इस बहस को सहेज कर रख लिया गया है – जवाब देने की अनुमति नहीं है

कितनी तैयार है दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों के लिए?

दिल्ली में 2010 में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों के लिए शहर की तैयारी पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं.

खेलों के लिए कई स्टेडियम और अन्य सुविधाएं कायम करने के लिए काम इतना धीमा है कि राष्ट्रमंडल खेल संघ के प्रमुख मायकेल फ़ेनेल ने भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से हस्तक्षेप करने की अपील की.

वहीं सवाल उठे हैं दिल्ली की तहज़ीब पर भी. यह मौका होगा जब दुनिया से सैंकड़ों खिलाड़ी और लाखों लोग शहर में होंगे. क्या दिल्ली इनके सामने अंतरराष्ट्रीय दर्जे की सुविधाएं पेश कर पाएगी, क्या एक अंतरराष्ट्रीय दर्जे की बड़ी राजधानी की छवि दिल्ली प्रस्तुत कर पाएगी.

कितना तैयार है दिल्ली शहर राष्ट्रमंडल खेलों के लिए और क्या उम्मीद की जा सकती है सरकार से. इस पर आप भेजिए हमें अपनी राय. और इसी विषय पर 30 सितंबर को रात आठ बजे बीबीसी हिंदी रेडियो पर दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित से आप सवाल पूछना चाहते हैं तो भेजिए अपने सवाल भी.

प्रकाशित: 9/28/09 12:13 PM GMT

टिप्पणियाँ

टिप्पणियों की संख्या:51

सभी टिप्पणियाँ जैसे जैसे वो आती रहती हैं

Added: 10/8/09 4:55 AM GMT

ये किसी मज़ाक़ की तरह लगता है कि दिल्ली में राष्ट्रमंडल खेल का आयोजन हो रहा है. मेरे विचार से बीस साल पहले दिल्ली ज़्यादा अच्छी थी. मैं नहीं समझता कि दिल्ली खेलों के आयोजन के लिए ठीक चुनाव है.

Sunny Toronto

Added: 10/7/09 7:27 PM GMT

पिछले सप्ताह मैं भारत से वापिस आया. मैं तीन सप्ताह तक दिल्ली में था. वहां ट्रेफ़िक बहुत ज़्यादा है. 2-3 घंटे का ट्रेफ़िक जाम सामान्य बात है. हर तरफ़ कूड़ा पड़ा हुआ है और बदबू आती है. मुझे हैरत है कि वहां लोग कैसे रहते हैं. मैं नहीं समझता कि दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों के लिए तैयार है.

vijay Jangda canada

Added: 10/7/09 11:56 AM GMT

दिल्ली आने वाले खेलों के लिए तैयार नहीं है.

KAILASH GAIRI GAIRISAIN, UTTARAKHAND

Added: 10/7/09 10:03 AM GMT

कुछ भी नहीं बदला है सिवाए अंतिम समय में किए गए मुंह बचाने वाले काम के. जब देश इसे आयोजित करने के लिए तैयार नहीं है तो खेलों में उसके प्रदर्शन पर क्या बात करें.

anjani kumar N delhi

Added: 10/7/09 7:04 AM GMT

दिल्ली में राष्ट्रमंडल खेलों के लिए तैयारियां तो ठीह ही चल रही हैं लेकिन काम बहुत धीमी रफ़्तार से चल रहा है. इसमें दिल्ली की मुख्य मंत्री शीला दीक्षित को दिलचस्पी दिखाने की ज़रूरत है क्योंकि अभी तक स्टेडियम भी पूरी तरह से तैयार नहीं हुए हैं.

Afsar Abbas Rizvi "Anjum" Shikohabad

Added: 10/7/09 6:56 AM GMT

दिल्ली हमेशा से ऐसी ही रही है, उसकी अव्यवस्था में ही कहीं न कहीं बिल्कुल सटीक व्यवस्था छिपी होती है. राष्ट्रमंडल खेल जब होंगे तब इसका सबूत ख़ुद ही मिल जाएगा. निश्चिंत रहें.

PRASHANT PANDEY GORAKHPUR(U.P)

Added: 10/7/09 3:40 AM GMT

हम लोग इस प्रकार के भव्य आयोजन के लिए तैयार नहीं हैं. पहले सरकार को न सिर्फ़ दिल्ली की आधारभूत सुविधाओं पर नज़र रखनी चाहिए बल्कि एनसीआर को भी देखना चाहिए. यह अंतरराष्ट्रीय स्तर से काफ़ी नीचे है. और ये पैसे की बर्बादी के अलावा कुछ और नहीं है.

Pulkit Noida

Added: 10/6/09 6:28 PM GMT

बिल्कुल तैयार है दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों के लिए कहना ग़लत होगा, क्योंकि अब जबकि राष्ट्रमंडल खेलों की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है तो केवल चालीस से पचास प्रतिशत निर्माण काम ही पूरा हो पाया है. ऐसे में आप सोच सकते हैं कितनी तैयार है दिल्ली, मेरे विचार में सब कुछ राम भरोसे है, कहीं अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के आगे नाक न कट जाए.

प्रदीप कुमार हैदराबाद

Added: 10/6/09 6:19 PM GMT

दिल्ली कॉमनवेल्थ खेलों के अधिकारियों ने अगर 2016 में होने वाले खेल को आयोजित करने के दावेदार कोपनहेगन की तैयारी की प्रस्तुति देखी होगी तो शायद उनकी आँखें खुल गई होंगी कि आख़िर किस तरह से आयोजन व्यवस्था की जाती है.

VIRMA RAM JNU - New Delhi

Added: 10/6/09 4:58 PM GMT

फ़िल्म शोले में माँ बच्चों को सुलाने के लिए गब्बर से डराती थी. श्रीमती गांधी काम करवाने के लिए इमर्जेंसी का प्रयोग करती थीं. ये हमारा राष्ट्रीय किरदार है कि जबतक लात न पड़े या रिश्वत न दी जाए काम नहीं होता. हम अपने काम को ईमानदारी से करने से कतराते हैं. हर क्षेत्र में इच्छाशक्ति की कमी है. देश में उच्च स्तर पर इसे स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है. हम लोग ताज होटर के मुजरिम को पाकिस्तान से हासिल करने में नाकाम रहे हैं और अब इस मामले हम ख़ामोश हो चुके हैं. हमें शक्तिशाली और ईमानदार आदर्श नेता की ज़रूरत है.

harish joshi warrington

Added: 10/6/09 10:12 AM GMT

मै पिछले हफ़्ते दिल्ली से लौटा, कहीं से नहीं लगता कि एक साल बाद वहाँ कुछ होने वाला है. सब कुछ राम भरोसे...

हेम बधानी दुबई

Added: 10/6/09 6:43 AM GMT

लोगों के बीच जागरूरकता होनी चाहिए. जो लोग साफ-सफाई का ख्याल नहीं रखते हैं उन्हें सज़ा होनी चाहिए. खेल के दौरान कानून को ईमानदारी से लागू किया जाना चाहिए.

Abhishek Mittal Janjgir, C.G.

Added: 10/6/09 6:28 AM GMT

दिल्ली महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं है. खेल के दौरान महिलाओं विशेष कर विदेश से आने वाली महिलाओं की सुरक्षा का ख्याल रखना होगा. पहले कई विदेशी महिलाओं के साथ दिल्ली में बलात्कार की घटना हो चुकी. यदि दुर्भाग्य से खेल के दौरान ऐसा कुछ होता है तो हमारी छवि को काफ़ी नुकसान होगा.

raza husain lucknow

Added: 10/6/09 1:14 AM GMT

कोशिश करने में कोई हर्ज नहीं है. हर एक आदमी को अपनी तरफ़ से पूरी कोशिश करनी चाहिए. हमें मिलकर साबित करना है कि भारत में लोग अनुशासित हैं. देश हम सबका है तो जिम्मेदारी भी हम सबकी है.

Amit vancouver

Added: 10/5/09 12:17 PM GMT

कामन वेल्थ खेलों के सफल आयोजन के लिए दिल्लीवासियों से ही सबसे ज्यादा उम्मीद की जा सकती है क्योंकि प्राकृतिक आपदाओं में भी कमाई का जरिया ढूँढने वाले हमारे नेता इस आयोजन में भी कमाई में पीछे नहीं रहेंगे. इस आयोजन से जुडा कोई भी समाचार इसकी तैयारियों की बदहाली ही बयां करता है. अगर कोई आश्वस्त हैं तो सिर्फ हमारे नेता जो ये भूल रहें हैं की इस बार की चूक से देश की साख पर भी बट्टा लगेगा.

Ankur Pune

बीबीसी को जानिए

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