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सोशल मीडिया और चुनाव

एक अध्ययन में कहा गया है कि 2014 के आम चुनाव में 160 संसदीय सीटों के नतीजों पर सोशल मीडिया का इस्तेमाल करनेवाले लोगों का असर हो सकता है.

कहने का तात्पर्य ये कि भारत की 543 लोकसभा सीटों में से 160 सीटें ऐसी हैं जिनके नतीजों पर सोशल मीडिया का प्रभाव हो सकता है.

'सोशल मीडिया एंड लोकसभा इलेक्शन्स' शीर्षक से प्रकाशित ये अध्ययन किया है 'आरआईएस नॉलेज फाउंडेशन' और 'इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया' ने.

इस अध्ययन में सोशल मीडिया के प्रभाव के आधार पर संसदीय क्षेत्रों को उच्च, मध्यम और निम्न प्रभाव वाली श्रेणियों में बांटा गया है.

अध्ययन के मुताबिक वैसे संसदीय क्षेत्र जहां फेसबुक यूज़र्स की संख्या कुल मतदाताओं की दस फीसदी से ज्यादा है, उसे उच्च प्रभाव वाला क्षेत्र माना गया है.

इसी आधार पर अध्ययन में 543 में से 67 संसदीय क्षेत्रों को मध्यम और 60 सीटों को निम्न प्रभाव वाली सीटें बताया गया है.

क्या सोशल मीडिया का भारतीय आम चुनाव के नतीजों पर इतना असर हो सकता है?

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प्रकाशित: 4/13/13 1:52 AM GMT

टिप्पणियाँ

टिप्पणियों की संख्या:8

सभी टिप्पणियाँ जैसे जैसे वो आती रहती हैं

Added: 4/13/13 1:49 PM GMT

सोशल मीडिया की पहुँच अभी भी अत्यंत सीमित है. सिर्फ मैट्रो शहरों और कुछ चुनींदा शहरों में ही इसकी पहुँच है. इन क्षेत्रों में भी इनकी पहुँच कितनी है, लोग कितना समय देते हैं और इस पर कितना यकीन करते हैं, चर्चा का विषय है. वैसे भी धारणा है कि इनमें से अधिकांश लोग वोटिंग करने जाते ही नहीं हैं. सोशल मीडिया अभी इतना शक्तिशाली नहीं हुआ है कि तीस चालीस सीटों के नतीजों को प्रभावित कर दे. फेसबुक पर भी अधिकांश लोग राजनीतिक मुद्दों से दूरी ही बनाकर रखते हैं.

shantanu srivastava noida भारत

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Added: 4/13/13 1:34 PM GMT

सोशल मीडिया अब काफी मजबूत और मुखर होती जा रही है.सभी लोग अपने विचार स्वतंत्र तरीके से बाँट रहे है.अब नेताओं का चरित्र चित्रण बिकाऊ और बाजारू मीडिया ही नही करती.सोशल साइटों के माध्यम से आम लोग भी मीडिया की भूमिका मे है.देश के चुनाव मे इस बार इसका प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों रूप से काफी प्रभाव होगा.

लक्ष्मी कान्त मणि साँड़ी कलां, सिद्धार्थनगर, यूपी, भारत

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Added: 4/13/13 10:22 AM GMT

सोशल मीडिया अगले चुनाव में बेहद महत्वपूर्ण रहेगा, इस बात की पता इसी से लग जाता है कि मंत्री, प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रपति सभी फेसबुक, ट्विटर या अन्य वेब साइट पर आ गए हैं.

yashwant kothari jaipur

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Added: 4/13/13 9:34 AM GMT

मैं मानता हूँ कि अगले लोकसभा चुनाव में सोशल मीडिया एक निर्णायक भूमिका निभाएगी.जो भी पार्टी इस माध्यम को अनदेखा करने की कोशिश करेगी उन्हे इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा. पिछले दो तीन सालों मैं विश्व के कई देशों ने इस माध्यम की ताकत देखी है, वो चाहे मिस्र हो या ट्यूनीशिया या फिर और कोई देश.यहाँ तक कि चीन जैसे राष्ट्र में भी इसकी की धमक सुनाई देने लगी है जहां अभिव्यक्ति की आजादी जनता के पास तो है ही नहीं.
इसलिए मेरा मानना है की 2014 मैं हमें इस माध्यम की शक्ति का एहसास होगा.

AWKASH KUMAR SINGH GUAGACHHI (KATIHAR)

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Added: 4/13/13 8:51 AM GMT

अगर 160 सीटों पर सोसल मीडिया की भूमिका हुई तो लोकतंत्र के लिए यह सुखद संदेश है.इन सीटों पर दागदार चेहरों के लिए सोशल मीडिया चुनौती बनकर खड़ी होगी.2014 के चुनाव में मनमोहन सिंह सरकार की वापसी सोशल मीडिया की पराजय होगी.

pramodkumar muzaffrpur

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Added: 4/13/13 7:34 AM GMT

आज के साक्षर भारत मेँ हर एक व्यक्ति सोशल मीडिया का उपयोग करता है। ऐसे में 2014के चुनाव में इसका खूब उपयोग होगा.

Somraj godara bishnoi bhakhri Osian, Jodhpur(raj.)

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Added: 4/13/13 4:58 AM GMT

सोशल मीडिया की मानी जाए तो अन्ना देश के राष्ट्रपति होते, केजरीवाल/मोदी प्रधानमंत्री, सोनिया के साथ दिग्विजय को निर्वासित कर दिया जाता, कलमाड़ी/राजा को कालापानी की सज़ा मिल जाती, लोकपाल कब का आ चुका होता, भ्रष्ट जेल में होते, रिटेल में विदेशी निवेश को मंजूरी न मिलती.
महज 11% इंटरनेट उपयोगकार्ता, सोशल मीडिया पर क्रांति चाहने वालों को वोट डालने में गर्मी/सर्दी लगती है. उनकी नज़र में एक वोट से थोड़ी न देश बदलता है.2009
लोस चुनाव में 50% से अधिक ने मतदान नहीँ किया जिसमें अधिकतम उच्च और मध्य वर्ग का फेसबुकी समाज था

अमित भारतीय जालौन (उo प्रo) भारत

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Added: 4/13/13 4:31 AM GMT

भारत की जनता वर्तमान सरकार की नीतियों से बेहद दुखी है. ये सरकार मंहगाई कम कर नही पा रही है. भारत की जनता नही चाहती कि ये सरकार वापस आए.विकल्प की तलाश में वो बदलाव चाहती है. आगामी चुनाव पर इसका प्रभाव पड़ेगा.

himmat singh bhati jodhpur

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