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छात्र संघ हो राजनीति से दूर?
क्या विश्वविद्यालयों में राजनीतिक पार्टियों का दखल बंद होना चाहिए? कोलकाता के एक कॉलेज में छात्र संघ के चुनाव के दौरान हिंसा में एक पुलिसकर्मी की मौत के बाद राज्य सरकार ने छात्र राजनीति पर लगाम कसने की तैयारी तेज़ कर दी है. पश्चिम बंगाल शिक्षा विभाग ने एक ड्राफ्ट गाइडलाइन तैयार की है जिससे राज्य में छात्र संघ के चुनाव को राजनीति से दूर किया जा सके.
सुझावों के तहत छात्र संघों को राजनीतिक पार्टियों से अलग रखना और चुनाव को दो साल के अंतराल पर कराने की बात कही गई है.
आप क्या सोचते हैं, क्या कॉलेज संघों को राजनीति से दूर करने की कोशिश सही है. इस बार इंडिया बोल इसी विषय पर ...
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प्रकाशित:
2/21/13 8:00 AM GMT
टिप्पणियाँ
टिप्पणियों की संख्या:19
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2/23/13 7:09 AM GMT
छात्रसंघों को राजनीति से अलग रखने की बात बेमानी है, क्योंकि छात्रसंघ लोकतांत्रिक व्यवस्था में भागीदारी का एक दृष्टांत पेश करते हैं जो स्वयं में राजनीति है. हां, उन्हें राजनीतिक दलों की दखलंदाजी से दूर रखा जाना चाहिए. अर्थात् प्रत्याशी खुद को किसी दल से जोड़कर पेश न करें. दलों से जुड़ने का काम वो बाद में स्थानीय, क्षेत्रीय या राष्ट्रीय स्तर पर राजनीति में उतरने पर करें. इसका मतलब यह भी है कि कोई दल चुनाव में आर्थिक या अन्य प्रकार से उनकी सहायता भी न करे.
योगेन्द्र जोशी वाराणसी भारत
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2/23/13 5:37 AM GMT
सुझाव से क्या होता है. ये सुझाव दिखावटी दिखाने के लिए है. हर राजनीतिक पार्टी में जाने की शुरुआत कॉलेज चुनावों से होती है जो आगे चलकर राजनीति में पहुँचती है.
HIMMAT SINGH BHATI jodhpur
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2/23/13 4:57 AM GMT
बिल्कुल दूर होना चाहिए क्योंकि बाहुबल, धन खर्च करने की प्रवृत्ति यहीं से शुरू हो जाती है.
Rabindra Chauhan Barlangfer, Karbi Anglong, Assam
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2/23/13 4:56 AM GMT
बेशक,विश्वविद्यालयों मे होने वाले छात्र संघ चुनावों मे राजनैतिक पार्टियों की दखलंदाजी बंद होनी चाहिए. मुझे लगता है कि छात्र संघ की बजाय अगर छात्र परिषद हो तो कहीं अच्छा है.
रोहित कुमार इलाहाबाद भारत
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2/23/13 3:10 AM GMT
मेरे मतानुसार छात्रसंघ को राजनीति से दूर रखना चाहिए क्योकि कोलेज मे अध्ययन करने वाले छात्रो की उम्र पढाई की होती है और छात्र राजनीति के दौरान जिस तरह से प्रदर्शन करते है और हिंसा पर उतरते है वो निन्दनीय है और इससे हमारी छवि और खराब होती है यदि छात्र संघ हो तो उनको राजनीति से दूर रखना चाहिए.
jayantilal sirohi (raj.)
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2/23/13 12:28 AM GMT
दुनिया के किस हिस्से में आप कॉलेजों में राजनीतिक दलों की उपस्थिति पाएंगे? माता-पिता अपने बच्चों को स्कूल पढ़ने के लिए भेजते हैं ना कि गंदी राजनीति में हिस्सा लेने.
Yogeshwar Sanchihar Hayward
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2/22/13 6:54 PM GMT
इन चुनावों में सुधारों की सख्त जरूरत है. इन्हें राजनीति से दूर रखने की जरूरत है. ये चुनाव बिना किसी डर के होने चाहिए.
Nathmal didel nagaur, rajasthan
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2/22/13 12:46 PM GMT
छात्रसंघ चुनाव राजनीतिक करियर की प्रथम सिद्धि माना जाता है और देश के भावी नेता तैयार करने की पाठशाला. इन चुनाव से कुछ अच्छे निकलते हैं जो देश सेवा का जज्बा रखते हैं. इसलिए चुनाव तो होने चाहिए मगर जेएम लिंगदोह समिति के सुझावों के अनुसार.
Omprakash Godara Nakodesar Bikaner
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2/22/13 10:21 AM GMT
यदि कॉलेज से राजनीतिक पार्टियों की दूरी होगी तो छात्र संघ का मतलब ही क्या होगा?
sarveshsingh hasangaj unnao
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2/22/13 10:08 AM GMT
विश्वविद्यालयों में राजनीतिक पार्टियों का दखल बंद होना चाहिए.
shiv kumar bishnoi bilochawala
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2/22/13 10:02 AM GMT
सही है पढने की जगह छात्र हुडदग करते है माता पिता की कमाई उड़ाते हैं.
shiv kumar bishnoi Bilochawala, Pilibanga भारत
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2/22/13 9:55 AM GMT
विश्वविद्यालयों में राजनीतिक पार्टियों का दखल बंद होना चाहिए.
shiv kumar bishnoi Bilochawala, Pilibanga भारत
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2/22/13 9:52 AM GMT
छात्रसंघ का भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण योगदान रहा है लेकिन पिछले दो तीन दशको में अपराधियों के प्रवेश व राजनीतिक पार्टियों के दखल के चलते अब सिर्फ इसकी बुराईया ही बची है... आज गिनती के विश्वविद्यालयों को छोड़कर सब जगह छात्र संघ में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से गुंडों व माफियाओ का ही कब्ज़ा है... छात्रसंघ चुनावो को राज्य चुनाव आयुक्त की निगरानी में कराया जाना चाहिए.... सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि छात्रसंघ लोकतंत्र की नर्सरी बने ना कि माफियागिरी के प्रशिक्षण केंद्र...
Sumit Kumar Faculty of Law, BHU, Varanasi भारत
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2/22/13 6:18 AM GMT
हमारे हिसाब से कालेज लाइफ मे चुनाव जरूरी है क्योकि यही राजनीति की प्रथम पाठशाला है लेकिन इसकी सुरक्षा व्यवस्था आम चुनाव जैसा होना चाहिए.
vijay Siddharthnagar UP.
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2/22/13 5:50 AM GMT
कालेज परिसरों में हिंसा की घटनाएं??? सर, डॉयचे वेले की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत के कई कॉलेजों में हिंसा की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं. इसके लिए कोई शिक्षा में राजनीति की घुसपैठ को जिम्मेदार ठहराता है तो कोई एकल परिवारों में बच्चों के पालन-पोषण में रहने वाली खामियों को. बिहार, उत्तरप्रदेश, ओड़िशा, तमिलनाडु से लेकर छत्तीसगढ़ तक कोई भी राज्य इस हिंसा से अछूता नहीं है. आखिर कैंपस में क्यों बढ़ रही है हिंसा?
-सुभाष बुड़ावन वाला,18,शांतीना... ,खाचरौद[म्प]
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