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राजनीति और परिवार

काँग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी ने कहा है कि वो विवाह इसलिए नहीं कर रहे क्योंकि अगर उनके बच्चे होंगे तो फिर वो उन्हीं को राजनीति में आगे बढ़ाने में लग जाएँगे.

उनसे पहले गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी कह चुके हैं कि उनका परिवार नहीं है तो उन्हें अपने लिए कुछ करना नहीं है, जो कुछ करना है जनता के लिए.

ऐसा कहकर वो संकेत देना चाहते हैं कि वो भ्रष्टाचार से ऊपर हैं.

तो क्या परिवार स्वच्छ राजनीति की राह में रोड़े अटकाता है?

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प्रकाशित: 3/6/13 11:22 AM GMT

टिप्पणियाँ

टिप्पणियों की संख्या:25

सभी टिप्पणियाँ जैसे जैसे वो आती रहती हैं

Added: 3/10/13 3:37 AM GMT

परिवार का पहले आना अस्वाभाविक नहीं है और गलत भी नहीं है लेकिन राजनेता को देश की जनता को ही अपना परिवार मानना चाहिए.

vivek ranjan shrivastava jabalpur भारत

Added: 3/9/13 5:52 AM GMT

राहुल गांधी की यह राजनीतिक चाल है. यदि वे राजनीति से बदलाव नहीं कर सकते तो फिर अमेठी से सांसद क्यों हैं. आने वाली पीढ़ी की बजाए उनको ख़ुद से शुरुआत करनी चाहिए. यह सब मोदी के सम्तुल्य दिखने की चाल है. लेकिन राहुल गांधी के राजनीतिक सचिव को मालूम होना चाहिए की मोदी एवं राहुल के ब्यक्तित्व के अंतर को भारत की जनता अब समझने लगी है.

ramendra singh mirzapur up

Added: 3/9/13 3:36 AM GMT

परिवार राजनीती कि राह में रोड़ा नहीं बल्कि वो तो सहायक है. उसीकी वजह से आज राहुल गाँधी को इतना ऊँचा पद मिला वर्ना मुझे तो उनमें कोई योग्यता नज़र नहीं आती. आज इसी परिवार कि वजह से कई और राजनीतिपुत्र राजनीति में आने की प्रतीक्षा में हैं. इस वक़्त जो शादी का मुद्दा उठाया गया वो सिर्फ़ नरेंद्र मोदी, अन्ना और रामदेव के मुकाबले के लिए जो कि बिना शादी शुदा हैं. अगर उन्हें अपनी हैसियत देखनी है तो बस अपने नाम से गाँधी हटा दें. सच तो ये है कि बिना फ़ैमिली बैकग्राउंड के राजनीति में आना ही मुश्किल है.

Sandeep Mahato Bangalore भारत

Added: 3/9/13 3:17 AM GMT

ज़िम्मेदारी और सेवा भाव अगर परिवार के प्रति नहीं है तो औरों के लिए इन भावनाओं का होना जंचने वाली बात नहीं लगती है. स्वाभाविक है परिवार होने से परिवार के प्रति ज़िम्मेदारी, कभी-कभी अनावश्यक ज़िम्मेदारी भी निभाना मजबूरी हो जाती है. फिर भी यह व्यक्ति विशेष के स्वभाव पर निर्भर करता है. बिना परिवार वाले भी भ्रष्ट हो सकतें हैं. अतः परिवार स्वच्छ राजनीति की राह में रोड़े तो अटका सकता है लेकिन राह एक दम से बंद नहीं कर सकता जब तक की व्यक्ति विशेष ने स्वयं उस राह पर न चलने की सोच ली हो.

धर्मवीर कुमार पलघट , केरला

Added: 3/8/13 7:18 PM GMT

बहुत सही राहुल जी. अब तो आप सचमुच में सीख गए हैं कि राजनीति में बातें कैसे की जाती हैं.

Yogeshwar Sanchihar Hayward

Added: 3/8/13 2:12 PM GMT

यदि विवाह या परिवार ही भ्रष्टाचार का कारण होते है तो न भाजपा रामराज्य का नारा लगाती और न महात्मा गांधी का नाम इतने आदर से लिया जाता.

Kamal Kumar Joshi Almora, Uttarakhand

Added: 3/8/13 10:23 AM GMT

पिछले दो दिनों में इस पर किसी ने टिप्पणी नहीं की, इसी से साबित होता है कि राहुल के बारे में कोई कुछ नहीं कहना चाहता है. उनको तो इतनी तवज्जो भी नहीं दिया जाना चाहिए. हिंदुस्तान जाग रहा है.

yudhishthir

Added: 3/8/13 8:25 AM GMT

कथित गांधी परिवार ने देश की जनता को मूर्ख और ग़रीब बनाया और जी भर कर लूटा कि सारी हदें पार हो गईं हैं उस पर ये बेतुका ब्यान जले पर नमक है.

Amit Dubey haidrabad

Added: 3/8/13 5:54 AM GMT

अगर ऐसा होता तो क्या राहुल गांधी कॉंग्रेस के उपाध्यक्ष होने के योग्य थे. वहां भी उनसे ज्यादा योग्य लोग हैं लेकिन कॉंग्रेस में एक ही परिवार की चलती है.

raviram Aligarah

Added: 3/8/13 5:36 AM GMT

ये जनता को 'इमोशनल फ़ूल' बनाने का नया फंडा है क्योंकि आज तक इनके परिवार में यही होता आया है और प्रियंका गांधी चुनाव प्रचार में अपने बच्चों को लेकर जाती हैं और उनको देश का भविष्य बताती हैं जो कि उनका दोहरा चरित्र दिखाता है. जहां तक मोदी की बात है तो ये बात समझी जा सकती है कि उनका कोई परिवार नहीं है क्योंकि वो अविवाहित हैं उनके भाई भी राजनीति से दूर रहकर साधारण व्यापार करते हैं.

Anuj Delhi

Added: 3/7/13 2:51 PM GMT

परिवार राजनीति या समाजसेवा में बाधक होता तो न रामराज्य बीजेपी का नारा रहा होता न ही महात्मा गांधी का नाम पूरी दुनिया में इतने आदर के साथ लिया जाता, क्योंकि ये दोनों विवाहित थे और इनके बच्चे भी थे. राहुल को लालबहादुर शास्त्री की ईमानदारी भी याद रखनी चाहिए जो सबसे ईमानदार प्रधानमंत्रियों में गिने जा सकते हैं.

Kamal Kumar Joshi Almora, Uttarakhand

Added: 3/7/13 1:42 PM GMT

राहुल जी को पता होना चाहिए कि देश का युवा अब जाग रहा है. उसे भ्रष्टाचार कौन कर रहा है और काला धन किसके पास है, दोनो पता है. शादी और कुंवारे की राजनीति पुरानी हो चुकी है. अब देश भाषण नही, काम देखना चाहता है.

लक्ष्मी कान्त मणि साँड़ी कलां, सिद्धार्थनगर, यूपी, भारत

Added: 3/7/13 8:37 AM GMT

परेशान वोटर को तो व्यवस्था से केवल त्वरित न्याय की चाह होती है. वोट तो वो अपने हिसाब से ही देता है. गली-मोहल्ले से लेकर दिल्ली तक अलग-अलग टाइप के नेता लोग अपनी कसरतें करते रहते हैं. एक दूसरे को नासमझ समझकर हंसते रहते हैं. कुर्सियों वाले व्यवस्था के बजाए भय-स्वार्थ युक्त चापलूसियों का मनभावन व्यवहार करते रहते है. अतः सामान्य जीवन जीते हुए व्यवस्थाओं की बेहतरी के लिए काम होना चाहिएं

जतीश कोटा

Added: 3/7/13 7:01 AM GMT

कुछ प्रभाव तो परिवार का पड़ता ही है. नेता लोग देशहित की बजाए अपने परिवार की भलाई पर ही ध्यान देने लगते हैं. मगर अपवाद स्वरूप कुछ अच्छे नेता भी होते हैं जो परिवार होने के बावजूद राजनीति के माध्यम से देश का कल्याण करते हैं.

Omprakash Godara Nakodesar Bikaner

Added: 3/7/13 6:19 AM GMT

चेयरपर्सन सिस्टम और वंशवाद का विरोध, सत्ता को ज़हर कहना, ये सारे हथकंडे मुंह में राम बग़ल में छूरी वाली बात है. ये कहने से पहले राहुल गांधी अपने आपको यूपीए और कॉंग्रेस से अलग करें क्योंकि राहुल गांधी जिन विचारों के ख़िलाफ़ हैं उनकी पार्टी के लोग और वो ख़ुद उन विचारों का सदुप्योग कर रहे हैं. सही मायने में इनको देश को संदेश देना है तो कोई ज़िम्मेदारी संभालें और उसमें सफल होकर दिखाएं. उससे भी ज़रूरी है कि मीडिया राहुल गांधी के विचारों को टॉपिक बनाना छोड़ दे.

Rabindra Chauhan, Assam Diphu, Karbi Anglong

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