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राष्ट्रवाद या बेतुका फ़ैसला!

भारत-पाकिस्तान नियंत्रण रेखा पर हाल के दिनों में हुई गोलीबारी, दोनों ओर के सैनिकों की मौत और एक भारतीय सैनिक के शव के साथ कथित बदसलूकी के बाद रिश्तों में कड़वाहट आना कुछ हद तक शायद समझ में आता है.

लेकिन उसके बाद भारत ने जिस तरह से इंडिया हॉकी लीग में खेलने भारत आए पाकिस्तानी खिलाड़ियों को वापस भेज दिया, पाकिस्तानी रंगकर्मियों को जयपुर और दिल्ली में मंटो पर लिखे नाटक को प्रस्तुत करने से रोक दिया, पाकिस्तानी बुज़ुर्गों को वीज़ा ऑन अराइवल देने के फ़ैसले को टाल दिया, क्या ऐसा करना सही है?

क्या ये सब एक कट्टर राष्ट्रवाद की पहचान है या जल्दबाज़ी में बग़ैर सोचे समझे आवेश में आकर लिया गया बेतुका फ़ैसला? लिखिए अपनी राय.

प्रकाशित: 1/18/13 5:18 PM GMT

टिप्पणियाँ

टिप्पणियों की संख्या:32

सभी टिप्पणियाँ जैसे जैसे वो आती रहती हैं

Added: 1/22/13 6:24 AM GMT

अगर बार्डर पर शांति नहीं है तो ये सांस्कृतिक गतिविधियां किस तरह शांति स्थापित कर सकती हैं? पहले शांति स्थापित करें फिर बाक़ी बातें करें.

vinay delhi

Added: 1/21/13 6:45 PM GMT

ये सवाल ही बेतुका है. खेल और कला के नाम पर सीमा पर जो कुछ हो रहा है आप उसे नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते हैं. मैं जंग का हिमायती नहीं लेकिन शांति का संदेश केवल एक सशक्त व्यक्ति के मुख से ही अच्छा लगता है. हमारी नीति शांति की नहीं कमज़ोरी और बेवक़ूफ़ी को प्रदर्शित करती है.

Ajay San Ramon

Added: 1/21/13 6:08 PM GMT

ऐसे समय जब दोनो देशों के बीच गंभीर तनाव चल रहा है तो आतंकवादी संगठन इन हालातों का फाय़दा उठा सकते हैं. इसलिए फिलहाल इन चीज़ों का रोका जाना ही सही मालूम पडता है.

KHITISH KISHANGANJ

Added: 1/21/13 5:02 PM GMT

भारत सरकार ने जो फ़ैसला लिया है वो भारत के लिए बेहतर हैं. पाकिस्तान ने हमें ये फ़ैसला लेने के लिए उकसाया.

Aashish Delhi

Added: 1/21/13 1:48 PM GMT

इसका समाधान सिर्फ दो तरह से हो सकता है. या तो मुसलमान पाकिस्तान चले जाएं क्योंकि उन्हें अपना हिस्सा मिल चुका है. दूसरा पाकिस्तान और बांग्लादेश ख़ुद से फिर से भारत में विलय हो जाएं.

Anil Yadav India

Added: 1/21/13 12:52 PM GMT

आपने यह नहीं पूछा कि अमरीका ने पाकिस्तान में घुसकर बिना पाकिस्तान को बताए लादेन को क्यों मारा.

siddhartha arya Greater Noida भारत

Added: 1/21/13 8:23 AM GMT

पाकिस्तान से हमें हर बार धोखा ही मिलता है. हमें इतिहास से सबक़ लेकर इसराइल की तरह देश, सैनिक और नागरिकों की रक्षा करनी होगी. 'अमन की आशा' और खलों के नाम पर नित नए गुल खिलाए जा रहे हैं. कश्मीरी पंडितों की भी कोई सुध लेने वाला है क्या? यहां बीबीसी की बोलती क्यों बंद हो जाती है?

Manoj ambala

Added: 1/21/13 7:33 AM GMT

भारत को अपने यहां बिज़नेस करने वाली समस्‍त देशी विदेशी कंपनियों से कहना चाहिए कि अगर वो पाकिस्तान से भी संबंध जारी रखना चाहते हैं तो तीन माह में भारत से अपना बोरिया बिस्‍तर समेट लें. और समस्‍त पाक कलाकारों व खिलाडियों व नागारिको को भारत में आने से तब तक रोकना चाहिए जब तक वे स्‍पष्‍ट रूप से पाक प्रायोजित आतंकवाद की निंदा नहीं करते हैं.

harimohan bijnor

Added: 1/21/13 7:18 AM GMT

भारत को ये क़दम बहुत पहले उठाना चाहिए था. खेलों, फ़िल्म और बिज़नेस के बहाने कितने पाकिस्तानी आते हैं और वापस ही नहीं जाते. पाकिस्तान से शांति की उम्मीद करना खुले आसमान से बारिश की उम्मीद करने की तरह है. हमें इसराइल से सीख लेने की ज़रूरत है वरना देर हो जाएगी.

Anuj Delhi

Added: 1/20/13 9:27 PM GMT

जो करोग वो भरोगे.

krishna beljium

Added: 1/20/13 3:31 PM GMT

ये बहुत ही बेतुका और बचकाना फैसला है. इससे लोगों की भावनाएं आहत होंगी और ये सन्देश जायेगा कि भारत सिर्फ यही कर सकता है. पाकिस्तान की सेना वहां के कलाकारों या बुजुर्गों के नियंत्रण में नहीं बल्कि सरकार के नियंत्रण में काम करती है. सरकार जनता की कितना सुनती है ये भारत में भी सब जानते है. इसलिए भारत सरकार को ऐसे बचकाने फैसले करने की बजाए पाकिस्तान की सरकार से बात करनी चाहिए जिससे सच्चाई सामने आए कि गलती किसकी थी. इससे दोषी को सज़ा मिल सकेगी. ख़बरिया चैनल वाले इस मामले में जज न बनें तो ही अच्छा हो.

Mohammad Athar khan Faizabad Uttar Pradesh भारत

Added: 1/20/13 2:47 PM GMT

राष्ट्रीय स्तर पर इस प्रकार का फ़ैसला लेना उचित नहीं है. साहित्यकार, रंगकर्मी, खिलाड़ी, उद्योगपतियों को लौटाकर हम अपनी सहनशीलता खो रहे हैं. ये देश विभिन्न धर्मों, समुदायों की राजधानी है. हमें कोई फ़ैसला जवाब के तौर पर नहीं लेना चाहिए.

Dr.Meraj Hashmi (Sociologist varanasi भारत

Added: 1/20/13 10:15 AM GMT

भारत जो किया सही फैसला था लेकिन वीजा को टालना गलत था ये नही होना चाहिए.

KUMAR PATANJALI BIRPUR

Added: 1/20/13 8:02 AM GMT

क्या हिन्दुस्तान ने शांति बनाए रखने का ठेका ले रखा है? क्या उसे ग़ुस्सा होने का अधिकार नहीं है? अमरीका ने 9/11 में चार हज़ार शहरियों के मारे जाने के बदले पूरे अफ़ग़ानिस्तान को रौंद कर रख दिया और ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान में घुस कर मारा. क्या भारत देश और नागरिकों की सुरक्षा के अधिकार को इस्तेमाल नहीं करे?

dharmesh jamnagar

Added: 1/20/13 1:05 AM GMT

मक़सद ये है कि पाकिस्तान के लोगों को पता चले कि उनकी सरकार जो गंदा खेल खेल रही है उसका ख़ामियाज़ा अवाम को भुगतना पड़ता है. पाकिस्तानी खिलाड़ियों और कलाकारों को वहां की सरकार, सेना और आईएसआई की करतूतों का विरोध सरेआम करना चाहिए.

Navin Bhanushali Mumbai

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