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इस बहस को सहेज कर रख लिया गया है – जवाब देने की अनुमति नहीं है

राहुल बनाम मोदी

गुरुवार चार अप्रैल को भारतीय बिजनेस समूह सीआईआई के सामने अपने पहले भाषण में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी ने कहा कि ये सोचना गलत होगा कि सफेद घोड़े पर सवार कोई व्यक्ति इस देश की समस्याओं का समाधान कर देगा.

भारतीय जनता पार्टी ने राहुल गांधी के भाषण पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राहुल 'मोदीफ़ोबिया' से ग्रसित हैं यानी राहुल गांधी मोदी से डरते हैं.

पिछले कुछ दिनों में मीडिया में ऐसी ख़बरें आती रहीं हैं कि 2014 में होने वाले आम चुनाव में राहुल गांधी और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच सीधा मुक़ाबला होगा. सीआईआई में राहुल के भाषण के बाद राहुल बनाम मोदी की बहस ने और ज़ोर पकड़ लिया.

लेकिन इस बारे में क्या सोचते हैं आप. आप हमें अपनी राय भी लिख सकते हैं और बीबीसी के फ़ेसबुक पन्ने पर भी अपनी राय दे सकते हैं.

प्रकाशित: 4/6/13 8:16 AM GMT

टिप्पणियाँ

टिप्पणियों की संख्या:6

सभी टिप्पणियाँ जैसे जैसे वो आती रहती हैं

Added: 4/6/13 9:58 AM GMT

श्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात की राजव्यवस्था और अर्थव्यवस्था में अपनी योग्यता को साबित किया है, ये सभी ने देखा है. ज़ाहिर है यदि 2014 के चुनाव में राहुल गाँधी और नरेंद्र मोदी, इन दोनों चेहरों को आमने-सामने रखा जाए तो नरेंद्र मोदी का पक्ष अधिक मज़बूत दिखाई दता है.

Nitin Chandravanshi Bareilly भारत

Added: 4/6/13 9:36 AM GMT

भारतीय उद्योग परिसंघ को राहुल गांधी ने संबोधित कर आगामी लोकसभा चुनाव का बिगुल फूंक दिया है. नरेंद्र मोदी ने जिस प्रकार छात्रों को संबोधित किया, ठीक उसी प्रकार राहुल गांधी ने सभा को संबोधित कर यह जता दिया कि वे भी किसी से कम नहीं रहने वाले.पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी का जादू ज्यादा नहीं देखा गया. लोकसभा चुनाव में वो जादू दिख जाएगा, मुझे इसमें शक है. यह बात तो स्पष्ट है कि राहुल से ज्यादा नरेंद्र मोदी एक प्रभावशाली नेता बनकर उभरे हैं और ज्यादा सफलता मोदी ही पाने वाले हैं.

sonu kumar suman Khagaria (Bihar)

Added: 4/6/13 9:15 AM GMT

राहुल गांधी डरे हुए तो लग रहे थे लेकिन उन्हें डरना नहीं चाहिए क्योंकि मोदी का विरोध तो एनडीए के अंदर ही हो रहा है. गुजरात में कमज़ोर लोकायुक्त लाने से उनकी छवि और ख़राब हो गई है.

Kundan Kumar Coimbatore

Added: 4/6/13 9:12 AM GMT

बिहार और उत्तरप्रदेश में राहुल गाँधी फेल हो गए. उनके दल के प्रत्याशी पराजय के सदमे से अभी तक नहीं उबरे हैं और लोक सभा चुनाव सामने आ गया है.बिहार में नीतीश कुमार अंगद की तरह पैर जमाए हुए हैं. उत्तरप्रदेश में मुलायम सिंह यादव की सीटें घटेंगी इसकी उम्मीद नहीं दिखती. सपा एक वर्ष से लोक सभा चुनाव का तगड़ा अभ्यास कर रही है. हिंदी पट्टी में वोटरों के बीच असली मुक़ाबला होगा. राहुल सीआईआई के सहारे वोट बटोरेंगे? जबकि जनता जनार्दन ही असली फ़ैसला करेगी.

pramodkumar muzaffrpur

Added: 4/6/13 9:05 AM GMT

ये देश का दुर्भाग्य है कि तथाकथित गांधी के शिष्य, देश के भावी नेता फिक्की एसोचैम और सीआईआई के मंचों पर पैदा हो रहें हैं. मोदी चमक-दमक से मध्यमवर्ग को लुभाना चाहते हैं, तो राहुल को वो समाजवाद याद आरहा है जो 91 में ही खूंटी पर टांग दिया गया. दुनिया में एक भी ऐसा देश नहीं है जहां कॉरपोरेट्स से राहुल/मनमोहन/मोदी वाला समाजवाद आया हो लेकिन फिर भी उद्योगपतियोँ पर भरोसा और उनकी माया तो देखिए कि मोदी और राहुल एक दूसरे को कोसते हुए 'गुलाबी' समाजवाद लाने को बेताब हैं.

अमित भारतीय जालौन (उo प्रo) भारत

Added: 4/6/13 8:54 AM GMT

अगर 2014 के चुनाव मे श्री मोदी बनाम राहुल हुआ तो 99% श्री मोदी का पलड़ा भारी रहेगा. जिसके श्री मोदी हक़दार भी हैं.कयोंकि सचचाई यह है कि आज़ादी से लेकर आज तक कांग्रेस ने भारत का भट्टा बिठाने का काम किया है. अगर बीजेपी ने अगले चुनावों मे श्री मोदी को देश के नेता के रूप मे पेश किया तो सत्ता में आने से बीजेपी को कोई भी नही रोक सकता है. श्री मोदी भारतीय हिंदू समाज के प्रति दिवगत शिव सेना प्रमुख बाल ठाकरे से भी बेहतर नेता हैं.जिसका उदाहरण महान गुजरात है.श्री राहुल की बदक़िस्मती है कि कांग्रेस की नाव को डूबते हुए बचा नही सकेंगे.

SHABBIR KHANNA RIYADH ( SAUDIA ARABIA )

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