इस बहस को सहेज कर रख लिया गया है – जवाब देने की अनुमति नहीं है
कितने सुरक्षित हैं भारत के शहर?
मुंबई की लोकल ट्रेनों में 11 जुलाई, 2006 को हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में 187 लोगों की मौत हो गई थी और क़रीब 700 लोग घायल हुए थे.
मुंबई से पहले अयोध्या, दिल्ली, बनारस, और 11 जुलाई 2006 के बाद मालेगाँव, समझौता एक्सप्रेस और हैदराबाद में भी बम विस्फोट हो चुके हैं.
ऐसे में यह अहम सवाल है कि क्या आज के समय में भारत जैसे देश के तेज़ी से विकसित होते शहर सुरक्षा की दृष्टि से भी आगे बढ़े हैं. क्या भारत का ख़ुफ़िया तंत्र, प्रशासनिक चुस्ती और आपदा प्रबंधन इतना मज़बूत है कि इन हमलों की स्थिति से निपट सके.
क्या आप अपने शहरों में ख़ुद को सुरक्षित महसूस करते हैं. क्या मुंबई और बाक़ी शहरों में सरकार, प्रशासन और लोगों ने ऐसे हमलों के ख़तरे को गंभीरता से लिया है और इसके लिए ज़रूरी क़दम उठाए गए हैं.
क्या सोचते हैं आप इस बारे में, क्या हैं इन तैयारियों को लेकर आपके अनुभव और क्या सुझाव देना चाहेंगे आप ताकि और चुस्त हो सुरक्षा की तैयारियाँ.
(आप अपने विचार साथ में दिए गए वर्चुअल कीबोर्ड की मदद से हिंदी में टाइप करके भेज सकते हैं)
प्रकाशित:
7/9/07 10:19 AM GMT
टिप्पणियाँ
टिप्पणियों की संख्या:98
सभी टिप्पणियाँ जैसे जैसे वो आती रहती हैं
Added:
7/12/07 8:24 AM GMT
चरमपंथी हमलों से बचने के लिए सुरक्षा के पूरे इंतज़ाम होने चाहिएं. केंद्र और राज्य सरकारों को सुनिश्चित करना होगा कि जो भी राष्ट्रीय अखंडता को नुक़सान पहुँचाए उसे दंडित किया जाए.
hanumant shukla kanpur
|
Added:
7/12/07 5:26 AM GMT
भारत की जनता बेबस और असुरक्षित है, सुरक्षित सिर्फ़ नेता और अफ़सर हैं.
himmat singh bhati jodhpur
|
Added:
7/12/07 5:00 AM GMT
इस दौर में देश का कोई भी कोना सुरक्षित नहीं हैं. दुनिया कितनी भी जोर आजमाईश कर ले, भारतीय़ उससे उबर जाते है. मुंबई बम धमाकों को ही ले ले, मुंबई वासी दूसरे दिन ही अपने अपने काम पर लग गये. डर तो था मन में, लेकिन मरने से किस को डर नहीं लगता. मैनें वो मंजर देखा था.
अमिता किरन कुजूर चेनई
|
Added:
7/11/07 7:19 PM GMT
मुंबई बम धमाकों के लिए देश की लचर कानून व्यवस्था और गंदी राजनीति ज़िम्मेदार है. इससे छुटकारा पाने के लिए ज़रूरी है देश के सभी नेताओं और पुलिस अधिकारियों का ईमानदार होना. मनोज कुमार सिंह, वापी
manoj kumar singh vapi
|
Added:
7/11/07 4:06 PM GMT
हमारे देश में नेता सुरक्षित है, जनता को सुरक्षा कि कहां आवश्यकता है. बच्चों को हम रोज स्कूल में गवाते और याद दिलाते है "भारत भाग्य विधाता" यानि कि इस देश का तो भगवान ही मालिक हैं. जब तक लोग दलगत राजनिति से उपर नहीं देखेंगे तब तक वो कुएं के मेडंक की तरह जाति से उपर समाज और देश को नहीं देख सकेंगे.
भावेश गौड. सिंगापुर
|
Added:
7/11/07 3:27 PM GMT
जब भारत की सबसे बड़ी पंचायत संसद को भेदा जा सकता है तो आम सार्वजनिक जगहों की बात ही क्या की जाए. कानून की खामियों और कानून का लचीलापन को देखते हुए कहा जा सकता है कि आतंकवाद से पूरी सुरक्षा नहीं मिल सकती.
jitendra singh bhati jodhpur rajasthan भारत
|
Added:
7/11/07 3:05 PM GMT
आम आदमी आतंकवाद को कुचल सकता है लेकिन इसके लिए ज़रूरी है कि देश के नेता राष्ट्रवादी हों लेकिन हमारे नेताओं को गद्दी की पड़ी है, देश की नहीं.
FAZAL HUSSAIN HABSHEE KUWAIT
|
Added:
7/11/07 2:52 PM GMT
हम लोग आतंकवाद के मूल कारणों को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं.
vali kagzi bolton
|
Added:
7/11/07 2:34 PM GMT
भारत में सब भगवान भरोसे चल रहा है. कोई भी बडी घटना होने पर कुछ दिनों तक बहुत हाय तौबा मचती है फिर सब कुछ भुला कर नेतागण अपनी गंदी राजनीति में लिप्त हो जाते हैं. जनता बेबस और लाचार हो गयी है. मुझे लगता है कि जनता की ये हताशा आने वाले दिनों में एक क्रांति का रूप लेगी.
नीरज यूके
|
Added:
7/11/07 1:41 PM GMT
अरे, टेंशन की क्या बात है, सबको पता है कि शहर सुरक्षित नहीं है, लेकिन गाँव तो सुरक्षित हैं, गाँव में कभी बड़े बम धमाके की बात सुनी है. इसलिए शहर छोड़कर अब गाँव की ओर चलें.
Rakesh Sharma wetzlar जर्मनी
|
Added:
7/11/07 12:40 PM GMT
पत्थरों का ये शहर है, बेगाना कोई नहीं, इन दरख्तो-शाख में अब, याराना कोई नहीं।
Bhoopesh Noida
|
Added:
7/11/07 12:09 PM GMT
नहीं, हमारे शहर फ़िदायीन हमलों से निबटने के लिए तैयार नहीं हैं. आतंकवादी कहीं भी हमला कर सकते हैं, पुलिस हर जगह नहीं हो सकती. जब कोई जान देने की ठान ले तो उसे रोकना बहुत मुश्किल काम है.
rajan ghaziabad
|
Added:
7/11/07 11:47 AM GMT
जब हर जगह बिकाऊ और भ्रष्ट लोग हों वहाँ सुरक्षा की बात करना बेमानी है...यहाँ सब रामभरोसे है और रामभरोसे ही रहेगा.
फतेहलाल जैन डौबिवली
|
Added:
7/11/07 11:42 AM GMT
मैं मुबंई में रहता हूं. डेढ़ करोड़ की आबादी का शहर है.कौन आतंकवादी है और कौन नहीं, पता लगाना बेहद मुश्किल है. पुलिस के पास कोई जादुई चिराग तो है नहीं.मुश्किल ये है कि हम सुरक्षा को अपना अधिकार तो मानते हैं मगर सुरक्षा के प्रति कोई जिम्मेदारी नही चाहते.ऐसे में कोई सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकता.
Abhimanyu Shitole mumbai
|
Added:
7/11/07 11:39 AM GMT
आतंकवाद के कई रूप हैं, जैसे राजनीतिक आतंकवाद और अल क़ायदा का आतंकवाद. राजनीतिक आतंकवाद के रूप हैं गुजरात और मुंबई के दंगे. अल क़ायदा टाइप आतंकवाद के नमूने हैं मालेगाँव, हैदराबाद, वाराणसी और मुंबई के बम धमाके. इन धमाकों की वजह से हमारे देश का कोई शहर सुरक्षित नहीं है और मरता तो आम आदमी ही है.
sahil delhi
|
|
|