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आर्थिक मंदी और आपकी ज़िदगी

पिछले एक साल की आर्थिक मंदी ने भारत समेत दुनिया भर में लोगों का जीवन बदल कर रख दिया. हंसते खेलते परिवारों को मानो ग्रहण लग गया. नौकरियां गई, घर छिन गए, सालों से संजोए सपने मानो पल भर में बिखर गए.

आपका अनुभव कैसा रहा? क्या आप मंदी के साए से बच पाए? या फिर आप की ज़िंदगी भी हुई उलट-पलट? अगर आप विदेश में नौकरी कर रहे थे तो क्या आपको नौकरी छोड़ कर वापस आना पड़ा?

मंदी के एक साल पूरे होने पर बीबीसी एक विशेष श्रृंखला प्रस्तुत कर रही है. अपने अनुभव हमें लिख भेजिए और हम उन्हें इस श्रृंखला का हिस्सा बनाएंगे.

प्रकाशित: 9/7/09 6:21 AM GMT

टिप्पणियाँ

टिप्पणियों की संख्या:31

सभी टिप्पणियाँ जैसे जैसे वो आती रहती हैं

Added: 9/20/09 4:50 PM GMT

मंदी का असर पूरी दुनिया में अलग-अलग तरह हुआ है, जंहा तक भारत का सवाल है मंदी का यहां भी प्रभाव रहा.

f

Added: 9/17/09 9:20 AM GMT

मुझे लगता है कि मंदी के कारण पिछले एक साल मेरे जीवन के सबसे बुरे दिन थे. मैं भागलपुर के इंजीनियरिंग कालेज से इंजीनियरिंग कर रहा हूँ. तीन साल पहले इंफ़ोसिस और सत्यम जैसी कंपनियाँ हमारे कालेज में कैंपस सलेक्शन के लिए आती थीं. लेकिन पिछले साल से कोई कंपनी नहीं आई है. इससे मुझे तनाव हो गया है. मैं अपने परिवार का अकले आसरा हूँ लेकिन मैं देख रहा हूँ कि बुरा समय अभी भी जारी और हम अच्छे समय के बारे में नहीं सोच सकते हैं.

nitish bhagalpur , bihar

Added: 9/15/09 10:15 AM GMT

हालात इतने बुरे नहीं है...
जितने दिखाए जा रहे है...
ये सच है की सारी दुनिया में मंदी है..
और हम लोग भी उसी दुनिया का हिस्सा है
सब से ज्यादा वो लोग प्रभावित हुए, जिन्होंने अपनी चादर से बाहर पैर पसार लिए...
अमेरिका इस का सब से बड़ा उदाहरण है...
भारत में उद्योगपतियों ने मौके का नाजायज़ फायदा उठा कर बहुत से लायक लोगों को भी निकल दिया...
गीदड़ आया, गीदड़ आया.. कह कर भाग गए....

Anurag Gautam chandigarh भारत

Added: 9/14/09 10:43 AM GMT

मंदी पूरी दुनिया में है और भारत उस से अछूता नहीं रह सकता लेकिन सब से बड़ा सच यह है कि जितने लोगों को नौकरी से निकल दिया गया, उसमें से बहुत कम वास्तव में मंदी के शिकार थे.वे लोग भी निकल दिए गए, कंपनियों ने देर से ही लोगों को निकलना शुरू कर दिया. जो कंपनियाँ हर साल हज़ारों लोगों को रखती थीं, उन्होंने फूंक-फूंक कर क़दम रखना शुरू कर दिया. इसका परिणाम यह हुआ कि हज़ारों लोगों की नौकरी चली गई.

Anurag Gautam chandigarh भारत

Added: 9/14/09 5:28 AM GMT

क्रेडिट क्रंच तभी आता है जब चरित्र में क्रंच आता है. उधार लेकर घी पीने का दर्शन लेकर चलने वालों को यह परिणाम तो भुगतना ही था. वह चाहे अमरीका के अमीर हों या जापान के या फिर भारत के. यह अलग बात है कि गेहूं के साथ घुन भी पिसता है, जिस कारण भारत के ग़रीबों पर भी प्रभाव पड़ा है. वैसे भारत की 70 फ़ीसीद जनता आज़ादी के समय से ही बस जीने के लिए जी रही है. उनके लिए मंदी शब्द उनके जख़्मों पर नमक डालने जैसा है.

ashutosh kumar new delhi

Added: 9/12/09 6:48 PM GMT

हाँ ये सच है कि मंदी के चलते आईटी क्षेत्र पर बुरा असर पड़ा है. बहुत सारी कंपनियाँ बंद हो गई हैं. दूसरी जॉब नहीं मिल रही है और जो लोग नौकरी कर रहे हैं उनका वेतन काटा गया है या फिर बढ़ाया नहीं गया है, जबकि साल में एक बार वेतन बढ़ाया जाता है.

Anil kumar Delhi

Added: 9/12/09 11:37 AM GMT

ये आर्थिक संकट अमरीका और यूरोप ने मीडिया और इंटरनेट के माध्यम से पैदा किया है और हम लोग इससे प्रभावित हो रहे हैं. अगर नैसडैक गिरता है तो फिर भारतीय बाज़ार गिरता है, आख़िर ऐसा क्यों होता है तो मेरा जवाब है इसका कारण सिर्फ़ मीडिया और इंटरनेट है. जिसपर उनका क़ब्ज़ा है.

Mohammad Shahid Riyadh

Added: 9/12/09 5:12 AM GMT

मंदी, मंदी हर तरफ़ मंदी का बहाना कर लोगों को नौकरी से निकाला जा रहा है, हालाँकि मंदी का असर भारत में नहीं है फिर भी नौकरी के लाले पड़े हैं. पत्रकारिता जगत में तो बिल्कुल ही भर्ती बंद है, कहा जा रहा है कि मंदी में काम मिलना असंभव है. पत्रकारिता के मैदान में क़दम रखने वाले नए चैनल इंटर्न से काम चला रहे हैं. स्थिति ऐसी है कि कई छात्र सालों से न्यूज़ चैनल में काम कर रहे हैं लेकिन उन्हें यह कह कर निकाल दिया जाता है कि मंदी है.

dilip kumar new delhi

Added: 9/11/09 5:38 AM GMT

भारत में मंदी का असर बहुत अधिक नहीं है, लेकिन कुछ कंपनी उसका फ़ायदा ज़रूर उठा रहे हैं. अगर उन्हें ख़र्च कम करने हैं तो मंदी के नाम पर काम करने वाले को निकाल देते हैं.

Kalpesh Vadodara

Added: 9/10/09 9:56 AM GMT

आर्थिक मंदी के कारण मैं अपनी नौकरी गँवा चुका हूँ और तब से मेरे पास नौकरी नहीं है.मैं इंजीनियरिगं में डिप्लोमा हूँ,लेकिन कोई भी कंपनी नौकरी देने को तैयार नहीं है. मैंने एक साल पहले जो घर ख़रीदा था उसे बेच दिया है. मुझ पर बहुत बड़ा क़र्ज़ है जिसे चुकाने में मैं अक्षम हूँ. मैं ठाणे में एक छोटे से रूम में रहता हूँ, जो किराय पर है. पिछले सात महीने से पिता ख़र्च दे रहे हैं जबकि मैं एक 10 महीने लड़की का पिता भी हूँ.

Shailendra Juvekar Mumbai

Added: 9/10/09 6:45 AM GMT

आर्थिक मंदी का भारत में वैसे तो उतना असर देखने को नहीं मिलता है लेकिन मैं और मेरा परिवार ज़रूर मंदी की मार झेल रहे हैं. दरअसल मैं मुंबई में एक स्थानीय टेलीविज़न में काम करता था लेकिन एक साल पहले विज्ञापन नहीं मिलने के कारण चैनल बंद हो गया और मैं तभी से बेरोज़गार हूँ और आजतक कहीं काम नहीं मिला. जिस भी चैनल में जाता हूँ वहाँ ये जवाब मिलता है कि फ़िलहाल मंदी और स्टाफ़ नहीं रख रहे हैं.

B N Giri Mumbai

Added: 9/9/09 7:01 AM GMT

आर्थिक मंदी की चपेट में मुझे नौकरी नहीं मिल पाई. आईटी क्षेत्र से होने के कारण कह सकता हूं कि सत्यम जैसी कंपनी जैसे काम ने सच में भारत को मंदी की ओर धकेल दिया. फिर भी भारत की स्थिति बेहतर है. कुछ नेता एक दिन का किराया एक लाख रूपए ख़र्च करेंगे तो हम कभी इस संकट से उबर नहीं पाएंगे. भारत में कौन कितना ख़र्च कर रहा है किस के पास कितना काला धन है उसे सामने लाया जाना चाहिए.

Prakash Choudhary Darbhanga

Added: 9/9/09 6:57 AM GMT

ग्लोबलाइज़ेशन में शामिल होने के कारण ही विश्व व्यापी आर्थिक मंदी का असर हम पर पड़ा है. भारत एक कृषि प्रधान देश है इसी लिए तबाह होने से बच गया. आर्थिक मंदी के कारण भारत में बेरोज़गारी चरम सीमा पर पहुंच गई है, दूर दूर तक कोई रोज़गार नज़र नहीं आता. उद्योग पर अधिक ध्यान देने के कारण औद्योगिक वस्तु पर ही आर्थिक मंदी आई है. अगर उद्योग के स्थान पर कृषि पर ध्यान दिया जाता तो न तो महंगाई बढ़ती न खाद्यान बाहर से मंगाने पड़ते.

dharmpal saini roorkee

Added: 9/9/09 5:06 AM GMT

आपने मंदी की बात कही. भारत कृषि प्रधान देश है. मेरा मानना है कि मंदी का असर भारत की जनता पर पड़ा. लोगों ने एक वक़्त खाना शुरू कर दिया, अपने रोज़-मर्रा के ख़र्चे कम कर दिए. भारत में ग़रीबों का जीना दिन प्रति दिन मुश्किल होता जा रहा है. अमीर और अमीर हो रहा है. सरकार जनता से 365 टैक्स लेती है और बदले में क्या देती है, ये पूरी दुनिया को पता है. लेकिन इस मंदी के दौर में देश के नेताओं ने अपने रोज़-मर्रा के ख़र्च में कोई कमी नहीं की है.

raza husain lucknow

Added: 9/8/09 5:54 PM GMT

भारत में आर्थिक मंदी का असर कुछ वर्गों को हुआ है और कुछ को नहीं. भारत एक कृषि प्रधान देश है और इसपर 70-75 प्रतिशत आबादी निर्भर है. आबादी का 25-30 प्रतिशत हिस्सा आर्थिक मंदी से प्रभावित हुआ है. जिनकी निर्भरता कृषि पर है, वे कम प्रभावित हैं.

birendra kumar darbhanga

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