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इस बहस को सहेज कर रख लिया गया है – जवाब देने की अनुमति नहीं है

बलात्कार इंडिया में ज्यादा भारत में कम ?

दिल्ली में हुई सामूहिक दुष्कर्म की घटना के बाद बलात्कार और इससे जुड़े क़ानून पर बहस जारी है. इस बीच, तमाम ऐसे बयान भी आ रहे हैं जो विवाद पैदा कर रहे हैं.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत का एक बयान आया है जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा है,"इस तरह के अपराध भारत में कम होते हैं और इंडिया में अधिक होते हैं."

उधर मध्‍य प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी एक विवादास्पद बयान देते हुए कहा,"मर्यादा का उल्‍लंघन होता है तो सीता का हरण होता है. लक्ष्‍मण रेखा हर व्‍यक्ति के लिए खींची हुई है. उस रेखा को कोई पार करेगा तो रावण सामने बैठा है. वो सीता का हरण करके ले जाएगा."

आपको क्या लगता है कि बलात्कार के मामले में 'इंडिया बनाम भारत' की ये बहस सही है.

क्या इसे शहर और गाँव के साथ जोड़कर देखा जा सकता है.

क्या ये मर्यादा की उल्लंघन का मामला है आप क्या सोचते हैं.लिखें अपनी राय.

प्रकाशित: 1/4/13 11:10 AM GMT

टिप्पणियाँ

टिप्पणियों की संख्या:62

सभी टिप्पणियाँ जैसे जैसे वो आती रहती हैं

Added: 1/11/13 3:19 AM GMT

बलात्कार की एक वजह भारतीय मीडिया भी है जिनमे स्त्रियो को या तो अबला या काम की देवी के रूप मे प्रदर्शित करते है उन्हे हथियार से लडते हुए नही दिखाते स्त्रियो मे बदलाव की जरूरत है उन्हे पुरूष बन्धन से उपर उठ कर अपने अलग बर्चरस्व के बारे मे सोचना चाहिए इसमे मीडिया को उनकी मदद करनी चाहिए। उन्हे बगैर पुरूषो के खुद सक्षम बनाये। समाजिक बन्धनो से खुद को आजाद करे। और अपने खिलाफ हुए अपराध के खिलाफ पूरी ताकत से आवाज उठाए एवं भावनाओ से उपर उठ कर सोचे।

PRAKASH CHANDRA GAUTAM ALLAHABAD

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Added: 1/11/13 3:07 AM GMT

बलात्कार एवं अन्य अपराधों की वजह कानून व्यवस्था एवं भारतीय सामाजिक ढाचा है। घटना के बाद औरतो की को सुनवाई नही होती एक वजह यह है। दूसरी वजह भारतीय समाज की है जो बालात्कार पीडित स्त्री को ही अपराधी की निगाह से देखती है यानी बालात्कार अपराधी पुरूष करे और जिम्मेदार स्त्री को माना जाय। आज भी उन्हे अच्छी निगाह से नही देखता। तीसरी सबसे बडी वजह है स्त्री का जागरूक न होना यदि अकेले मे हुआ तो समाज के डर से छिपाती है जिससे अपराधियो के हौसले और बुलन्द होते है।

PRAKASH CHANDRA GAUTAM ALLAHABAD

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Added: 1/10/13 2:12 PM GMT

बलात्कार के मामले में इंडिया बनाम भारत की तुलना सही और उचित है.

ABHISHEK TRIPATHI LUCKNOW

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Added: 1/10/13 2:45 AM GMT

यह बहस सही है. भारतीय संस्कृति के विपरीत जितनी भी बातें हैं वे सब इंडिया में हैं. यह इंडिया अंग्रेजों का बनाया गया है. लेकिन अंग्रेज भारतीयों के अनेक जन्मों के संस्कार नहीं मार सके और न ही मार सकेंगे. इंडियन वो लोग हैं जो विदेशी संस्कृति को अच्छा मानते हैं और भारतीय वो लोग हैं जो अभी भी अपनी सांस्कृतिक जड़ों के साथ जुड़े हैं.

राजेश कुमार दुग्गल जालन्धर

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Added: 1/9/13 3:44 PM GMT

यह भारतीयों की पुरानी आदत है कि समस्याओं पर न जा कर, निदान पर न जा कर, ग़ैर ज़रूरी बातें जैसे भारत और इंडिया, शहर और ग्रामीण के साथ साथ लक्ष्मण रेखा लाँघने जैसी बातों पर बहस हो रही है. गैंग रेप वैयक्तिक चीज है. इससे पूरे जेंडर को बदनाम नहीं किया जा सकता.समय अपने आप इससे निजात दिला देगा, बशर्ते ऐसी घटनाओं पर लोग आंदोलन करें और सरकार आपना काम मज़बूती से करती रहे.

meraj kashivi varanasi

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Added: 1/9/13 11:44 AM GMT

मेरे विचार में इंडिया और भारत में फ़र्क है.इंडिया पश्चिमी मूल्यों का प्रतिनिधित्व करता है जबकि भारत गाँव के लोगों का प्रतिनिधित्व करता है.मैं समझता हूँ कि मोहन भागवत बिल्कुल सही हैं. हो सकता है कि उन्होंने अपने विचार ढ़ंग से न रखे हों.

Navin Kumar saharsa

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Added: 1/9/13 8:06 AM GMT

बापू के बयान से मैं सहमत नहीं हूँ. जहाँ तक इन मामलों की बात है कमजोर दबाए जातें हैं.जरुरत महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, उन्हें हथियार देने और उसके उपयोग संबंधी नियम लागू करने की है.

INDRABHUSHAN Vapi

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Added: 1/8/13 12:36 PM GMT

पूरा मीडिया कांग्रेस की फेंकी हड्डिया चाट के भोगता रहता है. भागवत जी के बयान को पूरी तरह से गलत सन्दर्भ में लिया गया है. कोई भी मीडिया वाला उनका पूरा भाषण क्यों नहीं दिखाता ??
उस अकबरुद्दीन ओवेसी के भाषण को क्यों नहीं दिखाते मीडिया वाले ????

Ankt Bangalore

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Added: 1/8/13 12:05 PM GMT

समस्या यह है कि कोई वैकल्पिक विचार सुनने को तैयार नहीं. अंग्रेज मानसिकता वाले लोग और भूमंडलीकरण के एजेंट चाहते हैं कि पश्चिम की सारी बुराइयाँ यहाँ भी पैर पसारें, लड़कियाँ अर्धनग्न रहें लेकिन कोई उन्हें छुए नहीं. आरएसएस प्रमुख की इस बात का इतना ही तो मतलब था कि पश्चिम की अंधी नकल ही बुराई की जड़ में है. हमें बलात्कार की ओर उकसाने वाले तत्वों पर भी लगाम लगानी होगी. यह कैसी अभिव्यक्ति की आजादी है कि कोई अपनी राय देने के लिए आजाद नहीं है.

md. equebal hussain Motihari, Bihar

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Added: 1/8/13 9:31 AM GMT

मुझे लगता है कि भारतीय पुरूषवादी मानसिकता अपनी वासना और हवस पर संयम नही रख पा रही है और विचलित होकर,महिलाओं को गलत ठहराकर विवादास्पद बयान दे रही है.सामाजिक और राजनीतिक ठेकेदारों को पता होना चाहिए कि कोई महिला नही चाहती कि उसका बलत्कार हो.बलात्कार होने पर महिला और उसका परिवार अपने आप को मृतक समझता है.विकृत मानसिकता के लोग हर जगह है,वो गाँव-शहर नही देखते.पुलिस रिपोर्ट नही दर्ज करती,इसलिए उसकी रिपोर्ट को तथ्य के रूप मे नही लेना चाहिए.

लक्ष्मी कान्त मणि साँड़ी कलां, सिद्धार्थनगर, यूपी, भारत

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Added: 1/8/13 6:17 AM GMT

यह मीडिया है. किस बात को कैसे बताया जाता है यह दिख रहा है और खास कर बीबीसी तो अपने कांग्रेस प्रेम के लिए जानी जाती है. हिंदुओं के बारे में कुछ भी लिखो. अगर हिम्मत है तो ओवेसी भाइयों का भी कुछ चरित्र चित्रण करें. उसके लिए आपके पास टाइम कहाँ है ?

Anuj delhi

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Added: 1/8/13 3:59 AM GMT

,"इस तरह के अपराध भारत में कम होते हैं और इंडिया में अधिक होते हैं." बिलकुल सही है . भारत देश की अपनी संस्कृति और रीति-रिवाज है . भारत देश में शादी करना और सामूहिक परिवार में रहना, यही यहाँ का रिवाज है पर जब से इंडिया को बढ़ावा दिया जा रहा है तब से परिवार टूट रहे है और सिर्फ अपना स्वार्थ ज्यादा हावी हो रहा है . अपने लिए कमाना,खाना,जीना यह इण्डिया का कल्चर है . तो फिर भारतीय संस्कृति नहीं मिलेगी संस्कार नहीं मिलेंगे . इंडिया में सिर्फ मिलेगा शराब,शबाब,कबाब . तो.....ये सब तो होगा और होता रहेगा!

अशोक सिंह चंडीगढ़

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Added: 1/7/13 7:31 PM GMT

अगर ऐसा ही है तो लक्ष्मण रेखा सभी के लिए होनी चाहिए न. मगर यह है केवल औरतों और महिलाओं के लिए. अगर ऐसा ही है तो रात को लड़कों के बाहर निकलने पर प्रतिबंध लगाओ ना, कि शाम के 7 बजे के बाद कोई भी लड़का या पुरुष बाहर दिखाई नहीं देगा और यदि दिखा तो उस को हवालात की हवा के साथ धुलाई भी होगी. फिर दो चार शरीफ आदमी ही क्यूँ न लपेटे में आ जांए क्योंकि बलात्कार के अधिकांश मामलों में भी तो शरीफ लड़कियों को ही निशाना बनाया जाता है.

पल्लवी लंदन

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Added: 1/7/13 6:15 PM GMT

मर्यादा के उल्लंघन का मामला समाज के सभी वर्गों पर समान रूप से लागू होना चाहिये

हिमांशु शेखर बेंगलोर

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Added: 1/7/13 1:44 PM GMT

भारत और इन्डिया का फ़र्क स्पष्ट है. अपराध कही भी अस्वीकार्य होता है. भारत में माता- बहनों को देवी के रूप में देखा जाता है पर इन्डिया में भोग्या के रूप में. यत्र नार्यास्तु पूज्यन्ते - यह भारत की उक्ति है न कि इन्डिया की।

krishna shastri elmhurst new york

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