13 5:41 AM GMT

चेतना निश्चित जागी है. हमें सोचना होगा कि ऐसे अपराध क्यों होते हैं. इसकी तह तक जाना होगा जड़ पर वार करना होगा.

krishna kumar mandi bamora [sagar] m.p. भारत

Added: 1/1/13 3:25 AM GMT

रेप से बडा कोई दुसरा दुष्कर्म हो ही नहीं सकता. इसके लिए पुलिस और नेता दोनो बराबर जिम्मेदार हैं.

pankaj singh mumbai

Added: 12/31/12 3:59 PM GMT

जरूरत मन बदलने की है. कानून बदलने से बलात्कार रुक जाएंगे, ये एक गलतफहमी है. लोग बेगुनाहों को भी आसानी से फंसा दिया करेंगे. कानून अंधा है और उन्हें फांसी दे दिया करेंगे. जरूरत हमारे समाज को बदलने की है

javed sheikh jhansvi dubai

Added: 12/31/12 3:28 PM GMT

मेरे विचार से आरोपियों को नपुंसक बना देना चाहिए.

हनीफ ख़ान अलवर भारत

Added: 12/31/12 5:51 AM GMT

न केवल बलात्कार वरन् अनेक ज्वलंत मुद्दों जैसे चुने गए नेताओं को वापस बुलाना या अन्य विषयो पर कानूनी परिवर्तन समय के साथ जरूरी हो चला है, समाज के दबाव से ही सही राजनेताओ को सही फेसले लेने की जरूरत है.

vivek ranjan shrivastava jabalpur भारत

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