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अप्रसार प्रस्ताव पर आपकी राय

सुरक्षा परिषद
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने एक अभूतपूर्व सम्मेलन में सर्वसम्मति से परमाणु अप्रसार और परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए प्रस्ताव पारित किया है.

अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इस सम्मेलन की अध्यक्षता की और कहा कि परमाणु हथियारों से मुक्त दुनिया के लिए यह ज़रूरी है. उन्होंने परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर न करने वाले देशों से अपील की कि वे इस संधि को स्वीकार कर लें.

लेकिन भारत जैसे देश हमेशा से यह मानते रहे हैं कि परमाणु अप्रसार संधि एकतरफ़ा है और वर्षों पहले परमाणु शक्तिसंपन्न हो चुके देश अन्य देशों पर ये संधि थोपना चाहते हैं.

आपको क्या लगता है क्या भारत को एनपीटी पर हस्ताक्षर कर देना चाहिए या फिर अन्य विकसित देश ये संधि थोपना चाहते हैं.

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प्रकाशित: 9/25/09 11:06 AM GMT

टिप्पणियाँ

टिप्पणियों की संख्या:18

सभी टिप्पणियाँ जैसे जैसे वो आती रहती हैं

Added: 9/30/09 2:23 AM GMT

पर उपदेश कुशल बहुतेरे. अप्रसार संधि तभी सफल हो सकती है जब सबकी नीयत साफ हो. कूटनीति से उसके मूल उद्देश्य नहीं पाए जा सकते.

vivek ranjan shrivastava jabalpur भारत

Added: 9/28/09 8:10 AM GMT

भारत के लिए इस दौर में प्रमाणु अप्रसार की बात बेमानी है. हमारे पड़ोसी देश प्रमाणु हथियारों का ज़ख़ीरा लिए बैठे हैं. कभी पाकिस्तान आंख दिखाता है तो कभी चीन, अभी तो नेपाल जैसे छोटे देश भी ऊंचे सुर में बात करते हैं. जब तक सभी प्रमाणु देश ईमानदारी से इस ओर पहल नहीं करते भारत के लिए प्रमाणु अप्रसार हाथ काटने जैसा है.

Deepak Tiwari Vadodara भारत

Added: 9/27/09 9:36 PM GMT

पहले तो मैं ये कहना चाहता हूँ कि भारत को अब कभी भी ग़ुलाम नहीं बनाया जा सकता है. खन्ना जी के लेख से हमेशा राजनीति की बू आती है. बात चाहे कोई भी हो वह कांग्रेस की बख़िया उधेड़ने में लग जाते हैं. उनको ये बात मालूम होनी चाहिए कि प्रमाणु शक्ति बनने में कितने दशक लग जाते हैं, अटल जी के पास कोई अलाउद्दीन का जादुई चिराग़ नहीं था कि चार साल में भारत प्रमाणु शक्ति बन गया, ये कांग्रेस की वर्षों की मेहनत थी, भाजपा ने तो सिर्फ़ बटन दबाने का काम किया था.

FIROZ SARODI LONDON

Added: 9/27/09 5:38 PM GMT

संयुक्त राष्ट्र की महासभा और उसके प्रस्ताव अपना वज़न खो चुके हैं. जैसा कि जनरल गद्दाफ़ी ने बोला संयुक्त राष्ट्र हाइड पार्क बन गया है, जहाँ लोग बोल कर चल देते हैं. अप्रसार प्रस्ताव का क्या महत्व है जब ईरान जैसे राष्ट्र परमाणु अप्रसार संधि का हिस्सा होके भी प्रसार में लिप्त पाए गए और संधि की अवहेलना की उनके विरूद्व प्रतिबंध भी लगे लेकिन उससे उनके व्यवहार में कोई परिवर्तन नहीं आया. मेरे विचार में यह नया प्रस्ताव केवल काग़ज़ी ख़ाना पूर्ती है.

Uttam Kumar Tripathi Kanpur भारत

Added: 9/27/09 11:55 AM GMT

भारत को परमाणु अप्रसार और परमाणु निरस्त्रीकरण के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं करना चाहिए.

santosh kumar singh siwan[bihar]

Added: 9/27/09 12:34 AM GMT

भारत को इस परमाणु अप्रसार और परमाणु निरस्त्रीकरण के प्रस्ताव पर कभी हस्ताक्षर नहीं करना चाहिए क्योंकि भारत तेज़ी से विकास कर रहा है और यह अमरीका या दूसरे देशों का षडयंत्र हो सकता है कि भारत के हाथ काट दिए जाएं. कांग्रेस बहुत कमज़ोर और भ्रष्ट पार्टी है वह कहती कुछ है और करती कुछ और है. भारत के लोगों को कांग्रेस पार्टी और उसकी राजनीति को समझने के लिए जागना होगा.

PUNEET TORONTO

Added: 9/26/09 10:01 PM GMT

उन सभी देशों को जो अपने आप को विश्व शक्ति कहते हैं जैसे अमरीका, रूस, फ़्रांस, जर्मनी को पहले अपना प्रमाणु हथियार ख़त्म करना चाहिए ताकि विकासशील देशों को सकारात्मक संदेश मिले. ये लोग सिर्फ़ कहते रहेंगे कि ख़त्म करो तो इसका हल कभी नहीं निकल सकता.

Vasi Akhter Monrovia

Added: 9/26/09 9:44 AM GMT

इस बात को एक बच्चा भी जान सकता है कि इसके तहत अमरीका सब पर अपनी नीति थोपना चाहता है. उन्होंने पहले बम बना लिए उसका उपयोग कर दुनिया को दहला दिया और अब चाहते हैं कि बस वही दादा बने बैठे रहें. सबसे पहले अमरीका अपने सारे प्रमाणु हथियार ख़त्म करे तभी किसी और देश से वह ऐसा करने के लिए कह सकता है. अमरीका और विक्सित देशों की दोहरी नीति तो हर तरफ़ देखी जा सकती है चाहे वह प्रमाणु अप्रसार पर हो या विश्व व्यापार समझौते पर. ये सिर्फ़ अपना हित देखते हैं.

prakash badal delhi भारत

Added: 9/26/09 8:45 AM GMT

सच कहें तो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद पूरे विश्व समुदाय का प्रतिनिधित्व करता ही नहीं. वो तो केवल उन्ही पांच महाशक्तियों (वीटो पावरयुक्त स्थायी सदस्य) के इशारे पर चलता है, जिनके पास दुनिया में सबसे ज्यादा परमाणु हथियार हैं. निरस्त्रीकरण की नीति पहले वो स्वयं क्यों नहीं अपनाते?

Ravi Srivastava Varanasi भारत

Added: 9/26/09 5:27 AM GMT

पहले अमरीका को परमाणु हथियार ख़त्म करना चाहिए तब जाकर भारत अप्रसार प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करे.

अमित तिवारी "भारतीय़" जालौन (उ.प्र.) भारत

Added: 9/26/09 4:37 AM GMT

सयुंक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् का निर्णय दुर्भाग्यपूर्ण है और उस पर ओबामा साहब का रवैया निराशाजनक है. भारत को कदापि इस संधि पर हस्ताक्षर नहीं करने चाहिए या फिर हस्ताक्षर करने से पहले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद भारत को स्थाई सदस्यता दे और चीन व पकिस्तान की ओर से ऐसी संधि पर हस्ताक्षर करवा कर दे कि यह दोनों देश भविष्य में कभी भी अपने परमाणु हथियारों का प्रयोग भारत के खिलाफ नहीं करेंगे.

BALWANT SINGH HOSHIARPUR , PUNJAB

Added: 9/26/09 3:57 AM GMT

भारत को इस संधि पर हस्ताक्षर नहीं करने चाहिए. उसे अमरीका पर यह दबाव डालना चाहिए की वो अपने घर की पहले अच्छी तरह से तलाशी लेने की अमुमति दे. देखे कि वहां कितने परमाणु अस्त्र भरे पड़े होंगे! अब ऐसा लग रहा है कि भारत अमरीका का गुलाम बनता जा रहा है.

murli kgp

Added: 9/26/09 2:57 AM GMT

भारत का ऱूख सही है. हमें हमेशा देश हित को सबसे ऊपर रखना चाहिए एवं पूर्ण निरस्त्रीकरण पर कायम रहना चाहिए.

AJAY KUMAR DARHANGA

Added: 9/26/09 1:04 AM GMT

यह अमरीका कौन है जो निश्चित करें कि किसके पास परमाणु हथियार होंगे और किसके पास नहीं. अमरीका सभी झंझटों की जड़ में है. क्यों नहीं अमरीका सबसे पहले आगे बढ़ कर परमाणु हथियारों को नष्ट कर देता है. तब सब राष्ट्र उसके पीछे चल पड़ेंगे. भारत को सावधान रहना चाहिए.

Gaurav Shrivastava Louisville

Added: 9/25/09 3:21 PM GMT

हो सकता है कि मैं ग़लत कह रहा हूँ लेकिन आने वाले समय मे भारत अमरीका का गुलाम बन जाएगा ओर वे भी कांग्रेसियो के कारण. भारत हस्ताक्षर तो क्या हस्ताक्षर कर पेपर अमरीका के कदमो मे रख कर आएगा. वाजपेयी का समय था जब बिना डर व दबाब के परमाणु परीक्षण किया लेकिन श्री मनमोहन सिह के समय में हर तरफ अमरीका के आगे घुटने टेके हैं. अमरीका पाकिस्तान का दोस्त है न कि भारत का. हमें इस संधि पर कभी भी हस्ताक्षर नहीं करने चाहिए. लेकिन ऐसा होगा नहीं.

SHABBIR KHANNA RIYADH( SAUDIA ARABIA )

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