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फाँसी देने की जल्दी में सरकार?

पिछले तीन महीने में हिंदुस्तान में दो लोगों को फाँसी पर लटका दिया गया है. नवंबर में मुंबई हमलों के गुनहगार मोहम्मद आमिर कसाब को फाँसी हुई और अब कश्मीर के अफ़ज़ल गुरू को.
इससे पहले 2004 में कोलकाता के धनंजय चटर्जी को मृत्युदंड दिया गया था.

पर अब खबर है कि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी मृत्युदंड का इंतज़ार कर रहे लोगों की दया याचिकाओं को एक के बाद एक निपटाएँगे.

दिल्ली में हुए सामूहिक बलात्कार की घटना के बाद गठित जिस वर्मा समिति ने अधिकतम सज़ा के रुप में उम्र कैद की वकालत की थी, सरकार ने उस सिफारिश को नकारते हुए दुर्लभतम अपराध में अधिकतम सज़ा फाँसी का प्रावधान कर रही है.

ये सब ऐसे वक्त में हो रहा है, जब दुनियाभर में फाँसी की सज़ा का विरोध बढ़ रहा है और संयुक्त राष्ट्र में मृत्युदंड के खिलाफ़ प्रस्ताव भी पास किया गया है.

मृत्युदंड को लेकर सरकारी रवैये में अचानक आई इस मुस्तैदी के क्या मायने हैं?

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प्रकाशित: 2/15/13 8:45 AM GMT

टिप्पणियाँ

टिप्पणियों की संख्या:25

सभी टिप्पणियाँ जैसे जैसे वो आती रहती हैं

Added: 2/20/13 11:00 AM GMT

राष्ट्रपति भ्रष्टाचारी कांग्रेस की छवि बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. कुल मिलाकर यह सरकार केवल 2014 के चुनाव को लक्ष्य बनाकर काम कर रही है. अगर यह सुधारों के प्रति इतनी ही सजग होती तो लोकपाल बिल के ऊपर इतनी उल्टी-सीधी हरकत नहीं करती. इन सारे संकेतों से साफ़ है कि सरकार केवल भोली-भाली जनता के मन में पैठ बनाना चाहती है और हमारे देश की बिकी हुई पत्रकारिता और न्यूज़ चैनल्स अपनी सरकारी चमचागिरी से यह काम बखूबी निभा रहे हैं. सरकार देश को विकास का विकल्प देने की बजाए वोट बैंक की राजनीति कर रही है.

अमित सिन्हा अबु धाबी संयुक्त अरब अमीरात

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Added: 2/20/13 2:08 AM GMT

Desh ki raksha ke lye koyi samjhota nhi honi chahhiye lekin ek hi tarah ke aarop me dohri niti nhi honi chahiye .Kya Afzal Guru ko dbaw ki policy ke bhaint nhi chadhaya gya agar nhi to fir kyi bomb kando ke aropi Pargyan Thakur wo anye ko sza dene me etna lumba time kyun liya ja rha he ? Insaf me deri vi na insafi he.

Wajeeh Ahmed Tasawwur Saharsa

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Added: 2/19/13 12:41 PM GMT

मुझे नहीं पता कि सरकार अपनी साख बढ़ाने की कोशिश कर रही है या वो क़ानून व्यवस्था को लेकर अचानक से अधिक सजग हो गई है, और लोगों को फांसी देकर इसे साबित करना चाहती है. लेकिन ये साबित हो गया है कि हमारे क़ानून में ऐसी कई कमियां हैं जिसका फायदा कोई भी अभियुक्त उठा सकता है. ज़रूरत है कि हमारे क़ानून में कई तरह के बदलाव किए जाएं. साथ ही किसी भी मामले में फ़ैसला जल्द किया जाए.

Mohammad Nasbulain india

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Added: 2/18/13 5:11 PM GMT

Inko vote chahiye aur kya

sdfsdfs sdfsdfsfd

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Added: 2/18/13 5:07 PM GMT

Govt of India is trying to give an impression by taking quick decisions on the death sentence of convicted person in India, that no body is above Law may it be any person of any religion or from any part of India. It is a very straight and clear message to the anti national elements supported by Pakistan or criminal elements that the blood of innocents will not go waste and rule of Law will prevail.

Arum Gupta UDHAMPUR J&K

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Added: 2/18/13 3:09 PM GMT

फाँसी की सजा पर राष्ट्रपति का तेजी से फैसला करना अच्छा संकेत है। सजा को कम करना या फाँसी देना सरकार के विवेक पर निर्भर करता है। यह सच है कि फाँसी देने से अपराध की प्रवृत्ति पर रोक नहीं लगाई जा सकती। जरूरत है सोच या अपराधिक मनोवृत्ति पर लगाम लगाने की। इसके लिए लंबा समय लगेगा। तब तक फाँसी की सजा बनाये रखना चाहिए। जिन देशों में मौत की सजा पर रोक है उनमें से अधिकांश की एजुकेशन पालिसी अच्छी है। न्यूजीलैंड, नार्वे जैसे देशों में पूरे साल में उतने अपराध नहीं होते जितने दिल्ली में एक दिन में होते हैं।

shantanu srivastava noida भारत

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Added: 2/17/13 7:49 PM GMT

पिछले तीन महीनों में दो अपराधियों को फांसी दिया जाना निश्चय ही प्रशंसनीय कदम है....निश्चय ही कहा जा सकता है कि निज़ाम बदलते ही हुकुमत के रंग बदल जाते हैं| पिछले व वर्तमान राष्ट्रपति में यही बड़ा अंतर रहा है कि जहाँ पिछले राष्ट्रपति ने मृत्युदंड को टालने का प्रयास किया वहीं वर्तमान राष्ट्रपति ने कड़ा कदम उठाते हुए कई अपराधियों के अर्जी को ख़ारिज किया............ यह अत्यंत साहसिक कदम है |
अतः इसे राजनीति से परे रह कर देखना चाहिए क्योंकि यह दो व्यक्तियों के विचारों का अंतर मात्र है |

shyam new delhi

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Added: 2/17/13 5:14 PM GMT

The terrorist who killed innocents need such an action as decided by the highest court of the country. The action of the Govt is only an Implementing agency. Rather they should be punished regurously before hanging.

Shivali Mahajan UDHAMPUR J&K

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Added: 2/17/13 9:34 AM GMT

सरकार की मुश्तैदी के मायने समय को देखते हुए तो राजनैतिक प्रतीत होते हैं. असल में हर जगह से त्रस्त भारत की जनता की मानसिक संतुष्टि के लिए ये मुश्तैदी एक बीच का रास्ता है पूँजीपतियों और जन साधारण - दोनों को खुश रखने के लिए. महँगाई की मार झेल रही जनता को खुश करने के लिए कोई मौद्रिक उपाय करने से पूँजीपतियों के हित आहत होने की संभावना रहती है जबकि इस बहुप्रतीक्षित फाँसी से जनता भी सरकार से खुश है और पूँजीपतियों को भी कोई घाटा नहीं. मतलब साँप भी मर गया और लाठी भी नहीं टूटी.

स्‍वप्‍नेश चौहान नई दिल्‍ली भारत

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Added: 2/16/13 11:05 AM GMT

फांसी दो कोर्ट के फैसले के एक या दो महीने के अंदर ही राष्ट्रपति या गृह मंत्री की संस्तुति बाद दे देनी चाहिए.

jai om mau(up)

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Added: 2/16/13 9:36 AM GMT

मेरे विचार से वो अपराधी जिसके लिए किसी के जीवन का कोई मोल नहीं, जो भीड़ को निशाना बनाते हों, खून से होली खेलते हों, नृशंसता जिनका मकसद हो, ऐसे व्यक्ति को तो फांसी से पहले कुछ कठोरतम दंड और दिया जाना चाहिए. दान सदा सुपात्र को देना चाहिए चाहे वह दया का हो या...वैसे भी हमारे देश में फांसी की सजा बहुत कम होती है. वर्षों तक क्रियान्वित नहीं होती. विलम्ब होना भी ढिलाई है ऐसे मामलों पर तुरंत निर्णय हो, उसको लागू किया जाय. हाँ निष्पक्ष होना चाहिए न्याय.

nishamittal muzaffarnagar (u p)

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Added: 2/16/13 6:13 AM GMT

सरकार के रवैये से साफ़ है कि वो अपनी नरम रुख वाली छवि बदलते हुए दिखना चाहती है. यह सब करके वो बस विपक्ष का मुँह बंद रखना चाहती है. लेकिन अगर न्याय की दृष्टि से देखें तो जिन लोगों फाँसी कि सजा हो चुकी है उनको लंबित रखना भी उचित नहीं था. वर्तमान परिदृश्य में सरकार कानून की नहीं अपनी परवाह ज्यादा कर रही है और कहीं न कहीं वो घोटालों से भी ध्यान बंटाने की कोशिश भी कर रही है और यह सब कुछ एक सोची समझी रणनीति के तहत ही हो रहा है.

Sandeep Mahato Bangalore भारत

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Added: 2/16/13 5:44 AM GMT

सिर्फ़ दो वजह हो सकती है. या तो सरकार अपनी धूमिल होती छवि से परेशान है और लोगों का ध्यान मुख्य मुद्दों से भटकाना चाहती है या फिर हिंदू वोटबैंक को अपने पक्ष में सुरक्षित करना चाह रही है. अगर सरकार की इस फांसी के मामले में कोई भूमिका नहीं तो भगवा आतंकियों की भी ऐसी ही परिणति होनी चाहिए.

MD TAUQUIR JAMAL PURNIA

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Added: 2/16/13 5:30 AM GMT

कांग्रेस केवल अपनी राजनीति कर रही है. 2014 के चुनाव को देखते हुए अब तो लोकपाल बिल भी लाएगी और पास भी करवाएगी.

Sanjeeva kumar yadav Kaptanganj basti utter pardesh

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Added: 2/16/13 4:21 AM GMT

दोनों आरोपियों को पूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद मृत्युदण्ड दिया गया और दोनों को अपनी तरफ से पैरवी करने का मौका दिया गया था. हमें इन फैसलों को राजनीतिक तौर पर नहीं लेना चाहिए. इन दोनों ने भारत की आत्मा को चोट पंहुचाई थी. कानून ने अपना काम किया है, मैं तो उम्मीद करता हूं कि सभी राजनीतिक दल एक होकर एक राय बनाएं ताकि दया याचिका का निपटारा निश्चित समयावधि में हो सके.

jayantilal sirohi (raj.)

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