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कश्मीर, संगीत और विवाद

भारत-प्रशासित जम्मू-कश्मीर में लड़कियों के रॉक बैंड 'प्रगाश' को लेकर हंगामा मचा हुआ है.

इन लड़कियों को धमकियाँ दी गईं और फिर कश्मीर के प्रमुख मुफ़्ती बशीरउद्दीन अहमद ने तो गाने-बजाने को ही 'ग़ैर इस्लामी' करार दे दिया है.

उनके मुताबिक़ लड़कियों के पास जीवन में आगे बढ़ने के दूसरे तरीक़े मौजूद हैं.

लेकिन कुछ लोगों का कहना है कि ये पूरा विवाद मीडिया का उछाला गया है और कश्मीर में संगीत की एक समृद्ध परंपरा रही है.

लेकिन विवाद का नतीज ये हुआ है कि दो लड़कियों ने कहा है कि वो बैंड का हिस्सा नहीं हैं. लड़कियाँ और उनका परिवार बेहद भयभीत है.

आप इस विवाद के बारे में क्या सोचते हैं? क्या गीत संगीत को इस तरह रोकना ठीक है?

मुख्यमंत्री ट्वीट तो कर रहे हैं कि इन धमकियों से डरना नहीं चाहिए लेकिन क्यों उनका प्रशासन लोगों को सुरक्षा का आश्वासन नहीं दे पा रहा है?

प्रकाशित: 2/5/13 9:21 AM GMT

टिप्पणियाँ

टिप्पणियों की संख्या:24

सभी टिप्पणियाँ जैसे जैसे वो आती रहती हैं

Added: 2/14/13 11:03 AM GMT

इस्लाम के बारे मे बोलने से पहले उस का अध्य्यन करना जरूरी है

अब्दुल हादी जोधपुर

Added: 2/13/13 7:47 AM GMT

समाज के प्रत्येक सदस्य को अपने पसंद का काम करने का हक होता है.प्रगाश के खिलाफ फतवा संभवतः रुढिवादी व्याख्या के तहत दिया गया है, जिसमें आजादख्याली का विरोध होता है. मौलानाओं को तुर्की से सबक लेना चाहिए जो इस्लामी देश होने के बावजूद अपनी आधुनिकताबोध के लिए जाना जाता है.महिलाएं हर वो काम कर सकती हैं जो पुरुष कर सकते हैं. कश्मीरी समाज को अपने लड़कियों के हक के लिए ऐसे फरमानों का विरोध करना चाहिए न कि इनके समाने झुकना चाहिए। अब तो साउदी अरब में भी महिलाओं को हक मिलने लगा है तो यहाँ विरोध क्यों.

shantanu srivastava noida

Added: 2/13/13 1:48 AM GMT

ये गलत बात है.

parveen sringar

Added: 2/11/13 8:18 AM GMT

लोग वास्तव में पश्चिमी संस्कृति का विरोध कर रहे हैं.

Raza Rasool Delhi

Added: 2/9/13 12:40 PM GMT

संगीत को राजनीति से दूर करो, क्योंकि संगीत की दुनिया न्यारी दुनिया है.

om siyag jalore

Added: 2/9/13 2:49 AM GMT

इस तरह संगीत को रोकना और कलाकारो को धमकी देना गलत है लेकिन हमे यह भी ध्यान रखना चाहिए कि कश्मीर हमेशा से अशान्त क्षेत्र है लेकिन ताज्जुब की बात यह है कि प्रशासन ने कोई कदम नही उठाया है मुख्यमंत्री जी केवल ट्वीट से काम नही चलेगा इस कदम उठाने होगे क्योकि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और भारत एक लोकतान्त्रिक देश है.

jayantilal sirohi (raj.)

Added: 2/8/13 9:01 PM GMT

इस्लाम में कई सिलसिले हैं और कई शरीयत भी,इसलिए इस्लाम में क्या जायज और क्या नाजायज कहना मुश्किल है. कश्मीर में संगीत की समृद्ध विरासत रही है लेकिन कश्मीर में धार्मिक कट्टरता भी कमर कस रही है.कश्मीर में सरकार और राजनीतिक दलों ने फतवाजारी करनेवालों के खिलाफ कभी भी खुलकर सामने नहीं आए हैं.यही कारण है कि प्रगाश की लड़कियों ने संभावित हमले को ध्यान में रखते हुए बैंड से ही तौबा करने का मन बना लिया है.लेकिन प्रगाश को काले बादल रोक नहीं पाएंगे और आधुनिकता की अंगड़ाई से कश्मीर भी नहीं बच सकता.

रमेश भगत नई दिल्ली

Added: 2/8/13 6:03 PM GMT

इस मसले पर फारुख साहब और महबूबा मुफ्ती को खुल कर बोलना चाहिए.अगर प्रगाश बंद हुआ है और फतवा जारी करने वालों पर कर्रवाई नहीं हुई है तो उमर अबुदुल्ला के लिए यह चुनौती है.शेख साहब के ज़माने में संगीत का सम्मान था.उमर अब्दुल्ला इसे कायम रखें हर मौके पर बेबाक राय रखने वाली शबाना जी और जावेद अख्तर इस मसले पर खुल कर बोलें..प्रगाश बैंड चलाने वाली बेटियों को हमारा सलाम है.

pramodkumar muzaffrpur

Added: 2/8/13 2:34 PM GMT

ये भारत जैसे देश में लोकतंत्र का मजाक है. जिस कश्मीर ने पूरी दुनिया में संगीत में नाम कमाया वहाँ ये मजाक है.

rajesh kumar mishra sri ganganagar

Added: 2/7/13 4:36 PM GMT

संगीत मनोरंजन के साथ-साथ दिल तथा आत्मा शुद्ध रखता है.
संगीत पर किसी प्रकार की रोक मानवता के खिलाफ है,संगीत से किसी धर्म को
किसी प्रकार का कोई नुक्सान नही होता है.बस यह केवल कुछ मानसिक रोगियों की सोच हो सकती है.

Roshan lal Allahabad

Added: 2/7/13 4:36 PM GMT

संगीत मनोरंजन के साथ-साथ दिल तथा आत्मा सुद्ध रखता है.
संगीत पर किसी प्रकार की रोक मानवता के खिलाफ है.संगीत से किसी धर्म को
किसी प्रकार का कोई नुक्सान नही होता है.बस यह केवल कुछ मानसिक रोगियों की सोच हो सकती है.

Roshan lal Allahabad

Added: 2/7/13 4:04 PM GMT

इस प्रकार के फ़तवे आधुनिक युग में इस्लाम की गलत छवि पेश करते है.यह सब पिछङी और संकीर्ण सोच का परिचायक है.

DR. RAJA RAM AGARWAL Fatehabad भारत

Added: 2/7/13 3:59 PM GMT

पता नहीं कौन सा इस्लाम और कौन सी दुनिया पढ़ी और सीखी है इन कुछ नासमझों ने
ये ठीक है की दुनिया सही तरीके से चलने के लिए कुछ पाबंदियां जरूरी हैं पर उनका भी एक दायरा होना चाहिए ऐसे हर बात में टांग अड़ाना ठीक नहीं.इंसान को आजादी और सुकून जीने तो दो,संगीत पर पाबंदी बिलकुल ग़ैरवाजिब है

DEEPAK MISHRA KANPUR

Added: 2/7/13 11:32 AM GMT

जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी और कट्टरपंथी हावी होते जा रहे हैं . मुफ़्ती बशीरउद्दीन अहमद का बयान भी उनकी , आतंकियो को खुश करने की कोशिश का हिस्सा है . कश्मीर सहित दुनिया में कहीं भी संगीत गैर धार्मिक हो ही नही सकता , इस अव्यवहारिक दबाव का समाज को पूरी ताकत से जबाब देना चाहिये .

vivek ranjan shrivastava jabalpur भारत

Added: 2/6/13 9:18 PM GMT

अगर मुखय मनत्री के टुवीट के भरोसे रहे तो अपनी जान पर मुसिबत आफत बुलवाना है.मुसीबत जब आती है तो न तो मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री की सरकार से मदद या हिफाजत की उममीद करना ही बेकार है.एक कशमीर ही नही पूरे भारत की ही यही हालत है.रहा सवाल औरतो का बैंड बजाना कितना भददा मजाक है.

SHABBIR KHANNA RIYADH ( SAUDIA ARABIA )

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