505 10 10 74 बीबीसी हिन्दी, सुनिए मोबाइल पर
इस बहस को सहेज कर रख लिया गया है – जवाब देने की अनुमति नहीं है

छात्र संघ हो राजनीति से दूर?

क्या विश्वविद्यालयों में राजनीतिक पार्टियों का दखल बंद होना चाहिए?

कोलकाता के एक कॉलेज में छात्र संघ के चुनाव के दौरान हिंसा में एक पुलिसकर्मी की मौत के बाद राज्य सरकार ने छात्र राजनीति पर लगाम कसने की तैयारी तेज़ कर दी है. पश्चिम बंगाल शिक्षा विभाग ने एक ड्राफ्ट गाइडलाइन तैयार की है जिससे राज्य में छात्र संघ के चुनाव को राजनीति से दूर किया जा सके.

सुझावों के तहत छात्र संघों को राजनीतिक पार्टियों से अलग रखना और चुनाव को दो साल के अंतराल पर कराने की बात कही गई है.

आप क्या सोचते हैं, क्या कॉलेज संघों को राजनीति से दूर करने की कोशिश सही है. इस बार इंडिया बोल इसी विषय पर ...

शनिवार शाम साढ़े सात बजे कार्यक्रम में शामिल होने के लिए टोल फ्री नंबर हैं 1800117000 और 18001027001.

प्रकाशित: 2/21/13 8:00 AM GMT

टिप्पणियाँ

टिप्पणियों की संख्या:19

सभी टिप्पणियाँ सिफ़ारिश के क्रम में

Added: 2/22/13 9:52 AM GMT

छात्रसंघ का भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण योगदान रहा है लेकिन पिछले दो तीन दशको में अपराधियों के प्रवेश व राजनीतिक पार्टियों के दखल के चलते अब सिर्फ इसकी बुराईया ही बची है... आज गिनती के विश्वविद्यालयों को छोड़कर सब जगह छात्र संघ में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से गुंडों व माफियाओ का ही कब्ज़ा है... छात्रसंघ चुनावो को राज्य चुनाव आयुक्त की निगरानी में कराया जाना चाहिए.... सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि छात्रसंघ लोकतंत्र की नर्सरी बने ना कि माफियागिरी के प्रशिक्षण केंद्र...

Sumit Kumar Faculty of Law, BHU, Varanasi भारत

Added: 2/22/13 5:50 AM GMT

कालेज परिसरों में हिंसा की घटनाएं??? सर, डॉयचे वेले की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत के कई कॉलेजों में हिंसा की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं. इसके लिए कोई शिक्षा में राजनीति की घुसपैठ को जिम्मेदार ठहराता है तो कोई एकल परिवारों में बच्चों के पालन-पोषण में रहने वाली खामियों को.
बिहार, उत्तरप्रदेश, ओड़िशा, तमिलनाडु से लेकर छत्तीसगढ़ तक कोई भी राज्य इस हिंसा से अछूता नहीं है. आखिर कैंपस में क्यों बढ़ रही है हिंसा?

-सुभाष बुड़ावन वाला,18,शांतीना... ,खाचरौद[म्प]

Added: 2/23/13 4:56 AM GMT

बेशक,विश्वविद्यालयों मे होने वाले छात्र संघ चुनावों मे राजनैतिक पार्टियों की दखलंदाजी बंद होनी चाहिए. मुझे लगता है कि छात्र संघ की बजाय अगर छात्र परिषद हो तो कहीं अच्छा है.

रोहित कुमार इलाहाबाद भारत

Added: 2/23/13 12:28 AM GMT

दुनिया के किस हिस्से में आप कॉलेजों में राजनीतिक दलों की उपस्थिति पाएंगे? माता-पिता अपने बच्चों को स्कूल पढ़ने के लिए भेजते हैं ना कि गंदी राजनीति में हिस्सा लेने.

Yogeshwar Sanchihar Hayward

Added: 2/22/13 1:16 AM GMT

जेएनयू जैसे एक-आध विविः को छोड़कर किसी भी कॉलेज/यूनिवर्सिटी मेँ छात्र संघ चुनाव विचारधारा के स्तर पर नही होते. ऐसी जगहों पर छात्र राजनीति अपना बाहुबल/गुण्डई दिखाने से ज्यादा कुछ नहीं. यहाँ पर भी जातीय, क्षेत्रीय समीकरणो और पैसे का बोलवाला है. पार्टियों का नाम वोट पाने का बहाना भर है. जहाँ राजनीति का क, ख, ग सीखना चाहिए वहाँ ये हाल है तो ऐसे में कोई पार्टी हो या न हो बहुत फर्क नहीँ पड़ने वाला. लेकिन फिर भी दलविहीन करके छात्र राजनीति कैसी होगी? छात्रों के पास अपने पक्ष में वोट मांगने के क्या तर्क होंगे?

अमित भारतीय जालौन (उo प्रo) भारत

Added: 2/21/13 3:04 PM GMT

छात्र संघो की राजनीति में देश की राजनैतिक पार्टियो का दखल ही अपराध को जन्म देता है. छात्र राजनीति का जो मूल उद्देश्य है कि विद्यार्थी स्वस्थ लोकतांत्रिक परम्परा को समझ सकें वह गौण हो जाता है तथा देश की युवा शक्ति को दिग्भ्रमित कर राजनैतिक दल अपना उल्लू सीधा करते दिखते हैं. बेहतर हो कि शिक्षा परिसरो से पेशेवर राजनीति को दूर ही रखा जाना जरूरी है.

vivek ranjan shrivastava jabalpur भारत

Added: 2/21/13 12:31 PM GMT

राजनीतिक दलों ने छात्र संघ चुनाव में अपनी युवा ब्रिगेड को उतार रखा है. चुनाव जीतने के बाद ये युवा नेता अपनी राजनीतिक पार्टी के प्रति अधिक और छात्र हित के प्रति कम समर्पित नजर आते हैं. राजनीति की तरह छात्र संघों का भी अपराधीकरण हो चुका है. अधिकांश छात्र संघ चुनावों में हिंसा होती है. मारपीट और गाली-गलौज करना छात्र नेता की योग्यता बन चुका है. छात्र नेताओं को उपयोग भारत बंद और रैलियों में किया जाता है. शैक्षणिक संस्थाओं से राजनीतिक दलों को बाहर निकालने के लिए बंगाल सरकार का यह प्रयास सराहनीय हैं.

shantanu srivastava noida भारत

Added: 2/23/13 7:09 AM GMT

छात्रसंघों को राजनीति से अलग रखने की बात बेमानी है, क्योंकि छात्रसंघ लोकतांत्रिक व्यवस्था में भागीदारी का एक दृष्टांत पेश करते हैं जो स्वयं में राजनीति है. हां, उन्हें राजनीतिक दलों की दखलंदाजी से दूर रखा जाना चाहिए. अर्थात्‌ प्रत्याशी खुद को किसी दल से जोड़कर पेश न करें. दलों से जुड़ने का काम वो बाद में स्थानीय, क्षेत्रीय या राष्ट्रीय स्तर पर राजनीति में उतरने पर करें. इसका मतलब यह भी है कि कोई दल चुनाव में आर्थिक या अन्य प्रकार से उनकी सहायता भी न करे.

योगेन्द्र जोशी वाराणसी भारत

Added: 2/23/13 5:37 AM GMT

सुझाव से क्या होता है. ये सुझाव दिखावटी दिखाने के लिए है. हर राजनीतिक पार्टी में जाने की शुरुआत कॉलेज चुनावों से होती है जो आगे चलकर राजनीति में पहुँचती है.

HIMMAT SINGH BHATI jodhpur

Added: 2/23/13 4:57 AM GMT

बिल्कुल दूर होना चाहिए क्योंकि बाहुबल, धन खर्च करने की प्रवृत्ति यहीं से शुरू हो जाती है.

Rabindra Chauhan Barlangfer, Karbi Anglong, Assam

Added: 2/23/13 3:10 AM GMT

मेरे मतानुसार छात्रसंघ को राजनीति से दूर रखना चाहिए क्योकि कोलेज मे अध्ययन करने वाले छात्रो की उम्र पढाई की होती है और छात्र राजनीति के दौरान जिस तरह से प्रदर्शन करते है और हिंसा पर उतरते है वो निन्दनीय है और इससे हमारी छवि और खराब होती है यदि छात्र संघ हो तो उनको राजनीति से दूर रखना चाहिए.

jayantilal sirohi (raj.)

Added: 2/22/13 6:54 PM GMT

इन चुनावों में सुधारों की सख्त जरूरत है. इन्हें राजनीति से दूर रखने की जरूरत है. ये चुनाव बिना किसी डर के होने चाहिए.

Nathmal didel nagaur, rajasthan

Added: 2/22/13 12:46 PM GMT

छात्रसंघ चुनाव राजनीतिक करियर की प्रथम सिद्धि माना जाता है और देश के भावी नेता तैयार करने की पाठशाला. इन चुनाव से कुछ अच्छे निकलते हैं जो देश सेवा का जज्बा रखते हैं. इसलिए चुनाव तो होने चाहिए मगर जेएम लिंगदोह समिति के सुझावों के अनुसार.

Omprakash Godara Nakodesar Bikaner

Added: 2/22/13 10:21 AM GMT

यदि कॉलेज से राजनीतिक पार्टियों की दूरी होगी तो छात्र संघ का मतलब ही क्या होगा?

sarveshsingh hasangaj unnao

Added: 2/22/13 10:08 AM GMT

विश्वविद्यालयों में राजनीतिक पार्टियों का दखल बंद होना चाहिए.

shiv kumar bishnoi bilochawala

बीबीसी को जानिए

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.