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इस बहस को सहेज कर रख लिया गया है – जवाब देने की अनुमति नहीं है

आईटी कानून का दुरुपयोग?

शिव सेना नेता बाल ठाकरे के निधन पर मुंबई में बंद के खिलाफ फेसबुक पर टिप्पणी करने पर मुंबई की दो युवतियों की गिरफ्तारी से आईटी कानून और इसकी धाराओं पर बहस तेज हो गई है.

इसी कानून में एक धारा है 66 ए जिसमें झूठे और आपत्तिजनक संदेश भेजने पर सजा का प्रावधान है.

इस धारा के तहत कंप्यूटर और संचार उपकरणों से ऐसे संदेश भेजने की मनाही है जिससे परेशानी, असुविधा, खतरा, विघ्न, अपमान, चोट, आपराधिक उकसावा, शत्रुता या दुर्भावना होती हो.

सुप्रीम कोर्ट ने भी महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी कर पूछा है कि किन परिस्थितियों में ठाणे की दो लड़कियों को गिरफ्तार किया गया.

क्या आप भी मानते हैं कि ये कानून अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ है ..या फिर सिर्फ पुलिस इसका गलता इस्तेमाल कर रही है और ये कानून ज़रूरी है

क्या है आपकी राय ..

प्रकाशित: 12/1/12 6:06 AM GMT

टिप्पणियाँ

टिप्पणियों की संख्या:5

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Added: 12/1/12 11:04 AM GMT

पुलिस ने इस कानून का गलत इस्तेमाल किया और जरूरत से ज्यादा कार्रवाई की.फेसबुक पर इतने सारे आपत्तिजनक सामग्री है,अन्य लोगों के बारे वहाँ पुलिस मौन रहती है.वैसे धारा 66 ए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ है.आम लोगों के लिए सोशल साइटें एक मंच है,जहाँ वे खुलकर अपनी बात रख सकते है.सरकार, नेता और नौकरशाहों को अपने मे सुधार करना चाहिए,न कि दूसरों को जेल मे डालना चाहिए.

लक्ष्मी कान्त मणि साँड़ी कलां, सिद्धार्थनगर, यूपी, भारत

Added: 12/1/12 10:04 AM GMT

कानून का दुरूपयोग ही उसे कमजोर बनता है , जिस तरीके से फेसबुक की सहज टिप्पणी के आधार पर लडकियों को गिरफ्तार किया , वह हास्यास्पद है . कानून भी मकसद को महत्व देता है .

vivek ranjan shrivastava jabalpur भारत

Added: 12/1/12 2:14 PM GMT

ये क़ानून केवल राजनीति को फायदा उठाने के लिए है.केवल दो प्रतिशत होगा कि ये सही व्यक्ति के लिए इसका इस्तेमाल होगा.

pradeep poonia Udhampur

Added: 12/1/12 7:49 AM GMT

समरथ को नहीं दोष गुसाईं.जो समर्थ हैं वे कानून की धाराओं और पेचीदगियों का दुरूपयोग करते रहे हैं.जब मिडिया,न्यायलय और सामाजिक कर्यकर्ता इस पर मुखर होते हैं तब गलती सुधारने का नाटक किया जाता है.लेकिन जिसे गिरफ्तार क्र पुलीस थाने ले जाती है उसकी मनः स्थिति क्या होती है,यह पीड़ित पक्ष ही जानता है.अगर किसी को कुछ लिखने के लिए रात भर थाने में बिताना पड़े तो वह फिर लीखने से तौबा कर लेगा.हम पत्रकार तो इसके अभ्यस्त रहे हैं,इसलिए हमें कोई फर्क नहीं पड़ेगा.कलम पर बंदिश,लोक तन्त्र पर बंदिश है.

pramodkumar muzaffrpur

Added: 12/1/12 7:27 AM GMT

हमने जो सरकार बनाई है उसका नतीजा हमें मिलना ही है.

Deepak Noida

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