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2/22/13 1:16 AM GMT
जेएनयू जैसे एक-आध विविः को छोड़कर किसी भी कॉलेज/यूनिवर्सिटी मेँ छात्र संघ चुनाव विचारधारा के स्तर पर नही होते. ऐसी जगहों पर छात्र राजनीति अपना बाहुबल/गुण्डई दिखाने से ज्यादा कुछ नहीं. यहाँ पर भी जातीय, क्षेत्रीय समीकरणो और पैसे का बोलवाला है. पार्टियों का नाम वोट पाने का बहाना भर है. जहाँ राजनीति का क, ख, ग सीखना चाहिए वहाँ ये हाल है तो ऐसे में कोई पार्टी हो या न हो बहुत फर्क नहीँ पड़ने वाला. लेकिन फिर भी दलविहीन करके छात्र राजनीति कैसी होगी? छात्रों के पास अपने पक्ष में वोट मांगने के क्या तर्क होंगे?
अमित भारतीय जालौन (उo प्रo) भारत