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2/13/13 7:47 AM GMT
समाज के प्रत्येक सदस्य को अपने पसंद का काम करने का हक होता है.प्रगाश के खिलाफ फतवा संभवतः रुढिवादी व्याख्या के तहत दिया गया है, जिसमें आजादख्याली का विरोध होता है. मौलानाओं को तुर्की से सबक लेना चाहिए जो इस्लामी देश होने के बावजूद अपनी आधुनिकताबोध के लिए जाना जाता है.महिलाएं हर वो काम कर सकती हैं जो पुरुष कर सकते हैं. कश्मीरी समाज को अपने लड़कियों के हक के लिए ऐसे फरमानों का विरोध करना चाहिए न कि इनके समाने झुकना चाहिए। अब तो साउदी अरब में भी महिलाओं को हक मिलने लगा है तो यहाँ विरोध क्यों.
shantanu srivastava noida