इस बहस को सहेज कर रख लिया गया है – जवाब देने की अनुमति नहीं है

भारत में भूख के आँकड़े

कई अलग अलग अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में कहा गया कि भारत में भूख से परेशान लोगों की संख्या चौंका देने वाली हद तक बढ़ चुकी है.

भारत के कई राज्यों में स्थिति चिंताजनक है और मध्यप्रदेश में तो यह अति चिंताजनक बन चुकी है.

इसके कई कारण गिनाए जा सकते हैं जिनमें सूखा और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाएँ तो हैं ही, खाद्यान्न की बढ़ती क़ीमतें भी बहुत से लोगों की पहुँच से बाहर हैं.

आप इस विषय में क्या कहना चाहेंगे? इस विपदा से निपटने की ज़िम्मेदारी सिर्फ़ सरकारों की ही है या आम जनता भी इसमें अपना योगदान दे सकती है? भूख से बेहाल लोगों की सुध लेने वाला क्या कोई नहीं है?

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प्रकाशित: 10/17/08 10:57 AM GMT

टिप्पणियाँ

टिप्पणियों की संख्या:30

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Added: 10/24/08 12:25 PM GMT

गरीबी और भुखमरी से निपटने के लिए सरकार के साथ आम जनता को मिलकर काम करना होगा. तभी यह समस्या से हम निपट पाएँगे.

umesh jha delhi भारत

Added: 10/22/08 10:07 PM GMT

प्रश्न यह है मनमोहन सिंह वही तो नहीं कर रहे जरदारी के साथ जो गाँधी जी ने कायदेआज़म जिन्ना अली जी के साथ किया था 1947 में .कभी जरदारी को अमरीका औऱ अब चीन में . भारत ने 1500 सौ करोङ महाप्रयोग में दिया नेताऔं का की समझ में भूख के आँकङे कहाँ चले गये थे चंद्र यान तो रवाना हो गया धरती एक बच्चे को नहीं बचा सके 50 फीट के गड्डे में से। विशेषतया विदेशों में रहने वाले यहसब पढ़ सुन कर बौखला जाते हैं सहायता भी नहीं पहुँच पाती

काकी

Added: 10/22/08 5:44 PM GMT

भारत में भुखमरी हटाने में सरकार को सक्रिय भूमिका निभाना चाहिए. सामान्य जन भी इसमें सहयोग कर सकते हैं. भुखमरी दूर करना बिलकुल संभव है लेकिन सरकारी ब्यवस्था से चोरी और भ्रष्टाचार मिटाना होगा.

उमेश यादव न्यूयार्क अमरीका

Added: 10/22/08 8:17 AM GMT

भारत के भूख के आँकङे चन्द्र यान की सवारी पर
और मनमोहन सिंह जी
चीन जापान की यात्रा
मिलन मिलाप करने गये हैं
जरदारी की यारी पर

काकी

Added: 10/21/08 5:12 PM GMT

कौन कहता है कि भारत ग़रीब देश है. वह देश कभी ग़रीब हो नहीं सकता जिस देश में मांगने वाले भी गाड़ी में घूमते हैं.

Satnam Singh

Added: 10/21/08 4:34 PM GMT

भारत जैसे जनसंख्या संक्रमण वाले देश में जनघनत्व का अधिक होना भी भुखमरी का एक कारण है. इसके साथ ही साथ सरकार नियोजित प्रयास नहीं कर पा रही है.

uma kant varanasi भारत

Added: 10/21/08 12:05 PM GMT

मेरा मानना है कि जब तक समस्या की तह तक नहीं पहुँचा जाएगा और पार्टी लाइन से उठ कर हमारे तमाम नेतागण एक मंच पर नहीं आएँगे तब तक यह दास्तानें मीडिया के लिए टीआरपी बढ़ाने का ज़रिया और नेताओं के लिए वोट मांगने का ब्रह्मास्त्र ही बना रहेगा.

azadashish purnea

Added: 10/20/08 1:34 PM GMT

भारत मे भूख से मरने वालों की संख्या बढ़ने से चिंताजनक स्थिति पैदा हुई, यह भारत के लिए बहुत दुर्भाग्य की बात है. इस समस्या पर सरकार को गंभीरता से सोचना होगा. सरकार के साथ-साथ देश की समाजिक संस्था को भी अब आगे आना होगा. इस गंभीर समस्या के लिए पूरे देश में आंदोलन की जरुरत है

राहुल शुकला, देवरिया,भारत

Added: 10/20/08 11:26 AM GMT

भारत मं भूख की जो स्थिति ह वो बेहद चिंताजनक है लेकिन यहां हर चीज पर राजनीति होती है चाहे वो भूख हो या फिर आतंकवाद या फिर विकास का मुद्दा. लेकिन हम आम लोग इन सब को लेकर क्या सोचते हैं ये भी ज्यादा जरुरी है, क्योंक अगर ये अवाम खुद को जागरूक बनाए तो हम अपने आस-पास के लोगों की मदद तो कर ही सकते हैं.

ritesh kumarम hyderabad, andhra pradesh(india)

Added: 10/20/08 11:15 AM GMT

भले ही खाद्य पदार्थों के वितरण का जिम्मा केंद्र और राज्य सरकार का हो लेकिन आम आदमियों को भी इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए. तभी जा कर समस्या से निजात मिलेगी.

vikas gupta narela

Added: 10/20/08 5:43 AM GMT

यह ऐसी बात है जिसका फैसला करने योग्‍य मैं नहीं हूं, लेकिन इस बात का असली पता उस दिन चलेगा कि जिस दिन हमारे सरमायेदारों और हुकुमरानों के बच्‍चे या वो खुद भूख से इस कद्र बिलबिलाएंगे. क्‍योंकि कमी तो किसी भी चीज की नहीं है सिवाय इच्‍छा शक्‍ति की.

राहुल नजीबाबाद

Added: 10/20/08 5:25 AM GMT

गरीबों का हक, उनका राशन व सरकारी राहत सामग्री आदि को भरे पेट वाले तथाकथित 'दबंग' लोग सदियों से 'डकारते' आए हैं व कुछ अंतर के साथ आज भी 'डकार' रहे हैं! भूखे लोग भय के कारण भृष्टाचार का मुकाबला नहीं कर पाते हैं. ऊँची पहुँच वाले अमीर अपराधी कानून का दुरुपयोग करके गरीबों को और अधिक गरीब,पीड़ित व असहाय बना रहे हैं! भय, भूख व भृष्टाचार का मेल एक कड़ुआ सच न होता तो हम भी अमरिका-इंग्लैण्ड की तरह होते.

सिद्धार्थ कौसलायन आर्य ग्रेटर नौएडा-भारत

Added: 10/18/08 9:29 AM GMT

आज मुद्दों पर व्यक्तित्व हावी हो गया है.20 करोड़ भूखे लोगों की बाते न होकर सोनिया,माया और सचिन की बाते हो रही है.मीडिया और नेता इसे हाशिए पर भी जगह नही दे पा रहे है.चैनल वाले दिन भर सोनिया और माया की तकरार,सचिन का रिकॉर्ड दिखा रहे है.भूख का रिकॉर्ड न कोई दिखा रहा है और न ग़रीबी का समाधान बता रहा है. बड़े लोग ग़रीबों का हक़ छीनकर ही बड़े हुए है.अगर लाभ का सही बँटवारा हो तो दुनिया में ग़रीबी न रह जाए. अब अपना हक़ छीनने की ज़रूरत है.

दिवाकर मणि त्रिपाठी सिद्धार्थनगर,यूपी. भारत

Added: 10/18/08 3:59 AM GMT

क्षमा करना पाठकगण और बीबीसी समाचार केंद्र. एक ही बात कहा है उन विलासी राजनेताओं ने कि भारत में इतनी क्षमता है कि विश्व को खिला सकता है तो आज भारत के लोग क्यों भूख से तड़प रहे हैं. क्या वह क्षमता नेताओं में सिमट कर रह गई है?

काकी

Added: 10/17/08 9:02 PM GMT

निष्ठा लेख अच्छा है. साथ ही ऐसे लेख पहले भी पढ़ चुका हूँ. यह आपकी भूख है या गिद्ध दृष्टि. समय मिले तो सोचिएगा. वैसे हम लोग भी तो धीरे-धीरे ही सही आत्महत्या कर ही रहे हैं.

akhilesh kumar new delhi

बीबीसी को जानिए

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