इस बहस को सहेज कर रख लिया गया है – जवाब देने की अनुमति नहीं है

क्यों नहीं पैदा हो रहे हैं दूसरे गांधी...

बात सत्याग्रह की बरसी के बहाने रही हो, गांधी जयंती के आयोजनों के ज़रिए या फिर अब गांधी की 60वीं पुण्यतिथि के नाम पर, गांधी की प्रासंगिकता का सवाल हर बार किसी न किसी बहाने उठता ही है.

पर यह सवाल उठते-उठते अब रस्म बन चुका है. गांधी की प्रासंगिकता है, इसे हर कोई स्वीकार करता है, भाषण देता है, समारोह और सम्मेलन इस बात को सींचते हैं पर विडंबना है कि गांधी जैसा एक भी व्यक्तित्व भारत के लगभग उजाड़-अनैतिक हो चले राजनीतिक-सामाजिक परिवेश में देखने को नहीं मिलता है. कम से कम मुख्यधारा में तो नहीं ही...

क्या गांधी प्रासंगिक होते हुए भी देश में इतनी आदर्श स्थितियाँ हैं जिनका अनुसरण कर पाना सामान्य लोगों के लिए संभव नहीं. क्या आपको लगता है कि आज गाँधी के सिद्दांतों का अनुसरण करके राजनीति या सामाजिक क्षेत्र में बने रहना संभव नहीं दिखता.

क्यों नहीं उतर पाते गांधी उस जनमानस के व्यवहार में, जो बार-बार गांधी के प्रासंगिक होने की बात मौखिक तौर पर दोहराता रहता है. अपनी प्रतिक्रियाएं हमें भेजें.

प्रकाशित: 1/30/08 8:44 AM GMT

टिप्पणियाँ

टिप्पणियों की संख्या:46

सभी टिप्पणियाँ जैसे जैसे वो आती रहती हैं

Added: 2/1/08 8:36 AM GMT

गांधी जी का काम केवल धोती से चल जाता था लेकिन अब तो सभी को बंगला, गाड़ी और बैंक बैलेंस चाहिए. यह सब गांधीवादी तरीक़े से हासिल नहीं हो सकता. सभी भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं इसलिए अब गांधी पैदा नहीं हो रहे हैं.

Rajeev Kumar Singh Lucknow

Added: 2/1/08 7:46 AM GMT

गांधी आज़ादी की लड़ाई के समय ज़रूरी थे और अब वे सभ्यता को बचाने के लिए ज़रूरी हैं.

satish kumar karpi

Added: 2/1/08 7:32 AM GMT

गाधी के आदॅशो पर चलना आज के समय़ मे काफी कठिन है परन्तु जो व्यक्ति आज भी उनके बताये रास्तों एवं सिद्धांतों पर चल रहे है उन्हें जीवन मे कभी कोई परेशानी नही होती. हर इनसान को उनके बताये रास्ते एवं सिद्धातों पर चलने की कोशिश करनी चाहिए.

राहुल शुकला देवरिया,भारत

Added: 2/1/08 5:44 AM GMT

जो गांधी जी के आदर्शों की बात करते हैं और दुनिया को दिखाते हैं कि वे सत्यवादी राजा हरिशचंद्र की तरह हैं वे असल में सारे ग़लत काम करते हैं.

himmat singh jodhpur

Added: 2/1/08 5:43 AM GMT

पहले गांधी दर्शन ठीक से पढ़ना चाहिए उसके बाद गांधी पर टिप्पणी करनी चाहिए. गांधी एक व्यक्ति नहीं विचारधारा हैं.

Vinod Kumar Purohit Jodhpur

Added: 2/1/08 5:37 AM GMT

गांधी आज के समय से भी उतने ही आवश्यक है जितने 1930 में. गांधी के विचार का महत्व आज भी है.

SANDEEP KUMAR POLPOL PALAMAU JHARKHAND

Added: 1/31/08 6:50 PM GMT

मैं व्यक्तिगत रूप से गांधी को कतई पसंद नहीं करता हूँ. वो अपने को शुद्ध भारतीय कहने थे पर वो कुछ भी हिंदी में नहीं लिखते थे. अगर उन्हें दक्षिण अफ्रीका में ट्रेन से न फेंका जाता तो वो कभी भारत नहीं आते. भारत के विभाजन के लिए वो भी ज़िम्मेदार थे. उन्हें ख़ुद को संत कहलाना पसंद था. भगत सिंह की मौत के लिए भी मैं उन्हें ज़िम्मेदार ठहराता हूँ क्योंकि वो चाहते तो भगत सिंह न मरते. मुझे समझ में नहीं आता कि भारतीय रूपए पर किसी और व्यक्ति का चेहरा क्यों नहीं छापा जा सकता.

M.K. Gandhi Johensburg

Added: 1/31/08 4:41 PM GMT

गांधी जी न सिर्फ़ सौ प्रतिशत प्रासंगिक हैं बल्कि हर जगह हमारे बीच मौजूद हैं. जब भी सत्य की हार होती है हमें गांधी याद आते हैं, जब हिंसा होती है तो गांधी याद आते हैं. किसान आत्महत्या करते हैं तो गांधी याद आते हैं, नेता-पुलिस वाले रिश्वत लेते हैं तो गांधी याद आते हैं.

Prem Verma Lalakhedi Sehore(MP)

Added: 1/31/08 2:30 PM GMT

कितने अफसोस की बात है कि आज जो जैसा चाहे गांधी जी के बारे मे बोलता है. बिना जानकारी बिना समझ के. जिस गांधी नाम की आंधी ने अंग्रेज़ो के मंसूबों पर पानी फेर दिया है जिसका अनुसरण आज दुनिया करती है और उसी देश के लोग अपनी छोटी सोच से उस हस्ती के बारे में बोलते हैं. जिसने बिना मीडिया के पूरे देश को एक प्लेटफार्म पर लाकर खड़ा कर दिया जिसने खुद के लिए या अपने परिवार के लिए कुछ लिया नहीं सिर्फ दिया ही दिया.

najmu Aloti Kuwait इराक़

Added: 1/31/08 1:35 PM GMT

गांधी जी की विचारधारा ठीक है लेकिन उसमें पूर्णता नहीं है, आज की परिस्थिति में ठीक नहीं है.

krishna shastri hicksville

Added: 1/31/08 11:29 AM GMT

ग़ौर से देखें तो समस्त राजनीतिक या सामाजिक क्षेत्र गांधीजी के सिद्धांतों का अनुसरण ही तो कर रहा है.

Singh Rajnandan HANGZHOU

Added: 1/31/08 9:39 AM GMT

जो लोग गांधी को ग़लत बता रहे हैं उन्हें उनके बारे में पूरी जानकारी नहीं है.

sanjay

Added: 1/31/08 9:30 AM GMT

इतना ही कहना चाहूँगा कि गांधी न होते तो देश पहले ही आज़ाद हो जाता और देश के टुकड़े भी न होते. आज जो देश की हालत है वो भी न होती.

सुनील

Added: 1/31/08 8:25 AM GMT

आज के युग में दूसरा गाँधी बन पाना असंभव है क्योंकि आज हम सिर्फ अपने बारे में सोचते हैं.

JANG BAHADUR SINGH GOLPAHARI,JAMSHEDPUR

Added: 1/31/08 1:22 AM GMT

गाँधी होना एक संयमित इंसान होना है. आज किसमें संयम है?

Lal Ratnakar Ghaziabad भारत

बीबीसी को जानिए

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