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छात्र संघ हो राजनीति से दूर?

क्या विश्वविद्यालयों में राजनीतिक पार्टियों का दखल बंद होना चाहिए?

कोलकाता के एक कॉलेज में छात्र संघ के चुनाव के दौरान हिंसा में एक पुलिसकर्मी की मौत के बाद राज्य सरकार ने छात्र राजनीति पर लगाम कसने की तैयारी तेज़ कर दी है. पश्चिम बंगाल शिक्षा विभाग ने एक ड्राफ्ट गाइडलाइन तैयार की है जिससे राज्य में छात्र संघ के चुनाव को राजनीति से दूर किया जा सके.

सुझावों के तहत छात्र संघों को राजनीतिक पार्टियों से अलग रखना और चुनाव को दो साल के अंतराल पर कराने की बात कही गई है.

आप क्या सोचते हैं, क्या कॉलेज संघों को राजनीति से दूर करने की कोशिश सही है. इस बार इंडिया बोल इसी विषय पर ...

शनिवार शाम साढ़े सात बजे कार्यक्रम में शामिल होने के लिए टोल फ्री नंबर हैं 1800117000 और 18001027001.

प्रकाशित: 2/21/13 8:00 AM GMT

टिप्पणियाँ

टिप्पणियों की संख्या:19

सभी टिप्पणियाँ जैसे जैसे वो आती रहती हैं

Added: 2/22/13 1:16 AM GMT

जेएनयू जैसे एक-आध विविः को छोड़कर किसी भी कॉलेज/यूनिवर्सिटी मेँ छात्र संघ चुनाव विचारधारा के स्तर पर नही होते. ऐसी जगहों पर छात्र राजनीति अपना बाहुबल/गुण्डई दिखाने से ज्यादा कुछ नहीं. यहाँ पर भी जातीय, क्षेत्रीय समीकरणो और पैसे का बोलवाला है. पार्टियों का नाम वोट पाने का बहाना भर है. जहाँ राजनीति का क, ख, ग सीखना चाहिए वहाँ ये हाल है तो ऐसे में कोई पार्टी हो या न हो बहुत फर्क नहीँ पड़ने वाला. लेकिन फिर भी दलविहीन करके छात्र राजनीति कैसी होगी? छात्रों के पास अपने पक्ष में वोट मांगने के क्या तर्क होंगे?

अमित भारतीय जालौन (उo प्रo) भारत

Added: 2/21/13 3:04 PM GMT

छात्र संघो की राजनीति में देश की राजनैतिक पार्टियो का दखल ही अपराध को जन्म देता है. छात्र राजनीति का जो मूल उद्देश्य है कि विद्यार्थी स्वस्थ लोकतांत्रिक परम्परा को समझ सकें वह गौण हो जाता है तथा देश की युवा शक्ति को दिग्भ्रमित कर राजनैतिक दल अपना उल्लू सीधा करते दिखते हैं. बेहतर हो कि शिक्षा परिसरो से पेशेवर राजनीति को दूर ही रखा जाना जरूरी है.

vivek ranjan shrivastava jabalpur भारत

Added: 2/21/13 1:27 PM GMT

नही होना

rekharam sindhari barmer raj

Added: 2/21/13 12:31 PM GMT

राजनीतिक दलों ने छात्र संघ चुनाव में अपनी युवा ब्रिगेड को उतार रखा है. चुनाव जीतने के बाद ये युवा नेता अपनी राजनीतिक पार्टी के प्रति अधिक और छात्र हित के प्रति कम समर्पित नजर आते हैं. राजनीति की तरह छात्र संघों का भी अपराधीकरण हो चुका है. अधिकांश छात्र संघ चुनावों में हिंसा होती है. मारपीट और गाली-गलौज करना छात्र नेता की योग्यता बन चुका है. छात्र नेताओं को उपयोग भारत बंद और रैलियों में किया जाता है. शैक्षणिक संस्थाओं से राजनीतिक दलों को बाहर निकालने के लिए बंगाल सरकार का यह प्रयास सराहनीय हैं.

shantanu srivastava noida भारत

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