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महिलाओं के साथ बदसलूकी
मुंबई में नए साल का स्वागत करने के लिए इकट्ठा हुए लोगों ने दो महिलाओं के साथ ही बदसलूकी कर डाली. वो महिलाएँ भी अपने मित्रों के साथ नए साल का स्वागत कर रही थीं और ख़बरों के अनुसार एक पाँच सितारा होटल के सामने लोगों के एक झुंड ने दो महिलाओं के कपड़े तक फाड़ डाले.
इस तरह की घटनाएँ पहले भी होती रही हैं जो सवाल उठाती हैं कि अपनी भावनाओं को ज़ाहिर करने का किसे और किस हद तक अधिकार है. अपनी भावनाएँ या विचारधारा किसी और पर लादना किस हद तक जायज़ कहा जा सकता है? क्या इस तरह की घटनाएँ सुरक्षा की कमी दिखाती हैं या फिर लोगों में नैतिक मूल्यों की कमी?
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प्रकाशित:
1/2/08 11:34 AM GMT
टिप्पणियाँ
टिप्पणियों की संख्या:137
सभी टिप्पणियाँ जैसे जैसे वो आती रहती हैं
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1/6/08 1:56 PM GMT
ऐसी घटनाओं को हिंदुस्तान के कुछ लोग छोटी सी घटना मानते हैं पर ये उनसे बेहतर कौन जान सकता है कि जिन पर ये गुज़री है. पुलिसकर्मी के कुछ बड़े लोगों ने इस छोटी सी घटना कहके अपनी ज़िम्मेदारी से मुँह मोड़ लेना चाहा लेकिन मीडिया के दबाव ने उन्हें मजबूर कर दिया.
SUNNY AMRITSAR
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1/5/08 5:05 PM GMT
अब हमे ये सोचना है कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों. अपराधियों को कड़ी सज़ा देनी चाहिए और महिलाओं को भी एक सीमा मे रहना चाहिए. आज हालत ऐसी है कि न तो किसी को डर है और न अपने किए पर पछतावा. गिरती मानसिकता इसके लिए हम सब ज़िम्मेदार हैं और उसको बदलना किसी एक के बस में नही है. हर किसी को अपनी भूमिका निभानी होगी, खासकर महिलाओ को.
Pramod Bangalore
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1/5/08 1:38 PM GMT
जी हाँ, नैतिक मूल्यों में आई गिरावट ने आज बद-दिमाग़ी और बदतमीज़ी की इंतहा कर दी है. दरअसल, परिवार और समाज का अनुसासन एक तरफ़ ढीला पड़ा है तो दूसरी तरफ़ शिक्षा की कमी ने लोगों को तंगदिल बना दिया है जिससे आज के नौजवान पथभ्रष्ट होते जा रहे हैं. मेरा मानना है कि एहतियात बरतते हुए लड़कियाँ अगर सार्वजनिक स्थानों पर जाते समय अपने पहनावे का ध्यान रखते हुए वक़्त बे वक़्त बाहर आने-जाने का ख़याल रखें तो इस तरह की घटनाओं से बचा जा सकता है.
RAJEEV SHRIVASTAV RENUKOOT(UP),INDIA
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1/5/08 11:36 AM GMT
जब हमें यह ख़बर मिली तो हमें बहुत दुख हुआ. आख़िर लोग इतने वहशी कैसे हो सकते हैं. जिस भारतीय समाज में स्त्रियों को इतना मान-सम्मान दिया जाता है उस समाज में ऐसा शर्मिंदा कर देने वाला कृत्य भारतीय संस्कृति पर कलंक है.
Abhishek pandey New delhi
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1/5/08 10:18 AM GMT
बेशक, इस तरह की घटनाएँ समाज और देश के लिए शर्मनाक हैं. इससे ज़्यादा शर्मनाक पुलिस और पुलिस आयुक्त का रवैया है. अदालत ने भी उन्हें जमानत दे दी है. महिलाओं के साथ बदसलूकी करने वाले इन लोगों को फांसी की सज़ा दी जानी चाहिए. साथ ही ग़ैरज़िम्मेदार पुलिकर्मियों को भी दंडित किया जाना चाहिए.
sharad Singh Bhopal
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1/5/08 8:41 AM GMT
मुंबई में छेड़छाड़ की घटना के आरोपियों को ज़मानत मिलने से मैं बहुत आहत हूँ. कुछ दिनों बाद शायद उन्हें बेक़सूर भी ठहरा दिया जाए. ये घटना मीडिया में आने से चर्चा में आई, लेकिन ये नहीं भूलना चाहिए ऐसी घटना शायद देश के दूसरे हिस्सों में होती रहती है.
ASHOK SHARJAH
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1/5/08 3:47 AM GMT
यह समाज के नैतिक पतन का प्रमाण है. एडवांस सोसाइटी का मतलब खुलापन नहीं है. इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए हमें अश्लीलता को बढ़ावा नहीं देना चाहिए. संतुलन सबसे ज़रूरी है.
Surendra Rajpurohit Denton
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1/5/08 2:08 AM GMT
मुंबई में नये साल के जश्न पर महिलाओं के साथ हुई बदसलूकी इनसानियत के लिए शर्मनाक है. इस वक़्त समाज में महिलाओं की स्थिति सुधर रही है. महिलाओं अपनी योग्यता के दम पर समाज में योगदान कर रही हैं. महिलाओं की सुरक्षा के लिए ख़ास कदम उठाए जाने चाहिए.
zaheer Lalitpuri lalitpur
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1/4/08 10:43 PM GMT
नैतिकता में आई कमी बेशक ऐसी घटनाओ की जननी है. अपनी भावनाओं को बेलगाम होने देना और खुद बेकाबू हो जाना किसी भी नज़रिये से सही नही है पर इसके लिए केवल पुरुष दोषी नहीं है, महिलाएँ भी बाज नहीं आती हैं. यह दीगर बात है कि उसे गंभीरता से नही लिया जाता है. मुंबई की घटना भी मिसाल बन सकती है, अगर मानव और समाज उससे सबक ले सकें.
Javed Usmani Bilaspur भारत
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1/4/08 7:27 PM GMT
इस ख़बर से ये मालूम होता है कि लोगों का दिल मर चुका है और वे संवेदनहीन हो गए हैं. ये घटना एक भीड़भाड़ वाले इलाके में हुई. वहाँ मौजूद इनसानों ने अगर जानवर बन चुके इन लोगों का विरोध किया होता तो इंसानियत का कुछ भला हो सकता था. ये घटना बदसलूकी करने वालों और बदसलूकी देखने वालों दोनो के नैतिक पतन का आईना है.
IQBAL NEW DELHI
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1/4/08 6:33 PM GMT
जो लड़कियां तंग और भड़काऊ कपड़े पहनती हैं वे ऐसी घटनाओं को बढ़ावा देती हैं. लड़कियों को भी कुछ एहतियात बरतनी चाहिए.
rajesh portsmoth
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1/4/08 5:26 PM GMT
आज घटना के चौथे दिन छेड़खानी करने के आरोप में 14 लोगों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है, लेकिन ये घटना हुई ही क्यों, ये बात सोचने वाली है. गिरफ्तार लोगों में ज्यादातर चपरासी, कुरियर ब्वॉय जैसे लोग हैं और शिकार हुई लड़कियां एनआरआई परिवार जुड़ी है. मुंबई में और मुंबई क्या पूरे भारत में आर्थिक असमानता, सुविधा सपन्न और सुविधाहीन लोगों के बीच खाई कितनी बढ़ गई है. यहां बहुत गुस्सा और असंतोष है जो ऐसी प्रतिक्रियाओ के रूप में बाहर आता है. नही रुकेगा ये सब जब तक इसके कारण पर चोट नहीं की जाएगी.
आनन्द के. कृष्ण NOIDA
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1/4/08 5:10 PM GMT
कृप्या बदसलूकी की शिकार महिलाओं को ही घटना के लिए ज़िम्मेदार ठहराना बंद कीजिए. पीड़ित महिलाओं और उनके परिवार पर क्या गुजर रही होगी, इसका अहसास होना चाहिए. सरकार को दोषियों को जल्द पकड़कर उचित सज़ा देनी चाहिए.
vikram verma usa
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1/4/08 3:41 PM GMT
जो महिलाओं के ख़िलाफ़ लिखते रहे हैं वे इस घटना और देश के दूसरे हिस्सों में ऐसी घटनाओं के लिए ज़िम्मेदार हैं. जो महिलाएँ होटल से बाहर निकलीं और बदसलूकी का शिकार हुईं वे इस घटना के लिए जिम्मेदार कैसे हो सकती हैं. जिम्मेदार लोगों को जल्द से जल्द गिरफ़्तार किया जाना चाहिए.
Dr. Kumud Bandhu Mishra Deoria, Pipra Mishra,UP, India
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1/4/08 3:12 PM GMT
मुझे ये समझ नहीं आता कि ये सब सवाल तब क्यों उठते हैं जब कोई अनहोनी घटना घट जाती है. ये घटना हमारी सभ्यता और संस्कृति का प्रतिनिधित्व नहीं करती.
Krishna Agnihotri Lakhimpur kheri
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