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बलात्कारियों को सुधरने का मौक़ा?
क्या बलात्कारियों को सुधरने का मौक़ा दिया जाना चाहिए?
फ़िल्म एक्टर राहुल बोस ने कुछ दिन पहले कहा था कि इस बात की पड़ताल की जानी चाहिए कि क्या दिल्ली गैंग-रेप के अभियुक्तों में से किसी के सुधरने की संभावना है. प्रकारांतर से उन्होंने ये सुझाव दिया है कि बलात्कार जैसे अपराध में शामिल लोगों को भी सुधरने का मौक़ा दिया जाना चाहिए. हालाँकि उन्होंने ये भी कहा है कि वो बलात्कारियों के अपराध को कम करने की वकालत नहीं कर रहे हैं.
पर बलात्कारियों के सुधार के बारे में उनके इस सुझाव पर विचार किया जाना चाहिए?
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तो इंतज़ार किस बात का?
प्रकाशित:
3/14/13 7:51 AM GMT
टिप्पणियाँ
टिप्पणियों की संख्या:20
सभी टिप्पणियाँ जैसे जैसे वो आती रहती हैं
Added:
3/16/13 8:17 AM GMT
सुधरने का मौका हम तब दे सकते हैं जब ऐसी गुंजाइश हो... जिसे किसी की इज्जत और जिंदगी की परवाह ही नहीं है... तो ऐसे लोगों के लिए हमदर्दी का कोई मतलब बनता है... भारत में अब तक मौके के नाम पर बहुत कुछ हो गया है... बस अब बहुत हो गया... अब सख्ती से शासन करने की जरूरत है..; इसलिए जो गलत है सो गलत है... उस पर माथापच्ची करने की कोई जरूरत नहीं है... हम अभियुक्त को सुधरने का मौका दे सकते हैं लेकिन अन्य अभियुक्त और भविष्य में इस तरह के अपराध करने वालों को क्या संदेश देते हैं...
Hasan Jawed Kishanganj] Bihar
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Added:
3/16/13 6:54 AM GMT
वैसे तो बलात्कारी छूटने के लायक भी नहीं होते, फिर भी मानवता के नाते सुधरने का एक मौका देना चाहिए. हो सकता है कि पश्चाताब से अपराधी भी संत बन जाए और अपनी गलती की भरपाई समाज की भलाई के लिए कर सके.
Omprakash Godara Nakodesar Bikaner
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Added:
3/16/13 6:06 AM GMT
इन्हें क्या मौका देँ? इन्होँने तो सारी हदे पार कर ली. अब तो सिर्फ 'सजा ए मौत' ही होनी चाहिए.
Somraj bishnoi godara bhakhri Osian, Jodhpur(raj.)
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3/16/13 5:37 AM GMT
हमारे हिसाब से बलात्कारियो को कठोर सजा होनी चाहिए लेकिन इस बात का पूरा ध्यान रखा जाये कि कही रजामंदी से किया गया सेक्स बलात्कार मे परिवर्तित तो नही किया गया है.
Vijay yadav Siddharthnagar
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3/16/13 2:00 AM GMT
भारत की जलवायु से बनकर पला-बढ़ा पुरुष इस पैदायशी बुराई की मानसिकता से केवल शिक्षा-संस्कार द्वारा ही नियन्त्रित हो सकता है. इसके अलावा तो सेक्स का भाव उसकी अतिविकसित बुद्धि को भी जाम कर सकता है. भय,शर्म और क्षणभंगुरता के अहसास के आत्मविकास के साथ ही नारी जाति की सलाह महत्वपूर्ण है क्योंकि नारी निर्माण की मूल भावनात्मक प्रक्रिया भी वही है जो पुरुष की है. मैटेरियल मिक्सिग इक्वेशन्श में ही फर्क है.
जतीश कोटा
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3/15/13 4:49 PM GMT
मैं इनकी बात से सहमत नहीं हूँ.
Gurpreet Singh Frankfurt am Main
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3/15/13 4:03 PM GMT
उत्तर बहुत सरल है , केवल यह अध्ययन किया जाए कि पिछले 20 वर्षों में कितने प्रतिशत अपराधी सुधरे हैं? मेरे पास आंकड़े तो नही है किन्तु मनोविज्ञान के आधार पर मैं कह सकता हूँ कि बलात्कारियों सहित अपराधियो को सुधरने का मौक़ा दिया जाना बहुत लाभकारी नही हो सकता, अधिकांश अपराधी तो जेल से भी अपराध संचालित करते दिखते ही हैं. बलात्कारी भी नारी मात्र को बेहद घटिया मानसिकता से ही देखते हैं.
vivek ranjan shrivastava jabalpur भारत
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3/15/13 3:32 PM GMT
बलात्कारी का पिछला रिकॉर्ड भी देखना होगा. अगर कोई आदतन अपराधी है तो उसे सजा जरूर मिले.पर एक बार बाकी चीजों पर भी गौर करना होगा.
alok kr. singh Gurgaon
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3/15/13 2:20 PM GMT
राहुल बोस की राय ठीक नहीं है. भारत में बलात्कार के मामले दिनों-दिन बढ़ रहे हैं. ऐसे में मेरा सुझाव ये है कि त्वरित कार्रवाई करते हुए दोषिय़ों की गिरफ्तारी, फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई, 100 प्रतिशत मामलों में कार्रवाई सुनिश्चित होना चाहिए. सजा पूरी करने के बद ही सुधरने के अवसर मिलने चाहिए, पहले नहीं.
Kamal Kumar Joshi Almora, Uttarakhand
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3/15/13 12:52 PM GMT
बात सही है पर बङा ही मुश्किल सवाल है. भारतीय जेलों का समाज से कोई रिश्ता नहीँ है जो ऐसा हो सके. सरकार व समाज केवल सजा के बारे में सोचते है. सजा पूरी होने के बाद समाज तिरस्कार करता है तो फिर ये हो नहीँ सकेगा. जैसे अगर कोई 25 साल की उम्र में बेरोजगारी की वजह से अपराध करने पे 10 साल की सजा पाए अगर सुनवाई सजा तुरंत हो तो भी जब वो 35 की उम्र में बाहर आयेगा तो उसे केवल छोङ दिया जायेगा. वो अब अपराध के पहले से बदतर हालत में आ जायेगा. तो मौका देने से कुछ नहीँ होगा. समाज और सरकार को मदद करनी होगी इसके लिए.
Vivek Mishra Lucknow
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Added:
3/15/13 11:08 AM GMT
मैं सबसे पहले सुधरने का मौका देने की वकालत करने वालों से ये सवाल करूँगी कि यदि उनकी बहन या बेटी के साथ कोई ऐसी हरकत करता है तो क्या यही वकालत करता या नहीं?
LALOO PRASAD YADAV LAUKAHI,MADHUBANI
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3/15/13 7:30 AM GMT
राहुल बोस की राय बकवास है. बलात्कारियों को कानून सम्मत सजा दी जानी चाहिए. फिल्मों से बलात्कार के सीन पूरी तरह से हटाये जाने चाहिए. राहुल बोस यह सलाह क्यों नहीं देते?
pramodkumar muzaffrpur
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Added:
3/15/13 5:31 AM GMT
अंगुलिमाल बहुत कम ही मिलते हैं. लोग अपने किए पर कितना पछताते ही हैं-ऐसा मानकर किसी को सुधरने का मौका नहीं दिया जा सकता. बलात्कारी व्यक्ति अगर खुद भी सुधर जाए तो उससे समाज को क्या फायदा होगा? जो लोग ऐसे अपराध करते हैं उनपर इसका क्या सकारात्मक फर्क पड़ेगा? क्या पीड़िता की मान-मर्यादा लौट सकती है? कुछ विकसित देशों के उदहारणो के आधार पर सज़ा की कठोरता को अपराध के लिए जिम्मेवार नहीं ठहराया जा सकता. सज़ा के साथ-साथ भी सुधरने का विकल्प तो रहता ही है.
अमित भारतीय जालौन (उo प्रo) भारत
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3/15/13 5:26 AM GMT
इंसान को ऐसी गलती पर सुधरने का मौका दिया जाना चाहिये जो उसने मजबुरी ओर हालात मे गलती करता है. लेकिन किसी के साथ बलात्कार करना ना कोई मजबूरी नही होती है बल्कि वहशीपन की पहचान है. ऐसी गलती पर श्री राहुल बोस की अपनी बेतुकी राय ओर बाद मे बीबीसी ने इस मुदे पर बहस लगता है दोनो का ही दिमाग का दिवाला निकल चुका है.
SHABBIR KHANNA RIYADH ( SAUDIA ARABIA )
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3/14/13 10:12 PM GMT
बिल्कुल नहीं. बलात्कारियों को सुधरने का मौका बिल्कुल नहीं मिलतना चाहिए क्योंकि ऐसे लोग मानसिक रूप से कुंठित होते हैं.
ashish yadav hyderabad
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