इस बहस को सहेज कर रख लिया गया है – जवाब देने की अनुमति नहीं है

नेताओं के सादगी के संदेश पर राय

संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार ने जहाँ चुनावों में आम आदमी की बात उठाई थी, वहीं सरकार ने मंत्रियों और सांसदों को अपने रोज़मर्रा के जीवन में सादगी अपनाने का संदेश दिया है.

हाल में यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने दिल्ली से मुंबई जाते समय ‘बिज़नेस क्लास’ की जगह ‘इकोनोमी क्लास’ से हवाई यात्रा की थी. ये अलग बात है कि उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उनके आसपास की कई सीटें खाली रहीं. कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने दिल्ली से लुधियाना और फिर वापसी का सफ़र शताब्दी ट्रेन से तय किया. उनके रेल कोच में भी कई सीटें सुरक्षा की दृष्टि से या खाली रहीं या फिर सुरक्षाकर्मियों के हवाले कर दी गईं.

इससे पहले विदेश मंत्री एसएम कृष्णा और विदेश राज्यमंत्री शशि थरूर के पाँच सितारा होटलों में रिहायश रखने का मामला सामने आया था. उसके बाद ही सादगी के पूरे मसले ने तूल पकड़ा था.

आप यूपीए सरकार, उसके सांसदों और नेताओं के सादगी के संदेश और उनकी जीवनशैली को किस प्रकार देखते हैं? क्या वे सभी के लिए मिसाल कायम कर रहे हैं? या फिर ये बहस ही बेमानी है और नेताओं को अपना ध्यान कारगर प्रशासन और आम आदमी का जीवन बेहतर बनाने में लगाना चाहिए?

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प्रकाशित: 9/16/09 7:38 AM GMT

टिप्पणियाँ

टिप्पणियों की संख्या:64

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Added: 9/25/09 9:53 AM GMT

सादगी दिखावे की नहीं, व्यवहार में अपनाने की चीज है.

dr hanuman galwa jaipur rajasthan

Added: 9/22/09 8:35 AM GMT

मितव्ययता के लिए भारी-भरकम मंत्रिमंडल में कटौती जरूरी है.गरीबों तक यथार्थ में राहत-सुविधा पहुँचाने के लिए उनके बीच के सरकारी-गैरसरकारी दलालों,भृष्टाचारियों का सफाया जरूरी है, जिसके लिए नेतागणों ने अबतक कोई ठोस प्रयास नहीं किया है. वे अपने भाषणों में विभिन्न मंचों से सिर्फ चिंता व्यक्त करके अपनी अक्षमता को छिपाते रहते हैं.पिछले पाँच सालों का मंत्रिमंडल व्यय को प्रकट न करके,जनता की गाढ़ी कमाई पर अपने मंत्रियों,नेताओं के ऐशोआराम की खुलती जा रही पोल को छिपाने के लिए यह सस्ती हवाई यात्रा दिखावा है.

सिद्धार्थ कौसलायन आर्य ग्रेटर नौएडा-भारत

Added: 9/21/09 1:21 AM GMT

यह अच्छी पहल है. गांधी परिवार को बधाई लेकिन उन्हें अपनी सुरक्षा के बारे में भी सोचना चाहिए.

Deepesh Ambikapur

Added: 9/20/09 6:02 PM GMT

सादा रहना इतना आसान नहीं है क्योंकि जो नेता एमएलए की एक सीट के लिए एक करोड़ रुपया और एमपी की सीट के लिए 10 करोड़ तक ख़र्च करेंगे वह सादा कैसे रह सकते हैं.

m nazim ansari new delhi

Added: 9/20/09 11:28 AM GMT

जन सेवा का नाम लेकर नेतागिरी और नौकरी करने वाले हमारे मंत्रियों, नेताओं और अफ़सरों को ख़ुद के लिए ख़ास दर्ज़ा क्यों चाहिए... वो जिस देश की नुमांइदगी करते हैं वहां की जनता की तकलीफ़ों का अनुभव होने पर ही उनका निराकरण वे बेहतर ढंग से कर पाएंगे. हवाई जहाज की इकॉनॉमी क्लास और ट्रेन में सफ़र कर वो कोई बड़ा काम नहीं कर रहे हैं.

kamlesh Sahu Raipur

Added: 9/19/09 9:46 PM GMT

बहुत अच्छा है.आगे भी ऐसा होते रहना चाहिए.

kash toronto

Added: 9/19/09 11:21 AM GMT

भारत को चीन की बढ़ती घुसपैठ की चिंता करनी चाहिए. यह हमारे नेतृत्व और नीतियों की कमी का नतीज़ा है. पाकिस्तान भारत के लिए समस्या है लेकिन चीन उससे भी बड़ी समस्या है. चीन के सैनिक ही क्यों घुसपैठ करते हैं, भारतीय सैनिक क्यों नहीं. भारत को इसके ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई करनी चाहिए.

victor brussel

Added: 9/19/09 10:25 AM GMT

हमारे नेताओं और अधिकारियों को आम आदमी की कोई फ़िक्र नहीं है. क्योंकि उनके सामने न तो कोई ऊँचा आदर्श है और न ही कोई जवाबदेही. देश में भ्रष्टाचार पर लगाम लग जाए और विकास का पैसा सही जगह पर पहुँच जाए तो इस तथाकथित मितव्ययिता की ज़रूरत ही नहीं पड़ेगी.

VIRMA RAM DELHI

Added: 9/19/09 7:52 AM GMT

देखा जाए तो यह कुछ हद तक सही है. कई मंत्री अपने खर्चे कम करने के बारे में सोचें. मैं इस ब्लॉग के माध्यम से प्रधानमंत्री से यह सवाल पूछना चाहूँगा कि यदि उन्हें देश के पैसों की इतनी ही चिंता है तो सबसे पहले अपने मंत्रीमंडल में मंत्रियों की संख्या कम क्यों नहीं करते हैं. आखिर देश का लाखों रुपया उन मंत्रियों की देखभाल पर ही खर्च होता है.

Mahendra Kumar Sirotiya Delhi

Added: 9/19/09 6:07 AM GMT

शशि थरूर तो सीईओ है. उनका कैटल क्‍लास वाली देश की ग़रीब जनता से क्‍या लेना देना. लेकिन इसके लिए दोषी तो कांग्रेस है जिसने पहले उन्‍हें पहले संयुक्‍त राष्‍ट्र महासचिव बनवाने का प्रयास किया और बाद में टिकट देकर जीवन में पहली बार मतदान करने वाले बाबू को देश के सबसे बड़े लोकतंत्र में मंत्री बना दिया. लेकिन आश्‍चर्य तो यह है कि देश की ग़रीब जनता और सरकार का सरेआम उपहास करने के बाद भी वे अपने पद पर बने रहते हुए वेबसाइट से ग़रीब जनता का रोज-रोज मजाक उड़ाने में लगे हुए हैं.

Rehmat Badwani

Added: 9/19/09 6:04 AM GMT

नेताओं की राजनीतिक नौटंकी हैं. नेता देश की जनता को मूर्ख समझते है

Ashish solanki Bhpoal

Added: 9/19/09 6:00 AM GMT

ये नेता देश के ख़जाने को ख़ुद की शानों-शौकत पर उड़ाना अपना जन्‍मसिद्ध अधिकार समझते हैं. शशि थरूर ने तो हद ही कर दी. वायुयान का सफर (निश्चित ही इकॉनामी क्‍लास में) करना हमारा एक ऐसा सपना है जो 95 फ़ीसदी देशवासी अपने जीवन में पूरा नहीं कर पाते उसे थरूर साबह जानवरों की श्रेणी कह रहे हैं. यह उनकी सामंती मानसिकता को दर्शाता है. इन का लोकतंत्र और देश की ग़रीब जनता से कोई वास्‍ता नहीं है. वे न तो भारत में रहे हैं और न ही इस चुनाव से पहले उन्‍होंने कभी अपने मताधिकार का उपयोग किया है.

Rehmat Badwani

Added: 9/19/09 3:14 AM GMT

चाहे नेता निजी विमान से यात्रा करें यदि वे अपनी संपत्ति की सही सही घोषणा कर उसपर आयकर देते रहें तो.

डा0 उत्सव कुमार चतुर्वेदी रोचेस्टर,अमेरिका

Added: 9/18/09 7:05 PM GMT

नेता अगर अपने काम में सादगी ले आएँ तो बहुत सी फ़िजूलखर्ची से बचा जा सकता है.

Ranjan Mishra Vashundhra , Ghaziabad

Added: 9/18/09 3:11 PM GMT

सोनिया गांधी और राहुल गाँधी का इस तरह आम आदमी की तरह यात्रा करना शोभा नहीं देता है.

vivek pandey hyderabad

बीबीसी को जानिए

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